नागालैंड में 'चांग' नाबालिग से यौन शोषण: मेघालय CM कोनराड संगमा ने की कड़ी निंदा, POCSO के तहत सख्त कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने रविवार, 31 मई को नागालैंड में 'चांग' समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ हुए कथित यौन शोषण की कड़ी निंदा की। उन्होंने अधिकारियों से इस मामले की त्वरित और निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने तथा पॉक्सो अधिनियम समेत सभी संबंधित कानूनों के तहत पीड़िता को पूर्ण न्याय दिलाने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'नागालैंड में चांग समुदाय की एक नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन शोषण की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराध बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं हैं और इनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बच्चे को इस तरह के मानसिक आघात से नहीं गुज़रना चाहिए।
न्याय और जाँच की माँग
संगमा ने इस मामले में जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के अनुसार सख्त सज़ा दिए जाने की माँग की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अपील की कि वे बिना किसी देरी के निष्पक्ष जाँच पूरी करें। पॉक्सो अधिनियम के तहत नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों पर कठोर दंड का प्रावधान है, और संगमा ने स्पष्ट किया कि इस कानून का पूर्ण उपयोग होना चाहिए।
पीड़िता के प्रति संवेदना
मुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, 'मेरी संवेदनाएँ पीड़िता और उसके परिवार के साथ हैं। हमें बच्चों के विरुद्ध होने वाली हिंसा और दुर्व्यवहार के विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए और हर बच्चे के लिए एक सुरक्षित समाज बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।'
उत्तर-पूर्व में बाल सुरक्षा का सवाल
यह घटना उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाल सुरक्षा को लेकर उठने वाली चिंताओं को एक बार फिर सामने लाती है। आलोचकों का कहना है कि इस क्षेत्र में कानूनी प्रावधानों के बावजूद सामाजिक जागरूकता और न्याय प्रक्रिया की गति में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है। गौरतलब है कि राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय की माँग लंबे समय से उठती रही है।
आगे क्या
मेघालय सरकार बाल शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के मुद्दों पर पहले से सक्रिय रही है। कोनराड संगमा का यह तीखा रुख क्षेत्रीय एकजुटता का संकेत देता है और उत्तर-पूर्वी राज्यों में बाल सुरक्षा कानूनों को और मजबूती से लागू करने की दिशा में दबाव बढ़ाता है। नागालैंड प्रशासन से इस मामले में शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।