15 जुलाई 2026
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पवन कल्याण ने पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मुख्य सचिव को लिखा पत्र, जांच सुधार पर जोर

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पवन कल्याण ने पॉक्सो एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मुख्य सचिव को लिखा पत्र, जांच सुधार पर जोर

सारांश

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने पॉक्सो एक्ट को धरातल पर प्रभावी बनाने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा — जांच की समय-सीमा, फोरेंसिक सुधार, पीड़ित सुरक्षा और नेल्लोर दरगाह मामले में पारदर्शिता पर जोर देते हुए। यह कदम बाल यौन अपराध मामलों में देरी और पीड़ितों को धमकाने की बढ़ती घटनाओं के बीच आया है।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 15 जुलाई 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव को पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन पर पत्र लिखा।
जांच की समय-सीमा तय करने, फोरेंसिक व डिजिटल साक्ष्य संग्रह सुदृढ़ करने और मेडिकल जांच समय पर कराने की सिफारिश की गई।
नेल्लोर जिले की रहमताबाद दरगाह के सज्जादा नशीन पर चल रहे पॉक्सो मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग की गई।
तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में 10 जुलाई को पीड़ित परिवार पर कथित हमले का उल्लेख करते हुए पीड़ित सुरक्षा योजना बनाने पर जोर दिया।
जिला पुलिस अधीक्षकों और रेंज आईजी से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा और देरी के लिए जवाबदेही तय करने को कहा गया।

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने 15 जुलाई 2026 को राज्य सरकार के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कई ठोस सुझाव दिए हैं। बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले इस कानून की जांच प्रक्रिया को मजबूत करने, पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और समय पर न्याय दिलाने पर उन्होंने विशेष बल दिया है।

मुख्य सुझाव और सिफारिशें

पवन कल्याण ने अपने पत्र में जांच की समय-सीमा निर्धारित करने और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया तय समय में पूरी करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षकों और रेंज आईजी से लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने तथा देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने को कहा। उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉक्सो मामलों में विलंब से पीड़ित बच्चों को लंबे समय तक मानसिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

जांच प्रक्रिया में सुधार की माँग

उपमुख्यमंत्री ने जांच अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण, बच्चों के प्रति संवेदनशील तरीके से बयान दर्ज करने और फोरेंसिक व डिजिटल साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया को सुदृढ़ करने की सिफारिश की। इसके साथ ही उन्होंने मेडिकल जांच समय पर कराने, घटनास्थल का तत्काल दस्तावेज़ीकरण करने और सबूतों की सुरक्षा के लिए कड़ी प्रक्रिया अपनाने पर भी जोर दिया।

नेल्लोर दरगाह मामले का उल्लेख

पत्र में पवन कल्याण ने नेल्लोर जिले की रहमताबाद दरगाह से जुड़े एक मामले का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि दरगाह के सज्जादा नशीन पर पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई जारी है, फिर भी वह अपने धार्मिक पद से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। उन्होंने कहा, 'कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक ऐसे संस्थानों में उच्च स्तर की पारदर्शिता और जिम्मेदारी बनाए रखना जरूरी है।' उन्होंने पुलिस से आंध्र प्रदेश वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन को मामले की जानकारी देने का अनुरोध किया, ताकि कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जा सकें।

पीड़ित परिवारों को धमकी पर चिंता

पवन कल्याण ने पॉक्सो मामलों में पीड़ितों और उनके परिवारों को धमकाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में 10 जुलाई को हुई एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर आरोपी द्वारा पीड़ित परिवार पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करती हैं।

पीड़ित सुरक्षा और जमानत प्रक्रिया पर सतर्कता

उपमुख्यमंत्री ने पीड़ित सुरक्षा योजना तैयार करने, जमानत प्रक्रिया में सतर्कता बरतने और धमकी या दबाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा कि हर बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और न्याय पाने का अधिकार है और बच्चों को यौन अपराधों से बचाना एक संवैधानिक जिम्मेदारी है। पवन कल्याण ने स्पष्ट किया कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है, और इस दिशा में ठोस कदम उठाना अब और टाला नहीं जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली परीक्षा यह होगी कि ये सिफारिशें केवल पत्र तक सीमित रहती हैं या राज्य सरकार इन्हें बाध्यकारी दिशानिर्देशों में बदलती है — क्योंकि पॉक्सो मामलों में जांच की औसत अवधि और दोषसिद्धि दर दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर चिंताजनक बनी हुई हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पवन कल्याण ने पॉक्सो एक्ट पर मुख्य सचिव को पत्र क्यों लिखा?
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने पॉक्सो एक्ट 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए 15 जुलाई 2026 को मुख्य सचिव को पत्र लिखा। पत्र में जांच में देरी, पीड़ितों को धमकाने की घटनाओं और साक्ष्य संग्रह की कमजोरियों पर ध्यान दिलाया गया है।
पत्र में पवन कल्याण ने कौन-से मुख्य सुधार सुझाए हैं?
पवन कल्याण ने जांच की समय-सीमा तय करने, फोरेंसिक व डिजिटल साक्ष्य संग्रह मजबूत करने, जांच अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने, मेडिकल जांच समय पर कराने और पीड़ित सुरक्षा योजना तैयार करने की सिफारिश की है। साथ ही जमानत प्रक्रिया में सतर्कता और धमकी की स्थिति में तत्काल कार्रवाई पर भी जोर दिया है।
नेल्लोर दरगाह मामले का पत्र में क्या संदर्भ है?
पवन कल्याण ने नेल्लोर जिले की रहमताबाद दरगाह के सज्जादा नशीन पर पॉक्सो कानून के तहत चल रही कार्रवाई का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया जारी रहते हुए भी वह धार्मिक दायित्व निभा रहा है, इसलिए ऐसे संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले की घटना का क्या जिक्र किया गया?
पवन कल्याण ने 10 जुलाई को तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में हुई एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें कथित तौर पर आरोपी ने पीड़ित परिवार पर हमला किया। उन्होंने इसे सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौती बताते हुए पीड़ित सुरक्षा को प्राथमिकता देने की माँग की।
पॉक्सो मामलों में जांच की जिम्मेदारी किस पर तय की जाएगी?
पवन कल्याण ने जिला पुलिस अधीक्षकों और रेंज आईजी को लंबित पॉक्सो मामलों की नियमित समीक्षा करने और देरी के लिए सीधी जवाबदेही तय करने का निर्देश देने की सिफारिश की है। चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया भी निर्धारित समय-सीमा में पूरी करना अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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