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775 फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2025 में 66,500 दुष्कर्म-पॉक्सो मामले निपटाए, 2.45 लाख अभी भी लंबित

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775 फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2025 में 66,500 दुष्कर्म-पॉक्सो मामले निपटाए, 2.45 लाख अभी भी लंबित

सारांश

देश की 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स ने 2025 में 66,500 दुष्कर्म और पॉक्सो मामले निपटाए, लेकिन 2.45 लाख मामले अभी भी लंबित हैं — जो तीन साल में सबसे अधिक है। सरकार ने योजना को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया और अब तक ₹1,259.51 करोड़ जारी किए।

मुख्य बातें

775 FTSC ने 2025 में 66,500 मामलों का निपटारा किया, जिनमें 398 ई-पॉक्सो अदालतें शामिल हैं।
वर्ष के अंत तक 2.45 लाख मामले लंबित — 2023 (2.02 लाख) और 2024 (2.04 लाख) से अधिक।
FTSC योजना को अस्थायी रूप से 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया; 790 अदालतों की स्थापना का लक्ष्य।
योजना शुरू होने के बाद से राज्यों को कुल ₹1,259.51 करोड़ जारी।
15वें वित्त आयोग के तहत न्यायिक अवसंरचना हेतु ₹4,519.47 करोड़ की सहायता प्रदान की गई।

लोकसभा में 24 जुलाई 2026 को दी गई जानकारी के अनुसार, देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित 775 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स (FTSC) ने वर्ष 2025 में 66,500 मामलों का निपटारा किया। इनमें 398 विशेष ई-पॉक्सो अदालतें भी शामिल हैं, जो यौन उत्पीड़न से जुड़े मामले देखती हैं। हालाँकि, कैलेंडर वर्ष के अंत तक 2.45 लाख मामले अभी भी इन अदालतों में विचाराधीन बने हुए हैं।

वर्षवार निपटारे का रिकॉर्ड

केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में यह आँकड़े सदन के सामने रखे। उन्होंने बताया कि 2024 में FTSC ने 85,595 मामलों का निपटारा किया था, जबकि 2023 में यह संख्या 76,319 थी। इस प्रकार 2025 में निपटारे की संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में कम रही, जो लंबित मामलों की बढ़ती संख्या के साथ मिलकर न्यायिक क्षमता पर सवाल उठाती है।

लंबित मामलों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। 31 दिसंबर 2024 तक 2.04 लाख और 31 दिसंबर 2023 तक 2.02 लाख मामले लंबित थे। 2025 के अंत तक यह संख्या बढ़कर 2.45 लाख हो गई — यानी तीन वर्षों में लंबित मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।

FTSC योजना की पृष्ठभूमि और विस्तार

मेघवाल ने बताया कि दुष्कर्म और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) के तहत लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए केंद्रीय प्रायोजित योजना के अंतर्गत FTSC की स्थापना अक्टूबर 2019 में शुरू की गई थी। इस योजना को अब तक दो बार विस्तार दिया जा चुका है। पहले इसे 31 मार्च 2026 तक वैध किया गया था, जिसके तहत 790 FTSC स्थापित करने का लक्ष्य था। बाद में इसे अस्थायी रूप से 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में यौन अपराधों के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है और न्यायिक प्रणाली पर त्वरित न्याय सुनिश्चित करने का दबाव है।

वित्तीय प्रावधान और फंडिंग

मंत्री ने बताया कि FTSC योजना के तहत प्रत्येक अदालत में एक न्यायिक अधिकारी और सात सहायक कर्मचारियों के वेतन के साथ-साथ दैनिक खर्चों के लिए फ्लेक्सी ग्रांट भी दी जाती है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से व्यय विवरण प्राप्त होने के बाद धनराशि उन्हें प्रतिपूर्ति के रूप में लौटाई जाती है। योजना की शुरुआत से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल ₹1,259.51 करोड़ की राशि जारी की जा चुकी है।

न्यायिक अवसंरचना में निवेश

मेघवाल ने जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के लिए अवसंरचना विकास की केंद्र प्रायोजित योजना की भी जानकारी दी, जो 1993-94 से चली आ रही है। इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में पाँच घटकों के लिए राज्यों को सहायता दी जाती है — न्यायालय भवन, आवासीय इकाइयाँ, वकीलों के आवास, शौचालय परिसर और डिजिटल कंप्यूटर कक्ष15वें वित्त आयोग के कार्यकाल में इस योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹4,519.47 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

आगे की राह

FTSC योजना का 30 सितंबर 2026 तक का अस्थायी विस्तार यह संकेत देता है कि सरकार इसे दीर्घकालिक रूप देने पर विचार कर रही है। लंबित मामलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि अदालतों की संख्या और क्षमता दोनों में और विस्तार की आवश्यकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 रही, जो 2024 के 85,595 और 2023 के 76,319 से कम है — यह गिरावट तब और चिंताजनक है जब लंबित मामले तीन वर्षों में लगातार बढ़कर 2.45 लाख पर पहुँच गए हैं। सवाल यह है कि अदालतों की संख्या बढ़ने के बावजूद निपटारे की दर घट क्यों रही है — क्या यह नए मामलों की बाढ़ है, या क्षमता की सीमा? योजना को बार-बार अस्थायी विस्तार देना दीर्घकालिक नीतिगत अनिश्चितता का संकेत है। बिना स्थायी ढाँचे और न्यायाधीशों की पर्याप्त नियुक्ति के, FTSC त्वरित न्याय के वादे को पूरा करने में संघर्ष करती रहेगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) क्या हैं और इनकी स्थापना कब हुई?
FTSC विशेष अदालतें हैं जो दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम 2012 के तहत मामलों के त्वरित निपटारे के लिए अक्टूबर 2019 में केंद्रीय प्रायोजित योजना के तहत स्थापित की गई थीं। वर्तमान में 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 775 ऐसी अदालतें कार्यरत हैं।
2025 में FTSC ने कितने मामलों का निपटारा किया और कितने लंबित हैं?
2025 में 775 FTSC ने 66,500 मामलों का निपटारा किया। इसके बावजूद कैलेंडर वर्ष के अंत तक 2.45 लाख मामले लंबित बने रहे, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक है।
FTSC योजना को कब तक बढ़ाया गया है?
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अनुसार, योजना को अस्थायी रूप से 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया है। इससे पहले इसे 31 मार्च 2026 तक वैध किया गया था।
FTSC योजना के लिए सरकार ने अब तक कितनी राशि जारी की है?
योजना की शुरुआत से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ₹1,259.51 करोड़ जारी किए जा चुके हैं। यह राशि राज्यों द्वारा व्यय विवरण देने के बाद प्रतिपूर्ति के रूप में दी जाती है।
पिछले वर्षों की तुलना में 2025 में निपटारे की स्थिति कैसी रही?
2023 में 76,319 और 2024 में 85,595 मामलों के निपटारे की तुलना में 2025 में केवल 66,500 मामले निपटाए गए — यानी निपटारे की संख्या में गिरावट आई है। साथ ही लंबित मामले भी 2.02 लाख (2023) से बढ़कर 2.45 लाख (2025) हो गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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