केरल चुनाव से पहले 'शांत अवधि' का ऐलान, चुनाव प्रचार पर लगेगा प्रतिबंध

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केरल चुनाव से पहले 'शांत अवधि' का ऐलान, चुनाव प्रचार पर लगेगा प्रतिबंध

सारांश

मतदान की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए केरल में चुनाव प्रचार पर प्रतिबंध लगेगा। इस दौरान सभी जनसभा और रैलियों पर पाबंदी रहेगी। जानें इस महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी।

Key Takeaways

  • शांत अवधि का उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है।
  • सभी प्रचार गतिविधियाँ 7 अप्रैल शाम 6 बजे से बंद होंगी।
  • मतदाता को बाहरी प्रभाव से सुरक्षित रखना प्राथमिकता है।
  • सभी राजनीतिक दलों को निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

तिरुवनंतपुरम, 6 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जैसे-जैसे मतदान का दिन नजदीक आ रहा है, राज्य में 7 अप्रैल की शाम से 48 घंटों के लिए कड़ी निगरानी वाली 'शांत अवधि' लागू होगी। यह कदम अधिकारियों द्वारा एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।

केरल में गुरुवार को 140 नए विधायकों के चुनाव के लिए मतदान होगा और मतगणना 4 मई को की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. रतन यू. केलकर ने सोमवार को घोषणा की कि चुनाव कानूनों के अनुसार, 7 अप्रैल को शाम 6 बजे से सभी प्रकार की जन प्रचार गतिविधियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा।

जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के अंतर्गत लागू ये प्रतिबंध, उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों को मतदान समाप्त होने से पहले के अंतिम 48 घंटों में सार्वजनिक सभाओं, रैलियों या जुलूसों का आयोजन करने या उनमें भाग लेने से रोकते हैं।

इस अवधि के दौरान संगीत शो, नाट्य प्रदर्शन, या मतदाताओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर कड़ी पाबंदी है।

अधिकारियों ने टीवी, सिनेमा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए चुनाव से संबंधित सामग्री के प्रदर्शन पर भी रोक लगा दी है।

यह प्रतिबंध रेडियो प्रसारण तक भी फैला हुआ है ताकि मतदाताओं को किसी भी अंतिम-मिनट के राजनीतिक संदेश का सामना न करना पड़े जो उनके निर्णय को प्रभावित कर सके।

इसके अतिरिक्त, मतदान से एक दिन पहले और मतदान के दिन, समाचार पत्रों में राजनीतिक विज्ञापनों के लिए मीडिया प्रमाणन और निगरानी समिति (एमसीएमसी) से पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।

अनुचित प्रभाव को रोकने के लिए एक और उपाय के रूप में, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, पार्टी पदाधिकारियों और प्रचारकों को, जो किसी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत मतदाता नहीं हैं, प्रचार अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद उस क्षेत्र को छोड़ देना होगा।

इस कदम का उद्देश्य बाहरी हस्तक्षेप को कम करना और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। मतदाताओं के विश्वास के महत्व पर जोर देते हुए, मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और आम जनता से इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है।

Point of View

चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अधिकारियों के द्वारा उठाए गए कदमों का उद्देश्य मतदाता के निर्णय को प्रभावित करने वाले किसी भी प्रकार के बाहरी हस्तक्षेप को समाप्त करना है। यह एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है।
NationPress
11/04/2026

Frequently Asked Questions

शांत अवधि क्या होती है?
शांत अवधि वह समय है जब चुनावी प्रचार गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है ताकि मतदाता स्वतंत्र रूप से मतदान कर सकें।
कब से शांत अवधि लागू होगी?
केरल में 7 अप्रैल की शाम 6 बजे से शांत अवधि लागू होगी।
इस अवधि में क्या गतिविधियाँ प्रतिबंधित हैं?
इस अवधि में सभी प्रकार की प्रचार गतिविधियाँ, जनसभाएँ, संगीत शो और नाट्य प्रदर्शन प्रतिबंधित हैं।
क्या मीडिया को भी प्रतिबंध का सामना करना पड़ेगा?
हां, चुनाव से संबंधित सामग्री के प्रसारण पर मीडिया को भी रोक लगेगी।
मतदाता को क्या करना चाहिए?
मतदाताओं को इन निर्देशों का पालन करना चाहिए और स्वतंत्र रूप से मतदान करना चाहिए।
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