भारत निर्वाचन आयोग ने प्रिंट मीडिया में चुनावी विज्ञापनों के लिए पूर्व-प्रमाणन को अनिवार्य किया
सारांश
Key Takeaways
- प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों के लिए पूर्व-प्रमाणन अनिवार्य है।
- आवेदन कम से कम दो दिन पहले जमा करना होगा।
- MCMC द्वारा निगरानी और प्रमाणन की प्रक्रिया को तेज किया गया है।
- पेड न्यूज के मामलों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
- यह कदम चुनावी पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए है।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग ने आम चुनाव और उपचुनाव 2026 के लिए प्रिंट मीडिया में चुनावी विज्ञापनों के संबंध में नए निर्देश जारी किए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनावों और छह राज्यों में होने वाले उपचुनावों के दौरान निष्पक्ष चुनावी माहौल बनाए रखने के लिए, चुनाव से एक दिन पहले और चुनाव के दिन किसी भी राजनीतिक विज्ञापन का प्रकाशन केवल तभी किया जा सकता है जब उसकी सामग्री राज्य या जिला स्तर पर गठित मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (MCMC) से पूर्व-प्रमाणित हो।
आयोग ने यह भी बताया कि कोई भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार, संगठन या व्यक्ति बिना पूर्व-प्रमाणन के प्रिंट मीडिया में विज्ञापन नहीं प्रकाशित कर सकता। इसके लिए इच्छुक व्यक्ति या चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार को जिला MCMC के पास आवेदन करना होगा। सभी पंजीकृत राजनीतिक दल, जिनका मुख्यालय किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में है, विज्ञापनों के प्रमाणन के लिए राज्य स्तर की MCMC के पास आवेदन करेंगे।
आयोग ने प्री-सर्टिफिकेशन की समय सीमा भी निर्धारित की है। असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को होने वाले आम चुनाव के लिए विज्ञापनों का प्रकाशन 8 और 9 अप्रैल को होना है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान के कारण 22 और 23 अप्रैल को प्री-सर्टिफिकेशन अनिवार्य है। पश्चिम बंगाल में चरणबद्ध चुनावों के कारण 23 और 29 अप्रैल को प्री-सर्टिफिकेशन आवश्यक होगा।
निर्वाचन आयोग ने कहा कि प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों के लिए आवेदन कम से कम दो दिन पहले MCMC में प्रस्तुत करना होगा। राज्य और जिला स्तर पर MCMC को इस प्रक्रिया में सक्रिय कर दिया गया है, ताकि आवेदन की जांच और पूर्व-प्रमाणन तेजी से किया जा सके।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि MCMC केवल प्री-सर्टिफिकेशन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मीडिया में 'पेड न्यूज' या पैसे देकर छपवाई गई खबरों के संदिग्ध मामलों पर भी कड़ी निगरानी रखेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।
निर्वाचन आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और किसी भी राजनीतिक दल या उम्मीदवार द्वारा अनुचित लाभ उठाने से रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग ने सभी दलों और उम्मीदवारों से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने में मदद करें।