निर्वाचन आयोग ने प्रिंट मीडिया के राजनीतिक विज्ञापनों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की
सारांश
Key Takeaways
- प्री-सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन दो दिन पहले देना होगा।
- राजनीतिक विज्ञापनों का सर्टिफिकेशन अनिवार्य है।
- 'पेड न्यूज' पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
- चुनाव आयोग ने अवैध गतिविधियों पर कड़ा नियंत्रण रखा है।
- स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार को आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के लिए प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों के प्री-सर्टिफिकेशन हेतु नई और विस्तृत गाइडलाइंस जारी की हैं। इसका मुख्य उद्देश्य एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी माहौल का निर्माण करना है।
चुनाव आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के साथ-साथ छह राज्यों में उपचुनावों का शेड्यूल भी जारी किया था।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दिन या इससे एक दिन पहले प्रिंट मीडिया में कोई भी विज्ञापन तब तक प्रकाशित नहीं किया जा सकेगा, जब तक कि उसे राज्य या जिला स्तर पर मीडिया सर्टिफिकेशन और मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से सर्टिफिकेशन प्राप्त न हो जाए।
उम्मीदवार और अन्य आवेदक सर्टिफिकेशन के लिए जिला स्तर की एमसीएमसी से संपर्क कर सकते हैं, जबकि राज्य या केंद्र शासित प्रदेशों में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल राज्य स्तर की एमसीएमसी में आवेदन कर सकते हैं।
चुनाव शेड्यूल के अनुसार, प्रिंट विज्ञापनों का प्री-सर्टिफिकेशन कुछ विशेष तारीखों पर अनिवार्य होगा। असम, केरल और पुडुचेरी के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा। इसके लिए 8 और 9 अप्रैल को प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों के लिए प्री-सर्टिफिकेशन आवश्यक होगा। तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल को होगा, और यहां प्री-सर्टिफिकेशन 22 और 23 अप्रैल के विज्ञापनों पर लागू होगा।
पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान दो चरणों में होगा। पहले चरण के लिए 22 और 23 अप्रैल को, और दूसरे चरण के लिए 28 और 29 अप्रैल को प्री-सर्टिफिकेशन अनिवार्य होगा।
भारत निर्वाचन आयोग ने निर्देश दिया है कि प्री-सर्टिफिकेशन के लिए आवेदन, विज्ञापन प्रकाशित होने की निश्चित तारीख से कम से कम दो दिन पहले जमा किए जाने चाहिए। इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर एमसीएमसी को सक्रिय किया गया है, जिससे विज्ञापनों की त्वरित जांच और मंजूरी संभव हो सके।
इन समितियों को मीडिया में 'पेड न्यूज' (पैसे देकर छपवाई गई खबरों) के मामलों पर कड़ी नजर रखने और जहाँ आवश्यक हो, उचित कार्रवाई करने का कार्य भी सौंपा गया है।
इसके अतिरिक्त, आयोग ने 5 अप्रैल को बताया कि चुनाव वाले राज्यों में उसने प्रवर्तन (कानून लागू करने) के कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि एजेंसियों ने अब तक 650 करोड़ से अधिक की अवैध नकदी, शराब, नशीले पदार्थ, कीमती धातुएं और मुफ्त चीजें जब्त की हैं, ताकि चुनावों को किसी प्रलोभन से मुक्त रखा जा सके।