4 जुलाई 2026
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चंपत राय के समर्थन में अयोध्या का संत समाज, ट्रस्ट से अपील — 'इस्तीफा मंजूर न करें'

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चंपत राय के समर्थन में अयोध्या का संत समाज, ट्रस्ट से अपील — 'इस्तीफा मंजूर न करें'

सारांश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में अयोध्या का संत समाज चंपत राय के पक्ष में उतरा है — लेकिन धार्मिक जगत एकमत नहीं है। एक तरफ संत उन्हें निर्दोष बता रहे हैं, दूसरी तरफ रामदल ट्रस्ट पूरे ट्रस्ट को भंग करने की माँग कर रहा है। जाँच रिपोर्ट ही तय करेगी कि आगे क्या होगा।

मुख्य बातें

अयोध्या के संत समाज ने 4 जुलाई को चंपत राय को बेदाग बताते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से इस्तीफा न स्वीकारने की अपील की।
महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि चंपत राय ने खुद एसआईटी गठन की माँग की थी और उनकी भूमिका किसी गड़बड़ी में नहीं है।
रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर नए सिरे से गठन की माँग की।
महंत रामदास (बिसरख रावण मंदिर, ग्रेटर नोएडा) ने निष्पक्ष जाँच और दोषियों की संपत्ति राम मंदिर को दान करने की माँग की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जाँच का दायरा बढ़ाने का संकेत दिया है; ट्रस्ट ने अभी इस्तीफे पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया।

अयोध्या के संत समाज ने 4 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय के समर्थन में एकजुट होकर कहा कि उनकी ईमानदारी पर कोई आँच नहीं आई है और ट्रस्ट को उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं करना चाहिए। राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच संत समाज का यह सामूहिक बयान राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

संत समाज का सामूहिक रुख

साकेत भवन के प्रमुख महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा, 'हमारे सम्मानित चंपत राय जी पूरी तरह बेदाग और निष्कलंक हैं। इन कामों में से किसी में भी उनकी कोई भूमिका नहीं है। चंपत राय ने खुद एसआईटी गठन की माँग की थी। अगर इनकी भक्ति और निष्ठा पर कोई सवाल खड़ा करेगा तो संत समाज मुखर हो जाएगा। संत समाज चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार नहीं करता।'

महंत सीताराम दास ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा और कहा कि जो लोग श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे हैं, वे आज एकजुट होकर षड्यंत्र कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत समाज सनातन धर्म पर किसी भी प्रकार का आघात सहन नहीं करेगा।

जाँच और इस्तीफे की प्रक्रिया पर संतों का नजरिया

आर्य संत वरुण दास महाराज ने कहा कि चंपत राय के समर्पण और कर्तव्य-बोध को देखते हुए संतों ने सामूहिक प्रस्ताव के जरिए अपना समर्थन जताया है। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री ने जाँच के लिए एक कमेटी बनाई थी, जिसकी माँग खुद ट्रस्ट ने की थी। जाँच चल रही है, रिपोर्ट आने के बाद सच बिल्कुल साफ हो जाएगा।'

वरुण दास महाराज ने यह भी कहा कि इस्तीफा इतनी जल्दी नहीं होता — परंपरागत रूप से एक माह पहले आशय जताया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर की प्रतिष्ठा को बदनाम करने की साजिश हो रही है, जिसे हिंदू जनमानस सफल नहीं होने देगा।

असहमत आवाज़ें: ट्रस्ट भंग करने की माँग

हालाँकि, रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने इस मामले में अलग राय रखी। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद जिस ट्रस्ट का गठन हुआ और जिसने दिव्य मंदिर बनाया, वही ट्रस्ट अब विवाद के केंद्र में है। उनके अनुसार वर्तमान ट्रस्ट मंदिर संचालन के लिए सक्षम नहीं है और इसे भंग कर नए सिरे से गठित किया जाना चाहिए — जिसमें मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को शामिल किया जाए।

कल्कि राम ने संत समाज की 'क्लीन चिट' देने की अपील पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'जाँच अभी चल रही है। संत समाज कौन होता है किसी को निर्दोष बताने वाला? हम किसी को क्लीन चिट देने का अधिकार नहीं रखते।'

निष्पक्ष जाँच और कड़ी सजा की माँग

ग्रेटर नोएडा के बिसरख रावण मंदिर के महंत रामदास ने राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी की निष्पक्ष जाँच की माँग की। उन्होंने कहा कि संत समाज में भारी दुख है क्योंकि सभी ने श्रद्धापूर्वक चढ़ावा दिया था। उनके अनुसार पर्ची कटने के स्तर से ही अनियमितता शुरू हो रही है। महंत रामदास ने केंद्र सरकार से माँग की कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कड़ी सजा दी जाए और उनकी संपत्ति राम मंदिर को दान की जाए।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जाँच का दायरा बढ़ाने का संकेत दिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अभी तक चंपत राय के इस्तीफे पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है। जाँच रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट की भावी संरचना और नेतृत्व पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह जाँच की जगह नहीं ले सकता। गौरतलब है कि चंपत राय ने खुद एसआईटी की माँग की थी — यह या तो पारदर्शिता का संकेत है या दबाव से बचने की रणनीति, यह जाँच रिपोर्ट ही तय करेगी। रामदल ट्रस्ट की 'ट्रस्ट भंग करो' की माँग दर्शाती है कि धार्मिक जगत में भी असंतोष की गहरी लकीर है। असली सवाल यह है कि करोड़ों श्रद्धालुओं के चढ़ावे की जवाबदेही का तंत्र कितना मजबूत है — और क्या मौजूदा जाँच ढाँचा उस जवाबदेही को सुनिश्चित कर पाएगा।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा क्यों दिया?
चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच दिया है। विवाद में मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं, हालाँकि संत समाज उन्हें पूरी तरह निर्दोष बता रहा है।
अयोध्या के संत समाज ने चंपत राय के बारे में क्या कहा?
संत समाज ने चंपत राय को बेदाग और निष्कलंक बताते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से उनका इस्तीफा स्वीकार न करने की अपील की है। महंत सीताराम दास जी महाराज ने कहा कि चंपत राय ने खुद एसआईटी गठन की माँग की थी।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में जाँच की क्या स्थिति है?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जाँच के लिए एक कमेटी गठित की है और जाँच का दायरा बढ़ाने का संकेत दिया है। आर्य संत वरुण दास महाराज के अनुसार रिपोर्ट आने के बाद सच स्पष्ट हो जाएगा।
रामदल ट्रस्ट ने श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के बारे में क्या माँग की है?
रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित कल्कि राम ने वर्तमान ट्रस्ट को भंग कर नए सिरे से गठन की माँग की है। उनका कहना है कि नए ट्रस्ट में मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को शामिल किया जाए और जाँच पूरी होने तक किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी जानी चाहिए।
महंत रामदास ने राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर क्या कहा?
ग्रेटर नोएडा के बिसरख रावण मंदिर के महंत रामदास ने निष्पक्ष जाँच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि दोषी पाए जाने वालों की संपत्ति राम मंदिर को दान की जाए।
राष्ट्र प्रेस
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