भोपाल पासपोर्ट कार्यालय की नई पहल: दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल जानकारी
सारांश
Key Takeaways
- समावेशी पहल से सभी आवेदकों को लाभ होगा।
- दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल जानकारी प्रदान की गई है।
- बोलने-सुनने में असमर्थों के लिए सांकेतिक भाषा वीडियो हैं।
- क्यूआर कोड द्वारा अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
- यह पहल नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।
भोपाल, 7 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, भोपाल ने आवेदकों के लिए समावेशी प्रचार सामग्री प्रस्तुत करते हुए एक नई आउटरीच पहल का आरंभ किया है, जो क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों में अपनी तरह का पहला प्रयास है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पासपोर्ट सेवाओं की जानकारी सभी आवेदकों तक, विशेष रूप से दृष्टिबाधित और बोलने-सुनने में असमर्थ व्यक्तियों तक, सुगमता से पहुँच सके।
इस पहल के अंतर्गत, दृष्टिबाधित आवेदकों के लिए पासपोर्ट सेवाओं की जानकारी ब्रेल लिपि में प्रदान की गई है। ब्रेल पुस्तिकाओं में पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है, जिसमें ईसीआर और नॉन-ईसीआर श्रेणियां, आवश्यक दस्तावेज़ों से संबंधित सलाह, आवेदन के प्रकार जैसे सामान्य और तत्काल, और ‘क्या करें और क्या न करें’ जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, कार्यालय में ब्रेल साइनेज प्लेटें भी लगाई गई हैं, ताकि कार्यालय में आने वाले दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए दिशा-निर्देश और सूचनाएं आसानी से पढ़ी जा सकें।
इसी तरह, बोलने और सुनने में असमर्थ आवेदकों के लिए सांकेतिक भाषा में वीडियो की एक श्रृंखला शुरू की गई है। इन वीडियो में आवेदन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी दी गई है, जिसमें काउंटर ए (बायोमेट्रिक पंजीकरण), काउंटर बी (दस्तावेज सत्यापन), और काउंटर सी (पासपोर्ट आवेदन की स्वीकृति) शामिल हैं। वीडियो के साथ क्यूआर कोड भी जोड़े गए हैं, जिससे आवेदक सीधे संबंधित वेबपेज पर जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस पहल का उद्घाटन संयुक्त सचिव (पीएसपी) बीएस मुबारक ने 7 अप्रैल 2026 को क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी शितांशु चौरसिया की उपस्थिति में किया।
अधिकारियों ने कहा कि यह पहल पासपोर्ट सेवाओं को अधिक समावेशी और नागरिक-केंद्रित बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है और यह सुनिश्चित करती है कि कोई भी आवेदक पीछे न छूटे।
इस कदम से यह स्पष्ट होता है कि पासपोर्ट विभाग डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों में समान रूप से सभी नागरिकों के लिए सेवाओं को सुलभ बनाने के प्रयास में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की पहलों से न केवल दृष्टिबाधित और सुनने-बोलने में असमर्थ आवेदकों को लाभ मिलेगा, बल्कि अन्य नागरिकों के लिए भी पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया और जानकारी अधिक पारदर्शी और आसान हो जाएगी।