नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस में की सदस्यता ग्रहण

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नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस में की सदस्यता ग्रहण

सारांश

कोलकाता में चंद्र कुमार बोस ने भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। उनकी यह यात्रा राजनीतिक बदलाव और नेताजी की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रतीक है। जानें उनके विचार और टीएमसी में शामिल होने की वजह।

Key Takeaways

  • चंद्र कुमार बोस ने भाजपा छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने का निर्णय लिया।
  • उनका यह कदम नेताजी की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।
  • टीएमसी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया है।
  • चंद्र बोस ने भाजपा में शामिल होने को एक ऐतिहासिक गलती बताया।
  • उन्होंने विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ अपनी चिंता जताई।

कोलकाता, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से पूरी तरह अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होने का निर्णय लिया।

उन्हें तृणमूल भवन में औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया गया, जहां राज्य मंत्री ब्रात्य बसु और पार्टी सांसद कीर्ति आजाद की उपस्थिति में उन्हें तृणमूल का झंडा सौंपा गया।

इससे पहले, विशेष गहन पुनरीक्षण सुनवाई के दौरान चंद्र बोस भाजपा से निराश हो गए थे। उन्होंने यह सवाल उठाया कि जब वे नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे स्वतंत्रता सेनानी के प्रपौत्र हैं, तो उनकी नागरिकता पर संदेह क्यों किया जा रहा है?

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चंद्र बोस ने औपचारिक रूप से तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "कुछ साल पहले मैंने भाजपा में शामिल होकर एक ऐतिहासिक गलती की थी। आज मैंने उस गलती को सुधार लिया है।"

2016 में चंद्र बोस ने हावड़ा की एक रैली में भाजपा की सदस्यता ली थी, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव के बाद वे पार्टी से दूर हो गए थे।

उन्होंने कहा, "2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए, तो मुझे वे बहुत पसंद आए। उन्होंने देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाया। लेकिन, 2016 में जब मैं पार्टी में शामिल हुआ, तो धीरे-धीरे मुझे लगा कि भाजपा देश के संविधान का सम्मान नहीं करती। इसके अलावा, उनकी बंगाल की संस्कृति से भी कोई समानता नहीं है। आज देश में जो राजनीति चल रही है 'सांप्रदायिकता और विभाजन की राजनीति' वह बहुत नुकसानदायक है।"

उन्होंने आगे कहा, "पहले नेताजी के जन्मदिन 23 जनवरी को मैंने ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। मैंने उनसे कहा था कि आपकी लड़ाई सिर्फ बंगाल ही नहीं, पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। मैंने उनसे विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ आगे आने का आग्रह किया था।"

चंद्र कुमार बोस के पार्टी में शामिल होने पर टीएमसी की तरफ से सोशल मीडिया पर बताया गया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत हमेशा जनता के प्रति निडर समर्पण, स्वयं से पहले सेवा और बंगाल को सर्वोपरि रखने की रही है। आज नेताजी के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने औपचारिक रूप से हमारी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। यह इस बात का प्रतीक है कि सेवा, त्याग और बंगाल के प्रति प्रेम की सच्ची भावना आज कहां विद्यमान है।

पार्टी की तरफ से आगे कहा गया कि हम चंद्र कुमार बोस का हार्दिक स्वागत करते हैं और आशा करते हैं कि उनका अनुभव और उनकी दृढ़ निष्ठा हमारे साझा उद्देश्य को समृद्ध करेगी।

Point of View

बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे राजनीतिक विचारधाराएं बदलती हैं। यह कदम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।
NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

चंद्र कुमार बोस ने किस पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया?
चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होने का निर्णय लिया।
चंद्र कुमार बोस भाजपा से क्यों अलग हुए?
चंद्र कुमार बोस भाजपा से निराश होकर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए।
चंद्र कुमार बोस ने कब भाजपा में शामिल हुए थे?
चंद्र कुमार बोस ने 2016 में भाजपा में शामिल हुए थे।
चंद्र कुमार बोस की यह सदस्यता क्या दर्शाती है?
यह सदस्यता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विरासत को आगे बढ़ाने का प्रतीक है।
चंद्र कुमार बोस के पार्टी में शामिल होने पर टीएमसी का क्या कहना है?
टीएमसी ने चंद्र कुमार बोस का स्वागत करते हुए कहा कि उनका अनुभव और निष्ठा हमारी पार्टी को समृद्ध करेगी।
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