सुलूर बालिका हत्याकांड: पॉक्सो कोर्ट में चार्जशीट दाखिल, 104 गवाह और 215 दस्तावेज शामिल
सारांश
मुख्य बातें
कोयंबटूर जिला पुलिस ने बुधवार, 10 जून को पॉक्सो विशेष अदालत में सुलूर के निकट पल्लापलयम की 10 वर्षीय बालिका के अपहरण, यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में 819 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इस दस्तावेज में अभियोजन पक्ष के 104 गवाह और 215 साक्ष्य दस्तावेज शामिल हैं, जो अदालती सुनवाई की राह खोलते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 22 मई को उस समय सामने आया जब पल्लापलयम की 10 वर्षीय बच्ची का शव कन्नमपलयम टैंक के पास एक निजी संपत्ति में बरामद हुआ। इस घटना ने कोयंबटूर जिले में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया और पुलिस ने तत्काल गहन जाँच शुरू की। पुलिस ने अगले ही दिन 23 मई को पल्लापलयम निवासी के. कार्थी (35 वर्ष) और आर. मोहन (31 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
आरोपियों पर लगाए गए आरोप
के. कार्थी पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुख्य आरोप लगाए गए हैं। आर. मोहन पर अपराध में कथित संलिप्तता के लिए बीएनएस और पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप हैं। गौरतलब है कि गिरफ्तारी के मात्र 18 दिनों के भीतर जाँच पूरी कर चार्जशीट दाखिल की गई — जो इस प्रकार के जघन्य अपराधों में असामान्य रूप से तीव्र कार्यवाही मानी जाती है।
जाँच की प्रक्रिया और साक्ष्य
चार्जशीट डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) करिकल परि शंकर की अगुवाई वाली जाँच टीम ने मंगलवार को ई-फाइल की। जाँच में फोरेंसिक परीक्षण, साइबर फोरेंसिक विश्लेषण, पहले आरोपी का डीएनए प्रोफाइलिंग और पोटेंसी टेस्ट शामिल थे। मामले से जुड़ी गतिविधियों और संचार रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए साइबर फोरेंसिक जाँच भी की गई।
चार्जशीट में वैज्ञानिक साक्ष्य, गवाहों के बयान, दस्तावेजी अभिलेख, पोस्टमार्टम के निष्कर्ष और फोरेंसिक रिपोर्ट सम्मिलित हैं। जाँच के दौरान दो चश्मदीद गवाह भी सामने आए और उन्होंने पुलिस की सहायता की।
पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया
पुलिस महानिरीक्षक (पश्चिम क्षेत्र) आर.वी. राम्या भारती ने बताया कि विभिन्न पुलिस इकाइयों के बीच समन्वय और फोरेंसिक रिपोर्ट समय पर प्राप्त होने के कारण जाँच तीव्र गति से आगे बढ़ सकी। यह ऐसे समय में आया है जब बाल यौन अपराध मामलों में त्वरित न्याय की माँग पूरे देश में उठ रही है।
आगे की कार्यवाही
चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही इस मामले का जाँच चरण औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। अब यह मामला पॉक्सो विशेष अदालत में सुनवाई के चरण में प्रवेश करेगा, जो कानून के प्रावधानों के अनुसार आगे की न्यायिक प्रक्रिया संचालित करेगी। पीड़ित परिवार और स्थानीय समुदाय को उम्मीद है कि अदालत इस मामले में शीघ्र और कठोर न्याय सुनिश्चित करेगी।