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तमिलनाडु: CM स्टालिन की अध्यक्षता में महिला-बाल सुरक्षा पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

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तमिलनाडु: CM स्टालिन की अध्यक्षता में महिला-बाल सुरक्षा पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

सारांश

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने चेन्नई सचिवालय में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक की। जाँच में देरी, विभागीय समन्वय और जागरूकता अभियान — तीनों मोर्चों पर ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया गया।

मुख्य बातें

स्टालिन ने चेन्नई सचिवालय में महिला-बाल सुरक्षा पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में जाँच में तेज़ी, कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने पर विशेष ज़ोर दिया गया।
साईकुमार , अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ.
मनीवासन और एडवोकेट जनरल विजय नारायण बैठक में उपस्थित रहे।
पुलिस, समाज कल्याण और एडवोकेट जनरल कार्यालय के अधिकारियों ने विभागीय चुनौतियाँ साझा कीं।
सरकार ने भविष्य में जागरूकता अभियानों को तेज़ करने और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करने का संकेत दिया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोमवार, 26 मई 2025 को चेन्नई सचिवालय में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों की रोकथाम को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने, मामलों की जाँच में तेज़ी लाने और पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने के उपायों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में उठाए गए मुख्य मुद्दे

बैठक में अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कई मामलों में जाँच और कानूनी प्रक्रिया में देरी के कारण पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पाता। इसे दूर करने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और संसाधनों को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया। साथ ही कानूनी प्रक्रियाओं को सरल और प्रभावी बनाने तथा जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई।

कौन-कौन रहे उपस्थित

बैठक में मुख्य सचिव डॉ. एम. साईकुमार (IAS), गृह, निषेध एवं आबकारी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. मनीवासन (IAS) तथा एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने भाग लिया। इसके अलावा पुलिस विभाग और समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने-अपने विभागों की वर्तमान स्थिति और चुनौतियों की जानकारी दी।

सरकार की प्राथमिकता और आगे की योजना

सभी अधिकारियों ने इस बात पर सहमति जताई कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार की ओर से संकेत दिया गया कि आने वाले समय में जागरूकता अभियानों को और तेज़ किया जाएगा, ताकि समाज में संवेदनशीलता बढ़े और अपराधों की रोकथाम में सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

आम जनता पर असर

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब राज्य में महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ी है। गौरतलब है कि त्वरित जाँच और अंतर-विभागीय समन्वय की माँग लंबे समय से नागरिक समाज की ओर से उठती रही है। इस बैठक को राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मज़बूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस तरह की उच्चस्तरीय बैठकें पहले भी होती रही हैं। बिना जवाबदेही तंत्र और समयबद्ध लक्ष्यों के, यह पहल महज़ प्रशासनिक संकेत बनकर रह सकती है। जागरूकता अभियान तभी प्रभावी होते हैं जब वे ज़मीनी स्तर पर पीड़ितों की रिपोर्टिंग दर बढ़ाएँ — जो अभी भी चिंताजनक रूप से कम है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिलनाडु सरकार की यह समीक्षा बैठक किस विषय पर थी?
यह बैठक महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध बढ़ते अपराधों की रोकथाम, जाँच में तेज़ी और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी। इसमें विभागीय समन्वय और जागरूकता अभियानों को मज़बूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ।
बैठक की अध्यक्षता किसने की और कौन-कौन उपस्थित थे?
बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने की। मुख्य सचिव डॉ. एम. साईकुमार, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. के. मनीवासन, एडवोकेट जनरल विजय नारायण तथा पुलिस व समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में जाँच में देरी की समस्या पर क्या निर्णय हुआ?
अधिकारियों ने स्वीकार किया कि जाँच और कानूनी प्रक्रिया में देरी न्याय में बाधा बनती है। इसे दूर करने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और संसाधनों को मज़बूत करने पर सहमति बनी, हालाँकि विशिष्ट समयसीमा की घोषणा नहीं की गई।
तमिलनाडु सरकार आगे क्या कदम उठाने की योजना बना रही है?
सरकार ने जागरूकता अभियानों को और तेज़ करने का संकेत दिया है ताकि सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित हो और अपराधों को रोकने में समाज की भूमिका बढ़े। इसके साथ ही अपराधियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर भी ज़ोर दिया गया है।
यह बैठक तमिलनाडु में महिला सुरक्षा के लिहाज़ से कितनी अहम है?
इस बैठक को राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। यह ऐसे समय में हुई है जब महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ी है और नागरिक समाज की ओर से त्वरित कार्रवाई की माँग उठती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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