स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर पुलिस के 52 जवान सम्मानित, 38 को वीरता पदक
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस के 52 जवानों को 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर वीरता और सराहनीय सेवा पदकों से नवाज़ा गया है। 14 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन पुरस्कारों में 38 वीरता पदक और 13 सराहनीय सेवा पदक शामिल हैं, जबकि जम्मू-कश्मीर होम गार्ड और नागरिक सुरक्षा के एक जवान को भी सराहनीय सेवा पदक के लिए चुना गया है।
किन्हें मिले पुरस्कार
वीरता पदक पाने वालों में डीआईजी शिव कुमार, एसएसपी शोभित डी. सक्सेना, एसपी मुश्ताक अहमद और डिप्टी एसपी सरफराज बशीर प्रमुख हैं। इसके अलावा, एसएसपी शौकत हुसैन शाह को विशिष्ट सेवा के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है — जो बल का सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है।
ये पुरस्कार पुलिसिंग और अन्य वर्दीधारी सेवाओं में बहादुरी, विशिष्ट योगदान और सराहनीय सेवा को मान्यता देने के लिए प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर प्रदान किए जाते हैं।
पिछले वर्ष का रिकॉर्ड
गौरतलब है कि पिछले स्वतंत्रता दिवस पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने देश में सर्वाधिक पदक अर्जित किए थे। उस वर्ष कुल 152 क्षेत्रीय पुरस्कारों में से 127 वीरता पदक जम्मू-कश्मीर पुलिस के खाते में गए थे — एक ऐसा आँकड़ा जो देश के किसी भी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस बल से कहीं अधिक था।
आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष का इतिहास
जम्मू-कश्मीर पुलिस केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद-रोधी अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाती रही है। 1990 के दशक की शुरुआत में बल पर आतंकवाद से मुकाबले में हिचकिचाहट के आरोप लगे थे, किंतु बाद के दशकों में इसने न केवल आतंकियों के खिलाफ मोर्चा संभाला, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने में भी नेतृत्व किया।
1989 से अब तक जम्मू-कश्मीर पुलिस के 1,600 से अधिक जवान आतंकवाद से लोहा लेते हुए और क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखते हुए शहीद हो चुके हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान
केंद्र शासित प्रदेश की यह पुलिस आज देश के सबसे अनुशासित और साहसी बलों में गिनी जाती है। अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह एक रोल मॉडल बन चुकी है। इस वर्ष के पुरस्कार उन जवानों के अदम्य साहस की स्वीकृति हैं जो विषम परिस्थितियों में भी कर्तव्य से विमुख नहीं हुए।
आने वाले समय में बल की यह प्रतिबद्धता जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक भूमिका निभाती रहेगी।