20 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नागालैंड में 'चांग' नाबालिग के यौन शोषण पर मेघालय CM कोनराड संगमा की कड़ी निंदा, POCSO के तहत सख्त कार्रवाई की माँग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नागालैंड में 'चांग' नाबालिग के यौन शोषण पर मेघालय CM कोनराड संगमा की कड़ी निंदा, POCSO के तहत सख्त कार्रवाई की माँग

सारांश

नागालैंड में चांग समुदाय की एक नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने कड़ा रुख अपनाया है। उनकी माँग है — POCSO के तहत सख्त कार्रवाई, त्वरित जाँच और पीड़िता को पूर्ण न्याय। यह घटना उत्तर-पूर्व में बाल सुरक्षा की खामियों पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के.
संगमा ने नागालैंड में 'चांग' समुदाय की नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण की कड़ी निंदा की।
संगमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करके दोषियों के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट सहित सभी संबंधित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की माँग की।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से त्वरित और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
उन्होंने पीड़िता और उसके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए बच्चों के लिए सुरक्षित समाज बनाने की अपील की।
यह घटना उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की माँग को फिर से उजागर करती है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने रविवार, 1 जून 2025 को नागालैंड में 'चांग' आदिवासी समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन शोषण की घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट के तहत तत्काल और कठोर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने अधिकारियों से निष्पक्ष व त्वरित जाँच सुनिश्चित करने का आग्रह किया और पीड़िता को पूर्ण न्याय दिलाने पर बल दिया।

मुख्यमंत्री का बयान

सीएम संगमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, 'नागालैंड में चांग समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन शोषण की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं और इनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी बच्चे को इस प्रकार के मानसिक आघात से नहीं गुज़रना चाहिए।

संगमा ने पीड़िता और उसके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'मेरी संवेदनाएँ पीड़िता और उसके परिवार के साथ हैं। हमें बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा और दुर्व्यवहार के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए और हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित समाज बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।'

POCSO एक्ट और कानूनी प्रावधान

यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है। सीएम संगमा ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस मामले में पॉक्सो एक्ट सहित सभी संबंधित कानूनों के तहत पीड़िता को न्याय दिलाएँ। गौरतलब है कि इस कानून के अंतर्गत पुलिस को एक निर्धारित समयसीमा में जाँच पूरी करनी होती है, फिर भी व्यवहार में देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं।

उत्तर-पूर्व में बाल सुरक्षा का सवाल

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब उत्तर-पूर्वी राज्यों में बच्चों की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया की धीमी गति को लेकर चिंताएँ पहले से बनी हुई हैं। आलोचकों का कहना है कि सामाजिक स्तर पर जागरूकता की कमी और दूरदराज़ के इलाकों में कानूनी सहायता की अनुपलब्धता पीड़ितों के लिए न्याय की राह कठिन बनाती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार, उत्तर-पूर्वी राज्यों में बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामलों में पिछले कुछ वर्षों में वृद्धि दर्ज की गई है।

यह ऐसे समय में और भी संवेदनशील हो जाता है जब चांग समुदाय — नागालैंड के प्रमुख आदिवासी समूहों में से एक — पहले से ही सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में बाल संरक्षण तंत्र को और सुदृढ़ करने की ज़रूरत है।

क्षेत्रीय एकजुटता का संदेश

मेघालय के मुख्यमंत्री का यह बयान उत्तर-पूर्वी राज्यों के बीच बाल सुरक्षा के मुद्दे पर क्षेत्रीय एकजुटता का स्पष्ट संकेत है। कोनराड संगमा की सरकार पहले भी बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मामलों में सक्रिय भूमिका निभाती रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और साझा बाल संरक्षण नीति इस क्षेत्र की ज़रूरत बन चुकी है।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार, मामले की जाँच जारी है। सीएम संगमा ने माँग की है कि जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के अनुसार सख्त सजा दी जाए। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि नागालैंड प्रशासन इस दबाव के बाद जाँच की गति और पारदर्शिता में क्या सुधार करता है। बाल अधिकार संगठनों ने भी इस मामले में त्वरित न्याय की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पड़ोसी राज्य के मामले में निंदा के आगे ठोस अंतर-राज्यीय तंत्र कहाँ है। उत्तर-पूर्व में बाल यौन अपराध के मामलों में POCSO के बावजूद दोषसिद्धि दर राष्ट्रीय औसत से नीचे रही है — यह कानून की कमी नहीं, क्रियान्वयन की विफलता है। चांग जैसे आदिवासी समुदायों में पीड़ित अक्सर सामाजिक दबाव और भौगोलिक दूरी के कारण न्याय तक नहीं पहुँच पाते। जब तक राज्य सरकारें साझा बाल संरक्षण प्रोटोकॉल और जवाबदेह जाँच ढाँचा नहीं बनातीं, ऐसे बयान राजनीतिक संवेदनशीलता तो दिखाते हैं, पर व्यवस्थागत बदलाव नहीं लाते।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागालैंड में 'चांग' नाबालिग के यौन शोषण का मामला क्या है?
नागालैंड में 'चांग' आदिवासी समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन शोषण की घटना सामने आई है। मामले की जाँच जारी है और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा सहित कई नेताओं ने इसकी निंदा करते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की है।
मेघालय के CM कोनराड संगमा ने इस मामले पर क्या कहा?
कोनराड संगमा ने एक्स पर पोस्ट करके घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराध बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों से POCSO एक्ट सहित सभी संबंधित कानूनों के तहत पीड़िता को पूर्ण न्याय दिलाने और त्वरित जाँच सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
POCSO एक्ट के तहत इस मामले में क्या कार्रवाई हो सकती है?
यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO), 2012 नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों के लिए कठोर दंड और निर्धारित समयसीमा में जाँच का प्रावधान करता है। दोषी पाए जाने पर इस कानून के तहत कई वर्षों की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
उत्तर-पूर्व भारत में बाल सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
आलोचकों का कहना है कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में दूरदराज़ के इलाकों में कानूनी सहायता की अनुपलब्धता और सामाजिक जागरूकता की कमी पीड़ितों के लिए न्याय कठिन बनाती है। NCRB के आँकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र में बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
क्या मेघालय के CM इससे पहले भी बाल सुरक्षा पर बोले हैं?
कोनराड संगमा की सरकार पहले भी बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रही है। इस घटना पर उनका तीखा रुख बाल सुरक्षा कानूनों को और मजबूती से लागू करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले