2 सितंबर 2026
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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ के नाम की घोषणा संभव, अयोध्या के संतों ने कहा — उचित फैसला मंजूर

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राम मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ के नाम की घोषणा संभव, अयोध्या के संतों ने कहा — उचित फैसला मंजूर

सारांश

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 2 सितंबर को अयोध्या में हुई बैठक में पहले सीईओ के नाम की घोषणा की संभावना थी। अयोध्या के साधु-संतों ने एकमत से कहा — उचित और धर्मसम्मत फैसले को संत समाज पूरी तरह स्वीकार करेगा।

मुख्य बातें

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 2 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे मणिराम दास छावनी, अयोध्या में हुई।
बैठक में ट्रस्ट के पहले सीईओ की नियुक्ति को अंतिम रूप दिए जाने और ट्रस्टी-स्तर के अन्य पदों पर चर्चा की संभावना थी।
बैठक की अध्यक्षता महंत नृत्य गोपाल दास ने की; सभी ट्रस्टी उपस्थित रहे।
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं पर विवाद को 'राई का पहाड़' बनाया गया और सीईओ नियुक्ति सकारात्मक कदम है।
महंत सीताराम दास ने स्पष्ट किया कि धर्मग्रंथों के जानकार योग्य व्यक्ति की नियुक्ति पर संत समाज की सहमति होगी, अन्यथा नहीं।
पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने नए सीईओ से बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालु-सुविधाओं में सुधार की उम्मीद जताई।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 2 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे मणिराम दास छावनी, अयोध्या में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना जताई जा रही थी। बैठक की अध्यक्षता महंत नृत्य गोपाल दास ने की और सभी ट्रस्टी इसमें शामिल हुए। अयोध्या के प्रमुख साधु-संतों ने बैठक से पहले अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं और कहा कि उचित तथा धर्मसम्मत फैसले को संत समाज पूरी तरह स्वीकार करेगा।

बैठक का उद्देश्य और स्वरूप

ट्रस्ट के सदस्य दिनेश दास ने बताया, 'आज दोपहर 2 बजे छोटी छावनी में महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में दूसरी बैठक होगी। सभी ट्रस्टी इसमें शामिल होंगे। ट्रस्ट जो भी फैसला लेगा, उसे सभी मानेंगे। बैठक दोपहर 2 बजे शुरू होगी और कई चरणों में चलेगी। भगवान राम के आशीर्वाद से जो भी फैसला लिया जाएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा।' मणिराम दास छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने कहा कि बैठक सम्मानित अध्यक्ष की अध्यक्षता में होगी और बैठक से जो भी नतीजा निकलेगा, वह बाद में सामने आएगा।

संतों की प्रतिक्रिया और अपेक्षाएँ

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा, 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पवित्र जन्मभूमि अयोध्या धाम में हाल ही में कुछ धर्म-विरोधी तत्वों ने राम मंदिर में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राई का पहाड़ बनाने की कोशिश की, ताकि देश और दुनिया भर में सनातन धर्म को बदनाम किया जा सके। ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए हर तरह के सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। हो सकता है कि आज की बैठक में सीईओ के नाम की घोषणा हो जाए।' उन्होंने कहा कि वे और अन्य अयोध्यावासी इस घोषणा को लेकर उत्साहित हैं।

साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने स्पष्ट किया कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में होगी और संत समाज उचित फैसले को स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा, 'अगर आप प्रधान सेवक के तौर पर किसी योग्य व्यक्ति को नियुक्त करते हैं, जिसने हमारे धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन किया हो और उनमें विशेषज्ञ हो, तो संत समाज उसे स्वीकार कर लेगा।' हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी प्रतिकूल निर्णय की स्थिति में संत समाज उसे मानने से इनकार कर सकता है।

