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राम मंदिर पर अखिलेश के आरोपों से संत समाज नाराज़, महंत बोले— बिना सबूत के इल्ज़ाम अस्वीकार्य

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राम मंदिर पर अखिलेश के आरोपों से संत समाज नाराज़, महंत बोले— बिना सबूत के इल्ज़ाम अस्वीकार्य

सारांश

अखिलेश यादव के राम मंदिर चढ़ावे पर गबन के आरोपों के बाद नासिक में संत समाज मैदान में उतरा। महंत रामकिशोर दास शास्त्री और भक्त चरणदास महाराज ने बिना प्रमाण के लगाए गए इल्ज़ामों को राजनीति से प्रेरित बताया और पारदर्शी जाँच की माँग की।

मुख्य बातें

महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने 8 जून को नासिक में कहा कि बिना प्रमाण के किसी भी धार्मिक मंदिर पर आरोप लगाना अनुचित है।
भक्त चरणदास महाराज ने राम मंदिर ट्रस्ट पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें राजनीतिक प्रेरणा से जोड़ा।
दोनों संतों ने माँग की कि यदि जाँच हो, तो वह निष्पक्ष और पारदर्शी हो; दोषी पाए जाने पर कठोर दंड मिले।
काशी विश्वनाथ क्षेत्र के प्रतिबंध मॉडल को नासिक और त्र्यंबकेश्वर में लागू करने की माँग उठी।
आगामी कुंभ को देखते हुए नासिक-त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में विशेष प्राधिकरण और सख्त नियम बनाने का आग्रह किया गया।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये के गबन के आरोप लगाए जाने के बाद संत समाज ने कड़ी आपत्ति जताई है। नासिक में 8 जून को महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी राष्ट्रीय या प्रमुख धार्मिक मंदिर पर बिना ठोस प्रमाण के आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला भी है।

महंत रामकिशोर दास शास्त्री का स्पष्ट रुख

महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने कहा कि हाल के दिनों में मीडिया में प्रसारित कुछ खबरों की सत्यता पर उन्हें गहरा संदेह है। उनके अनुसार, यदि किसी मठ, मंदिर या धार्मिक ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन में वास्तव में कोई अनियमितता है, तो उसकी निष्पक्ष और प्रमाण-आधारित जाँच होनी चाहिए। लेकिन यदि केवल अफवाहों के आधार पर किसी धार्मिक संस्था को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है, तो यह भी उतनी ही गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म समस्त भारतीयों की साझा विरासत है और इस सांस्कृतिक परंपरा को कमज़ोर करने के लिए यदि कोई भ्रम फैलाया जाता है, तो उसकी जाँच और उचित कार्रवाई दोनों अनिवार्य हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भ्रष्टाचार सिद्ध होता है तो दोषियों को कानून के अनुसार कठोर दंड मिलना चाहिए।

राम मंदिर और पारदर्शिता की माँग

महंत ने अयोध्या राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अब विश्व स्तर पर एक महत्त्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन चुका है और करोड़ों श्रद्धालु वहाँ आस्था के साथ पहुँचते हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसे पवित्र स्थलों की व्यवस्था पर कोई सवाल उठता है, तो उसकी जाँच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए ताकि जनता का विश्वास अक्षुण्ण रहे। जानबूझकर अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए, यह उनका स्पष्ट मत रहा।

भक्त चरणदास महाराज ने आरोपों को नकारा

भक्त चरणदास महाराज ने भी राम मंदिर ट्रस्ट पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने कहा कि ये दावे बिना किसी प्रमाण के हैं और इन्हें राजनीतिक या सामाजिक बदनामी की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार मंदिर की व्यवस्थाओं में किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की टिप्पणियाँ राम मंदिर और धार्मिक आस्थाओं को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा करती हैं। उनका सुझाव था कि बिना सत्यापित प्रमाण के ऐसे संवेदनशील आरोपों से बचा जाना चाहिए।

काशी मॉडल और नासिक-त्र्यंबकेश्वर में लागू करने की माँग

महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने काशी विश्वनाथ क्षेत्र में नगर प्रशासन द्वारा मांस, मछली और अन्य आपत्तिजनक वस्तुओं पर लगाए गए प्रतिबंध की सराहना की। उन्होंने माँग की कि इसी तरह के कदम नासिक और त्र्यंबकेश्वर जैसे पवित्र क्षेत्रों में भी लागू किए जाएँ, विशेषकर आगामी कुंभ को देखते हुए।

भक्त चरणदास महाराज ने उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सरकार की नीतियों से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इसी मॉडल को नासिक-त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में भी लागू किया जाना चाहिए, जहाँ आगामी कुंभ के मद्देनज़र एक विशेष प्राधिकरण और सख्त नियम बनाए जा सकते हैं।

आगे क्या

संत समाज की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब राम मंदिर को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो रही है। धार्मिक नेताओं की माँग है कि यदि कोई भी जाँच हो, वह स्वतंत्र और पारदर्शी हो — और राजनीतिक प्रेरणा से मुक्त। नासिक और त्र्यंबकेश्वर में कुंभ की तैयारियों के बीच यह विवाद स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के लिए भी एक नीतिगत संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो स्वतंत्र ऑडिट का स्वागत होना चाहिए, न कि आरोप लगाने वाले पर ही निशाना साधा जाना चाहिए। राम मंदिर ट्रस्ट का वित्तीय प्रबंधन अब तक सार्वजनिक जाँच के दायरे में नहीं आया है — यही वह रिक्तता है जो राजनीतिक आरोपों को पनपने की जगह देती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अखिलेश यादव ने राम मंदिर को लेकर क्या आरोप लगाए?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे में गड़बड़ी हुई है। यह आरोप उन्होंने बिना विस्तृत प्रमाण प्रस्तुत किए लगाए, जिस पर संत समाज ने तीखी आपत्ति जताई।
संत समाज ने इन आरोपों पर क्या कहा?
महंत रामकिशोर दास शास्त्री और भक्त चरणदास महाराज दोनों ने आरोपों को बिना प्रमाण के बताते हुए खारिज किया। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में कोई अनियमितता है तो निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए, लेकिन अफवाहों के आधार पर धार्मिक संस्थाओं को बदनाम करना अस्वीकार्य है।
क्या राम मंदिर ट्रस्ट के वित्त की जाँच की माँग की गई है?
संत समाज ने पारदर्शी जाँच की माँग की है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि यह जाँच प्रमाण-आधारित और निष्पक्ष होनी चाहिए। मंदिर ट्रस्ट की ओर से किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है।
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में संतों ने क्या माँग रखी?
संतों ने काशी विश्वनाथ क्षेत्र की तरह नासिक और त्र्यंबकेश्वर में भी मांस, मछली और आपत्तिजनक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की माँग की। आगामी कुंभ को देखते हुए एक विशेष प्राधिकरण और सख्त नियम बनाने का आग्रह भी किया गया।
इस विवाद का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो रही है। भक्त चरणदास महाराज के अनुसार, अखिलेश यादव की टिप्पणियाँ राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक संवेदनाओं को भड़काने का प्रयास हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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