पश्चिम बंगाल चुनाव: मतगणना के बाद भी तैनात रहेंगी सीएपीएफ की 500 कंपनियां
सारांश
Key Takeaways
- सीएपीएफ की 500 कंपनियाँ चुनाव के बाद भी तैनात रहेंगी।
- मतदाताओं को मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश मिलेगा।
- चुनाव आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
कोलकाता, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं। सभी राजनीतिक दल इस बार चुनाव में अपनी पूर्ण ताकत लगा रहे हैं। इसी बीच, भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने शांतिपूर्वक चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की है।
चुनाव आयोग के अनुसार, जैसे ही पश्चिम बंगाल में मतगणना समाप्त होगी, वहाँ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 500 कंपनियाँ कानून-व्यवस्था बनाए रखने हेतु तैनात रहेंगी। चुनाव समाप्त होने के बाद भी ये कंपनियाँ बंगाल में तैनात रहेंगी, और यह तैनाती ईसीआई के अगले आदेश तक जारी रहेगी।
ज्ञात हो कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनावों तथा गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड और त्रिपुरा के उपचुनावों का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके अनुसार असम, केरल, पुडुचेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पश्चिम बंगाल में मतदान दो चरणों में होगा—23 अप्रैल और 29 अप्रैल को।
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के अंतर्गत, किसी भी व्यवसाय, औद्योगिक उपक्रम या संस्था में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति, जिसे लोकसभा या राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव में मतदान का अधिकार है, उसे मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश दिया जाएगा।
इस अवकाश के कारण किसी भी कर्मचारी के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाएगी। जो नियोक्ता इन प्रावधानों का उल्लंघन करेगा, उसे दंड का सामना करना पड़ सकता है। सभी दैनिक वेतन भोगी और आकस्मिक श्रमिकों को भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का अधिकार होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाता (जिनमें आकस्मिक और दैनिक वेतन भोगी श्रमिक शामिल हैं) जो अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर काम कर रहे हैं, लेकिन जहां मतदान हो रहा है, वहां पंजीकृत हैं, उन्हें भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश मिलेगा, ताकि वे अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें।
आयोग ने सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित अधिकारियों को इन प्रावधानों के सख्त पालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी मतदाता स्वतंत्र और सुविधाजनक तरीके से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।