गोमती तट पर शिव का अद्भुत स्थान: जहां बेलपत्र डूबता है और फल लौटते हैं
सारांश
Key Takeaways
- रुद्रावर्त कुण्ड गोमती नदी के किनारे स्थित है।
- यहां बेलपत्र जल में डूब जाता है।
- दूध डालने पर वह सीधे नीचे की ओर जाता है।
- पांच फल अर्पित करने पर कुछ फल वापस आते हैं।
- स्थल धार्मिक और अद्भुत अनुभव का केंद्र है।
लखनऊ, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। गोमती नदी के तट पर स्थित रुद्रावर्त कुण्ड एक ऐसा स्थल है, जो पहली बार में साधारण प्रतीत होता है, लेकिन इसके भीतर एक अद्भुत शक्ति छिपी हुई है। यह कहा जाता है कि इस कुंड में महादेव स्वयं शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं।
यहां के भक्तों का मानना है कि जब कोई सच्चे मन से भगवान शिव का नाम लेकर बेलपत्र अर्पित करता है, तो वह जल में डूब जाता है। यह सुनने में साधारण लग सकता है, लेकिन प्रायः बेलपत्र जल में तैरता है, डूबता नहीं। लेकिन इस कुंड में जब बेलपत्र अर्पित किया जाता है, तो वह धीरे-धीरे नीचे चला जाता है, जैसे वह सीधे शिवलिंग तक पहुंच रहा हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस कुंड में भगवान शिव स्वयं शिवलिंग के रूप में स्थित हैं। इसलिए जो भी अर्पित किया जाता है, वह सीधे उन्हें प्राप्त होता है। एक और रोचक बात यह है कि यदि बेलपत्र थोड़ा भी टूटा या खंडित हो जाए, तो वह नहीं डूबता।
केवल बेलपत्र ही नहीं, यहां एक और अनोखी घटना देखने को मिलती है। जब भक्त दूध चढ़ाते हैं, तो वह पानी में फैलने के बजाय एक सीधी धारा बनाते हुए नीचे की ओर जाता है। आमतौर पर दूध डालने के बाद वह तुरंत फैल जाता है, लेकिन यहां यह दृश्य लोगों को चकित कर देता है। ऐसा लगता है जैसे कोई अदृश्य शक्ति उसे दिशा दे रही हो।
मान्यता है कि यदि आप पांच फल अर्पित करते हैं, तो कुछ समय बाद उनमें से एक या दो फल वापस ऊपर आ जाते हैं। इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह दृश्य देखकर कई लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं कि यह कैसे संभव है। कुछ इसे आस्था का चमत्कार मानते हैं, जबकि कुछ इसके पीछे वैज्ञानिक कारण खोजने का प्रयास करते हैं।
नैमिषारण्य के निकट स्थित यह पवित्र स्थल सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि एक अद्भुत अनुभव भी प्रदान करता है। यहां आने वाले लोग केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि इस रहस्य को अपनी आँखों से देखने की इच्छा लेकर आते हैं।