बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर लॉन्च: कर्नाटक को रेलवे विकास के लिए सालाना ₹7,000–8,000 करोड़ — प्रह्लाद जोशी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 1 नवंबर 2026 को कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर सेवा के उद्घाटन समारोह में कहा कि पिछले पाँच वर्षों में कर्नाटक को रेलवे विकास के लिए प्रतिवर्ष ₹7,000 करोड़ से ₹8,000 करोड़ का आवंटन मिल रहा है। उन्होंने इसकी तुलना वर्ष 2008 के मात्र ₹700 करोड़ के आवंटन से की और इसे मोदी सरकार के रेलवे कायाकल्प का प्रमाण बताया।
मुख्य घोषणाएँ और आँकड़े
जोशी ने बताया कि 2014-15 में कर्नाटक को रेलवे बजट में लगभग ₹1,000 करोड़ का आवंटन था, जो वर्तमान एनडीए सरकार के कार्यकाल में कई गुना बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि कन्नड़ राज्योत्सव के अवसर पर उत्तरी कर्नाटक के लिए तीन बड़ी रेलवे कनेक्टिविटी परियोजनाओं की घोषणा की गई है, हालाँकि इन परियोजनाओं का नाम या विस्तृत विवरण समारोह में साझा नहीं किया गया।
उन्होंने रेल सुरक्षा के संदर्भ में कहा कि 'कवच' प्रणाली सहित विभिन्न सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन के बाद देश में रेल दुर्घटनाओं की संख्या 134 से घटकर 16 रह गई है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 'जीरो एक्सीडेंट' और 'जीरो एरर' का लक्ष्य निर्धारित किया है।
वंदे भारत स्लीपर: तकनीक और गति
जोशी ने नई बेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर सेवा की तकनीकी विशेषताओं की प्रशंसा करते हुए बताया कि यह ट्रेन 180 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इसके डिज़ाइन की सटीकता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि तीव्र गति के बावजूद पानी से भरा गिलास बिना हिले स्थिर रहता है। देशभर में अब 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें परिचालन में हैं।
उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का परिचय देते हुए बताया कि वे IIT से पढ़े हैं, बाद में IAS में शामिल हुए और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कॉरपोरेट क्षेत्र में भी वरिष्ठ पदों पर काम किया था।
कुमारस्वामी का बयान और भविष्य की योजनाएँ
भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि कैबिनेट की प्रत्येक बैठक में रेलवे परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा होती है और रेल मंत्रालय प्रधानमंत्री के विज़न को साकार करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। उन्होंने बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत सेवा और बेंगलुरु-पुणे हाई-स्पीड रेल परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन पर विश्वास जताया।
कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल, बिहार और असम के लाखों लोग बेंगलुरु में बस गए हैं, और बेहतर रेल सेवाओं का सीधा लाभ इन्हें भी मिलेगा।
राजनीतिक संदर्भ
जोशी ने अपने संबोधन में कहा, 'पहले हर जगह बम और गोलियाँ चलती थीं। अब, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बुलेट ट्रेन ला रहे हैं। माओवादियों को उनके घर वापस भेज दिया गया है और आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया है।' यह बयान एक राजनीतिक तुलना के रूप में आया, हालाँकि विपक्ष ऐसे दावों को सरलीकृत मानता है। गौरतलब है कि यह समारोह ऐसे समय में हुआ जब केंद्र और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के बीच बजट आवंटन और परियोजनाओं के श्रेय को लेकर राजनीतिक तनाव बना हुआ है।
आने वाले महीनों में उत्तरी कर्नाटक की तीन नई रेलवे परियोजनाओं का विस्तृत खाका सामने आने की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र की दीर्घकालीन कनेक्टिविटी समस्या का समाधान होने की संभावना है।