पवन कल्याण ने पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मुख्य सचिव को लिखा पत्र, जांच सुधार पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 15 जुलाई 2026 को राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई ठोस सुझाव दिए हैं। बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले इस कानून की जांच प्रक्रिया को मजबूत करने, पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समय पर न्याय दिलाने पर उन्होंने विशेष बल दिया है।
मुख्य सुझाव और सिफारिशें
पवन कल्याण ने अपने पत्र में जांच की समय-सीमा निर्धारित करने और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया तय समय में पूरी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षकों और रेंज आईजी से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने तथा देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने को कहा। उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में विलंब से पीड़ित बच्चों को लंबे समय तक मानसिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
जांच प्रक्रिया में सुधार की माँग
उपमुख्यमंत्री ने जांच अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण, बच्चों के प्रति संवेदनशील तरीके से बयान दर्ज करने और फोरेंसिक व डिजिटल साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने की सिफारिश की। इसके साथ ही उन्होंने मेडिकल जांच समय पर कराने, घटनास्थल का तत्काल दस्तावेज़ीकरण करने और सबूतों की सुरक्षा के लिए कड़ी प्रक्रिया अपनाने पर भी जोर दिया।
नेल्लोर दरगाह मामले का उल्लेख
पत्र में पवन कल्याण ने नेल्लोर जिले की रहमताबाद दरगाह से जुड़े एक मामले का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि दरगाह के सज्जादा नशीन पर पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई जारी है, फिर भी वह अपने धार्मिक पद से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। उन्होंने कहा, 'कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे संस्थानों में उच्च स्तर की पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखना जरूरी है।' उन्होंने पुलिस से आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन को मामले की जानकारी देने का अनुरोध किया, ताकि कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जा सकें।
पीड़ित परिवारों को धमकी पर चिंता
पवन कल्याण ने पॉक्सो मामलों में पीड़ितों और उनके परिवारों को धमकाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में 10 जुलाई को हुई एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर आरोपी द्वारा पीड़ित परिवार पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं।
पीड़ित सुरक्षा और जमानत प्रक्रिया पर सतर्कता
उपमुख्यमंत्री ने पीड़ित सुरक्षा योजना तैयार करने, जमानत प्रक्रिया में सतर्कता बरतने और धमकी या दबाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि हर बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और न्याय पाने का अधिकार है और बच्चों को यौन अपराधों से बचाना एक संवैधानिक जिम्मेदारी है। पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है, और इस दिशा में ठोस कदम उठाना अब और टाला नहीं जा सकता।