चुनावी राज्यों में ईसीआई द्वारा सख्त कदम, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की पूरी रोक

Click to start listening
चुनावी राज्यों में ईसीआई द्वारा सख्त कदम, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की पूरी रोक

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी राज्यों में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) को लागू किया है। सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार के लिए दुरुपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। जानें क्या हैं नए नियम और उनकी प्रभावशीलता।

Key Takeaways

  • आदर्श आचार संहिता का पालन अनिवार्य है।
  • सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग नहीं होगा।
  • शिकायतों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित किया गया है।
  • राजनीतिक दलों को अपनी गतिविधियों की जानकारी पुलिस को देनी होगी।
  • संविधान और लोकतंत्र की सुरक्षा प्राथमिकता है।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए सामान्य चुनावों का कार्यक्रम जारी किया है। इस घोषणा के साथ इन चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है।

आयोग ने मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आचार संहिता का सख्ती से पालन किया जाए। यह संहिता केंद्र सरकार पर भी लागू होगी, विशेष रूप से इन राज्यों से जुड़े घोषणाओं या नीतिगत निर्णयों के मामले में।

आयोग ने यह स्पष्ट किया है कि सरकारी, सार्वजनिक या निजी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का विरूपण (जैसे पोस्टर, बैनर आदि) तुरंत हटाया जाना चाहिए। राजनीतिक दल, उम्मीदवार या कोई भी व्यक्ति सरकारी वाहनों, सरकारी आवासों या अन्य सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार के लिए दुरुपयोग नहीं कर सकता। सरकारी खर्च पर विज्ञापन जारी करने पर भी पूरी तरह रोक है। नागरिकों की निजता का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।

किसी की सहमति के बिना निजी घरों, दीवारों या जमीन पर झंडे, पोस्टर या बैनर नहीं लगाए जा सकते। निजी आवासों के बाहर कोई प्रदर्शन या धरना भी नहीं किया जाएगा।

शिकायतों के लिए एक मजबूत व्यवस्था की गई है। नागरिक या राजनीतिक दल 1950 नंबर पर कॉल करके या 'सी-विजिल' ऐप के माध्यम से आचार संहिता उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं। इन राज्यों में 5,173 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड और 5,200 से अधिक स्थिर निगरानी दल (एसएसटी) तैनात किए गए हैं, ताकि शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर सुनिश्चित किया जा सके।

राजनीतिक दलों को अपनी रैलियों, बैठकों या जुलूसों की जानकारी पहले से पुलिस को देनी होगी ताकि यातायात, सुरक्षा और निषेधाज्ञाओं का पालन किया जा सके। लाउडस्पीकर या अन्य सुविधाओं के लिए आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है। मंत्री सरकारी कामों के साथ चुनाव प्रचार नहीं कर सकते और न ही सरकारी मशीनरी, गाड़ी या कर्मचारियों का इस्तेमाल प्रचार के लिए कर सकते हैं।

आयोग ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एमसीसी लागू करने में पूरी निष्पक्षता बरतें। सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाए। सरकारी सुविधाओं के गलत इस्तेमाल को रोका जाए। सभाओं, जुलूसों और मतदान की व्यवस्था निष्पक्ष तरीके से की जाए। कानून-व्यवस्था बनाए रखी जाए और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

इसके अतिरिक्त, राजनीतिक दलों के लिए ‘सुविधा’ मॉड्यूल शुरू किया गया है। इसमें वे मैदानों, हेलीपैड जैसी सार्वजनिक जगहों के प्रयोग के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवंटन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा।

Point of View

ताकि सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिल सके और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
NationPress
19/03/2026

Frequently Asked Questions

आदर्श आचार संहिता क्या है?
आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए दिशा-निर्देशों का सेट है, जिसका उद्देश्य निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करना है।
चुनाव प्रचार के लिए सरकारी संसाधनों का उपयोग क्यों प्रतिबंधित किया गया है?
सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार के लिए उपयोग रोकने का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना है।
शिकायत कैसे दर्ज करें?
नागरिक या राजनीतिक दल 1950 नंबर पर कॉल करके या 'सी-विजिल' ऐप के माध्यम से आचार संहिता उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकते हैं।
क्या राजनीतिक दलों को अपनी रैलियों की जानकारी पुलिस को देनी आवश्यक है?
जी हां, राजनीतिक दलों को अपनी रैलियों, बैठकों या जुलूसों की जानकारी पहले से पुलिस को देनी होगी।
आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत का निपटारा कितनी जल्दी किया जाता है?
आयोग ने सुनिश्चित किया है कि शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर किया जाएगा।
Nation Press