9 जुलाई 2026
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चुनाव आयोग का कड़ा रुख: 'साइलेंस पीरियड' में चुनाव प्रचार और एग्जिट पोल पर पूर्ण प्रतिबंध

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चुनाव आयोग का कड़ा रुख: 'साइलेंस पीरियड' में चुनाव प्रचार और एग्जिट पोल पर पूर्ण प्रतिबंध

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा और उपचुनावों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 'साइलेंस पीरियड' के दौरान चुनावी प्रचार और एग्जिट पोल पर पूरी तरह से रोक रहेगी। जानिए इससे क्या प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य बातें

'साइलेंस पीरियड' के दौरान चुनावी प्रचार पर रोक।
मतदान से 48 घंटे पहले लागू होगा।
एग्जिट पोल पर भी रोक।
उल्लंघन पर कड़ा दंड।
सभी मीडिया संस्थानों से पालन की अपील।

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। इस महीने होने वाले विधानसभा और उपचुनावों के संदर्भ में भारत निर्वाचन आयोग ने मीडिया और राजनीतिक दलों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान से पहले निर्धारित 'साइलेंस पीरियड' के दौरान कोई भी चुनावी प्रचार या प्रभाव डालने वाला सामग्री का प्रसारण पूरी तरह से निषिद्ध रहेगा।

15 मार्च को, चुनाव आयोग ने असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की 8 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा की थी।

आयोग के अनुसार, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126(1)(बी) के अंतर्गत मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले 'साइलेंस पीरियड' लागू हो जाता है। इस अवधि में किसी भी टीवी चैनल, रेडियो या अन्य प्लेटफार्म से चुनाव से संबंधित कोई भी सामग्री प्रसारित नहीं की जा सकती, जो मतदाताओं को प्रभावित कर सके।

चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, असम में 9 अप्रैल को मतदान होगा और यहां साइलेंस पीरियड 7 अप्रैल शाम 5 बजे से 9 अप्रैल शाम 5 बजे तक रहेगा। केरल और पुडुचेरी में भी 9 अप्रैल को वोटिंग होगी, जहां साइलेंस पीरियड 7 अप्रैल शाम 6 बजे से 9 अप्रैल शाम 6 बजे तक लागू रहेगा।

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा और यहां साइलेंस पीरियड 21 अप्रैल शाम 6 बजे से 23 अप्रैल शाम 6 बजे तक रहेगा। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल है। पहले चरण का साइलेंस पीरियड 21 अप्रैल शाम 6 बजे से 23 अप्रैल शाम 6 बजे तक लागू रहेगा, जबकि दूसरे चरण के लिए 27 अप्रैल शाम 6 बजे से 29 अप्रैल शाम 6 बजे तक रहेगा।

चुनाव आयोग ने मीडिया संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस दौरान प्रसारित होने वाले किसी भी कार्यक्रम में ऐसी कोई सामग्री, विचार या अपील शामिल न हो, जो किसी पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में माहौल बना सके। इसमें ओपिनियन पोल का प्रसारण भी शामिल है।

आयोग ने धारा 126ए के अंतर्गत एग्जिट पोल पर भी रोक लगाई है। 9 अप्रैल सुबह 7 बजे से लेकर 29 अप्रैल शाम 6:30 बजे तक किसी भी प्रकार का एग्जिट पोल करना या उसके नतीजे प्रकाशित करना पूरी तरह से निषिद्ध रहेगा।

चुनाव आयोग ने चेतावनी दी है कि इन नियमों का उल्लंघन करने पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। सभी मीडिया संस्थानों से इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील की गई है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइलेंस पीरियड क्या है?
साइलेंस पीरियड वह समयावधि है जब मतदान से पहले किसी भी प्रकार के चुनावी प्रचार का निषेध होता है।
साइलेंस पीरियड कब शुरू होता है?
यह मतदान से 48 घंटे पहले शुरू होता है।
क्या एग्जिट पोल पर भी रोक है?
हां, आयोग ने एग्जिट पोल के प्रसारण पर भी रोक लगा दी है।
उल्लंघन करने पर क्या दंड होगा?
उल्लंघन करने पर दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन क्यों जरूरी है?
यह सुनिश्चित करने के लिए कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
राष्ट्र प्रेस
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