775 फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2025 में 66,500 दुष्कर्म-पॉक्सो मामले निपटाए, 2.45 लाख अभी भी लंबित
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में 24 जुलाई 2026 को दी गई जानकारी के अनुसार, देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSC) ने वर्ष 2025 में 66,500 मामलों का निपटारा किया। इनमें 398 विशेष ई-पॉक्सो अदालतें भी शामिल हैं, जो यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले देखती हैं। हालाँकि, कैलेंडर वर्ष के अंत तक 2.45 लाख मामले अभी भी इन अदालतों में विचाराधीन बने हुए हैं।
वर्षवार निपटारे का रिकॉर्ड
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह आँकड़े सदन के सामने रखे। उन्होंने बताया कि 2024 में FTSC ने 85,595 मामलों का निपटारा किया था, जबकि 2023 में यह संख्या 76,319 थी। इस प्रकार 2025 में निपटारे की संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में कम रही, जो लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के साथ मिलकर न्यायिक क्षमता पर सवाल उठाती है।
लंबित मामलों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। 31 दिसंबर 2024 तक 2.04 लाख और 31 दिसंबर 2023 तक 2.02 लाख मामले लंबित थे। 2025 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 2.45 लाख हो गई — यानी तीन वर्षों में लंबित मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
FTSC योजना की पृष्ठभूमि और विस्तार
मेघवाल ने बताया कि दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए केंद्रीय प्रायोजित योजना के अंतर्गत FTSC की स्थापना अक्टूबर 2019 में शुरू की गई थी। इस योजना को अब तक दो बार विस्तार दिया जा चुका है। पहले इसे 31 मार्च 2026 तक वैध किया गया था, जिसके तहत 790 FTSC स्थापित करने का लक्ष्य था। बाद में इसे अस्थायी रूप से 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में यौन अपराधों के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और न्यायिक प्रणाली पर त्वरित न्याय सुनिश्चित करने का दबाव है।
वित्तीय प्रावधान और फंडिंग
मंत्री ने बताया कि FTSC योजना के तहत प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक अधिकारी और सात सहायक कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ दैनिक खर्चों के लिए फ्लेक्सी ग्रांट भी दी जाती है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से व्यय विवरण प्राप्त होने के बाद धनराशि उन्हें प्रतिपूर्ति के रूप में लौटाई जाती है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल ₹1,259.51 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है।
न्यायिक अवसंरचना में निवेश
मेघवाल ने जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना विकास की केंद्र प्रायोजित योजना की भी जानकारी दी, जो 1993-94 से चली आ रही है। इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में पाँच घटकों के लिए राज्यों को सहायता दी जाती है — न्यायालय भवन, आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के आवास, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष। 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल में इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹4,519.47 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
आगे की राह
FTSC योजना का 30 सितंबर 2026 तक का अस्थायी विस्तार यह संकेत देता है कि सरकार इसे दीर्घकालिक रूप देने पर विचार कर रही है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अदालतों की संख्या और क्षमता दोनों में और विस्तार की आवश्यकता होगी।