ट्रस्ट की स्वायत्तता पर संतों की राय

संत अनिरुद्ध दास ने ट्रस्ट की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह राम मंदिर ट्रस्ट का अपना अंदरूनी सिस्टम है कि उन्होंने क्या व्यवस्था बनाई, कैसे एक धार्मिक परिषद का गठन किया और अब कैसे सीईओ का पद बनाया जाएगा। वे बिना किसी की सलाह लिए अपनी मर्जी से काम करते हैं।' वहीं हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेश आचार्य ने कहा कि यह बैठक एक नियमित मासिक समीक्षा है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए होती है कि मंदिर में दर्शनार्थियों को कोई असुविधा न हो। उन्होंने इस बैठक को लेकर बड़ा मुद्दा बनाए जाने को 'पूरी तरह से अनावश्यक' बताया।

बाबरी मामले के पूर्व पक्षकार की प्रतिक्रिया

बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा, 'अयोध्या एक पवित्र धार्मिक शहर है, जहाँ भगवान राम का मंदिर है। यहाँ उचित इंतजाम होने चाहिए और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएँ दी जानी चाहिए। एक नए सीईओ की नियुक्ति होने वाली है, जिससे बेहतर काम और सुधार होने चाहिए।' गौरतलब है कि राम मंदिर के प्रति देशभर में लाखों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है और ट्रस्ट के प्रशासनिक ढाँचे में किसी भी बदलाव पर व्यापक जनदृष्टि बनी रहती है।

आगे क्या होगा

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कुछ हलकों में सवाल उठाए गए थे। सीईओ की नियुक्ति से ट्रस्ट के प्रशासनिक तंत्र को और सुदृढ़ करने की उम्मीद जताई जा रही है। बैठक के नतीजे सार्वजनिक होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि पहले सीईओ के रूप में किसे चुना गया और ट्रस्टी-स्तर के अन्य पदों पर क्या निर्णय लिए गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान में यह ढाँचा इतने समय बाद क्यों बनाया जा रहा है। कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद यह कदम उठाया जाना संयोग नहीं लगता — यह जवाबदेही के दबाव की प्रतिक्रिया भी हो सकती है। संत समाज की 'उचित फैसले' की शर्त यह दर्शाती है कि ट्रस्ट और संत समुदाय के बीच पूर्ण सहमति अभी भी सुनिश्चित नहीं है। सीईओ की नियुक्ति तभी सार्थक होगी जब उनके अधिकार, जवाबदेही और पारदर्शिता का ढाँचा स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ की नियुक्ति क्यों हो रही है?
ट्रस्ट के प्रशासनिक तंत्र को सुदृढ़ करने और मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए पहले सीईओ की नियुक्ति की जा रही है। कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे विवादों के बाद यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
2 सितंबर की बैठक में क्या-क्या निर्णय लिए जाने थे?
बैठक में ट्रस्ट के पहले सीईओ के नाम की घोषणा और ट्रस्टी-स्तर के अन्य पदों पर चर्चा होनी थी। बैठक की अध्यक्षता महंत नृत्य गोपाल दास ने की और सभी ट्रस्टी उपस्थित रहे।
अयोध्या के संतों ने सीईओ नियुक्ति पर क्या शर्त रखी?
महंत सीताराम दास ने स्पष्ट किया कि यदि किसी ऐसे योग्य व्यक्ति को नियुक्त किया जाता है जिसने धर्मग्रंथों का गहन अध्ययन किया हो, तो संत समाज उसे स्वीकार करेगा। प्रतिकूल या अनुचित फैसले की स्थिति में संत समाज का विरोध संभव है।
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कथित वित्तीय अनियमितताओं के विवाद पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि कुछ धर्म-विरोधी तत्वों ने कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर 'राई का पहाड़' बनाने की कोशिश की ताकि सनातन धर्म को बदनाम किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
इकबाल अंसारी ने राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक पर क्या कहा?
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या एक पवित्र धार्मिक शहर है और नए सीईओ की नियुक्ति से बेहतर प्रबंधन और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ मिलनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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