18 जुलाई 2026
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नागालैंड में 'चांग' नाबालिग से यौन शोषण: मेघालय CM कोनराड संगमा ने की कड़ी निंदा, POCSO के तहत सख्त कार्रवाई की माँग

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नागालैंड में 'चांग' नाबालिग से यौन शोषण: मेघालय CM कोनराड संगमा ने की कड़ी निंदा, POCSO के तहत सख्त कार्रवाई की माँग

सारांश

नागालैंड में 'चांग' समुदाय की एक नाबालिग लड़की के कथित यौन शोषण पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने एक्स पर तीखी निंदा की और POCSO के तहत त्वरित जाँच व सख्त सज़ा की माँग की — यह घटना उत्तर-पूर्व में बाल सुरक्षा की खामियों पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के.
संगमा ने 31 मई को नागालैंड में 'चांग' समुदाय की नाबालिग से कथित यौन शोषण की कड़ी निंदा की।
संगमा ने एक्स पर पोस्ट कर अधिकारियों से पॉक्सो अधिनियम के तहत त्वरित, निष्पक्ष जाँच और सख्त सज़ा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और बच्चों के विरुद्ध हिंसा के खिलाफ सामूहिक एकजुटता का आह्वान किया।
यह घटना उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाल सुरक्षा तंत्र और न्याय प्रक्रिया की गति को लेकर चिंताओं को फिर उजागर करती है।
नागालैंड प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने रविवार, 31 मई को नागालैंड में 'चांग' समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ हुए कथित यौन शोषण की कड़ी निंदा की। उन्होंने अधिकारियों से इस मामले की त्वरित और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने तथा पॉक्सो अधिनियम समेत सभी संबंधित कानूनों के तहत पीड़िता को पूर्ण न्याय दिलाने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'नागालैंड में चांग समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन शोषण की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराध बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं और इनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बच्चे को इस तरह के मानसिक आघात से नहीं गुज़रना चाहिए।

न्याय और जाँच की माँग

संगमा ने इस मामले में जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के अनुसार सख्त सज़ा दिए जाने की माँग की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे बिना किसी देरी के निष्पक्ष जाँच पूरी करें। पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों पर कठोर दंड का प्रावधान है, और संगमा ने स्पष्ट किया कि इस कानून का पूर्ण उपयोग होना चाहिए।

पीड़िता के प्रति संवेदना

मुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'मेरी संवेदनाएँ पीड़िता और उसके परिवार के साथ हैं। हमें बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा और दुर्व्यवहार के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए और हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित समाज बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।'

उत्तर-पूर्व में बाल सुरक्षा का सवाल

यह घटना उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाल सुरक्षा को लेकर उठने वाली चिंताओं को एक बार फिर सामने लाती है। आलोचकों का कहना है कि इस क्षेत्र में कानूनी प्रावधानों के बावजूद सामाजिक जागरूकता और न्याय प्रक्रिया की गति में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। गौरतलब है कि राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की माँग लंबे समय से उठती रही है।

आगे क्या

मेघालय सरकार बाल शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों पर पहले से सक्रिय रही है। कोनराड संगमा का यह तीखा रुख क्षेत्रीय एकजुटता का संकेत देता है और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाल सुरक्षा कानूनों को और मजबूती से लागू करने की दिशा में दबाव बढ़ाता है। नागालैंड प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उत्तर-पूर्व में क्षेत्रीय एकजुटता की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है। लेकिन असली सवाल यह है कि निंदा के बयानों से आगे जाकर ठोस नीतिगत समन्वय कब होगा। उत्तर-पूर्वी राज्यों में POCSO के मामलों में दोषसिद्धि दर राष्ट्रीय औसत से कम रही है, और सामाजिक दबाव के बिना त्वरित न्याय अक्सर अधूरा रह जाता है। संगमा की आवाज़ ज़रूरी है, पर पर्याप्त नहीं — इस क्षेत्र को साझा बाल सुरक्षा ढाँचे और जवाबदेही तंत्र की दरकार है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नागालैंड में 'चांग' नाबालिग यौन शोषण मामला क्या है?
नागालैंड में 'चांग' आदिवासी समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन शोषण की घटना सामने आई है। इस पर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने 31 मई को कड़ी निंदा करते हुए POCSO अधिनियम के तहत त्वरित जाँच और सख्त सज़ा की माँग की।
मेघालय के CM संगमा ने इस मामले में क्या कहा?
संगमा ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि बच्चों के विरुद्ध अपराध बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हैं और इनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से निष्पक्ष जाँच और पॉक्सो अधिनियम के तहत पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
POCSO अधिनियम के तहत इस मामले में क्या कार्रवाई हो सकती है?
पॉक्सो (POCSO) अधिनियम नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों पर कठोर दंड का प्रावधान करता है, जिसमें न्यूनतम सात वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सज़ा शामिल है। मामले की त्वरित जाँच और विशेष POCSO अदालत में सुनवाई की माँग की जा रही है।
उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाल सुरक्षा की स्थिति कैसी है?
उत्तर-पूर्वी राज्यों में POCSO मामलों में दोषसिद्धि दर और न्याय प्रक्रिया की गति को लेकर आलोचकों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक जागरूकता और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की अभी भी ज़रूरत है।
क्या मेघालय सरकार नागालैंड के इस मामले में सीधे हस्तक्षेप कर सकती है?
कानूनी रूप से नागालैंड की घटना में मेघालय सरकार का सीधा अधिकार क्षेत्र नहीं है। हालाँकि, मुख्यमंत्री संगमा का सार्वजनिक बयान क्षेत्रीय दबाव बनाने और नागालैंड प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के लिए प्रेरित करने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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