महात्मा फुले की 200वीं जयंती पर संसद में राष्ट्रपति, पीएम मोदी और नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

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महात्मा फुले की 200वीं जयंती पर संसद में राष्ट्रपति, पीएम मोदी और नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

सारांश

महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती पर देश के शीर्ष नेताओं ने संसद भवन में श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां उनके योगदान को याद किया गया। यह अवसर समाज में समानता और न्याय के लिए उनके संघर्ष को सम्मानित करने का है।

Key Takeaways

  • महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती का आयोजन
  • समानता और न्याय के लिए उनके योगदान को याद किया गया
  • महिला शिक्षा के लिए उनके ऐतिहासिक कार्य
  • देश के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की
  • सावित्रीबाई फुले का भी महत्वपूर्ण योगदान

नई दिल्ली, ११ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महान समाज सुधारक, शोषितों और वंचितों के लिए एक सशक्त आवाज, महात्मा ज्योतिराव फुले की २००वीं जयंती का उत्सव मनाया जा रहा है। इस अवसर पर, समाज में समानता और न्याय की दिशा में उनके महत्वपूर्ण योगदान को याद करते हुए संपूर्ण देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। संसद भवन में भी शनिवार को देश के प्रमुख नेताओं ने ज्योतिराव फुले को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई केंद्रीय नेताओं ने संसद परिसर में पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, अर्जुन राम मेघवाल, और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी उपस्थित रहे।

सभी नेताओं ने ज्योतिराव फुले के शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, और सामाजिक समानता के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान को याद किया और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "आज महात्मा ज्योतिराव फुले की २००वीं जयंती है। १५ अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी ने लालकिले से इस जयंती को भव्य तरीके से मनाने का आह्वान किया था। शनिवार को संसद परिसर में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा स्पीकर सहित अनेक नेताओं ने भाग लिया।"

वीरेंद्र कुमार ने आगे कहा, "जब शिक्षा केवल कुछ लोगों के लिए थी और बेटियों को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, तब महात्मा फुले ने समता, समानता, और सभी के लिए शिक्षा के अधिकार की बात की। उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के माध्यम से पहले बालिका विद्यालय की स्थापना की। इसके लिए उन्हें समाज का काफी विरोध झेलना पड़ा, लेकिन महात्मा फुले ने सभी विरोधों को दरकिनार कर बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाया। वे बंधु, जो शिक्षा से दूर रह गए, उन्हें भी इससे जुड़ने का अवसर दिया गया।"

उन्होंने आगे कहा, "आज २०० साल बीत जाने के बाद भी महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले द्वारा जलाई गई अलख आज भी दिलों में एक क्रांति की तरह जल रही है। उनकी जयंती को पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।"

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा, "महात्मा फुले ने एक सत्य सोधक समाज की स्थापना की। सत्य और महिला सशक्तिकरण उनके जीवन में महत्वपूर्ण थे। उन्होंने महिला शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया। सावित्रीबाई फुले को इस देश की पहली महिला शिक्षिका होने का गर्व पूरा समाज और देश करता है। ये कार्य भी महात्मा फुले जी ने किए। उन्होंने सावित्रीबाई फुले को पढ़ाने और स्कूल खोलने की अनुमति दी। महात्मा फुले का व्यक्तित्व बड़ा था।"

Point of View

जो हमें उनके अद्वितीय योगदान और विचारों की याद दिलाता है। समाज में समानता और न्याय के लिए उनका संघर्ष आज भी प्रासंगिक है। इस अवसर पर नेताओं द्वारा उनकी श्रद्धांजलि उनके विचारों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा है।
NationPress
13/04/2026

Frequently Asked Questions

महात्मा फुले ने शिक्षा के क्षेत्र में क्या योगदान दिया?
महात्मा फुले ने महिलाओं के लिए पहला विद्यालय स्थापित किया और समता और समानता के लिए शिक्षा का अधिकार की वकालत की।
महात्मा फुले की जयंती कब मनाई जाती है?
महात्मा फुले की जयंती हर वर्ष 11 अप्रैल को मनाई जाती है।
महात्मा फुले के साथ उनकी पत्नी का क्या योगदान था?
सावित्रीबाई फुले ने भी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और वे देश की पहली महिला शिक्षिका बनीं।
महात्मा फुले का सामाजिक दृष्टिकोण क्या था?
महात्मा फुले का दृष्टिकोण शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के प्रति अत्यधिक सहानुभूतिपूर्ण था।
महात्मा फुले की विरासत का क्या महत्व है?
महात्मा फुले की विरासत आज भी हमारे समाज में समानता और शिक्षा के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी हुई है।
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