कोयंबटूर बच्ची हत्याकांड: दोनों आरोपी गुंडा एक्ट के तहत हिरासत में, 5 जून तक न्यायिक कस्टडी
सारांश
मुख्य बातें
कोयंबटूर जिले के सुलूर के निकट 10 वर्षीय बच्ची के यौन उत्पीड़न और हत्या के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को तमिलनाडु खतरनाक गतिविधियाँ निवारण अधिनियम — जिसे आमतौर पर गुंडा अधिनियम कहा जाता है — के तहत औपचारिक रूप से हिरासत में लिया गया है। बुधवार, 27 मई को पुलिस ने यह जानकारी दी। एक स्थानीय अदालत ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत 5 जून तक बढ़ा दी है।
आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी
आरोपियों की पहचान नागपट्टिनम जिले के निवासी के. कार्थी (35 वर्ष) और तंजावुर जिले के निवासी आर. मोहन (31 वर्ष) के रूप में हुई है। इससे पहले सुलूर पुलिस ने दोनों को बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (POCSO) और अन्य संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था।
गुंडा अधिनियम लागू करने की प्रक्रिया
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोयंबटूर के पुलिस अधीक्षक अल्लातिपल्ली पवन कुमार रेड्डी की सिफारिश के आधार पर गुंडा अधिनियम लागू करने का निर्णय लिया गया। इस सिफारिश पर कोयंबटूर जिला कलेक्टर पवनकुमार जी. गिरियप्पनवर ने दोनों आरोपियों को 'यौन अपराधी' की श्रेणी में रखते हुए हिरासत का आदेश जारी किया।
गौरतलब है कि यह कानून आदतन अपराधियों या सार्वजनिक शांति और सामाजिक व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों की निवारक हिरासत की अनुमति देता है। इस प्रावधान के तहत आरोपियों को तत्काल जमानत मिलना अत्यंत कठिन हो जाता है।
पुलिस की मंशा और चेतावनी
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई आरोपियों को तत्काल जमानत से रोकने और महिलाओं व बच्चों से जुड़े अपराधों के विरुद्ध कड़ा संदेश देने के उद्देश्य से की गई है। कोयंबटूर जिला पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि सार्वजनिक शांति, सार्वजनिक स्वास्थ्य और महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा को प्रभावित करने वाले गंभीर अपराधों में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध गुंडा अधिनियम सहित कड़े निवारक निरोध कानूनों का प्रयोग किया जाएगा।
सामाजिक आक्रोश और जाँच की स्थिति
इस जघन्य घटना ने कोयंबटूर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया था। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने दोषियों के लिए कठोरतम सजा की माँग की थी। यह ऐसे समय में आया है जब बाल सुरक्षा को लेकर पूरे देश में कानून-व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जाँचकर्ता फिलहाल मामले में फोरेंसिक और डिजिटल साक्ष्य जुटाने का काम जारी रखे हुए हैं। आगामी सुनवाई 5 जून को होगी, जब न्यायालय हिरासत की अगली दिशा तय करेगा।