4 नवंबर 2026
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पंजाब में AAP राज पर कांग्रेस का हमला: बाजवा बोले — नशा, पलायन और बेरोज़गारी की जिम्मेदार मान सरकार

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पंजाब में AAP राज पर कांग्रेस का हमला: बाजवा बोले — नशा, पलायन और बेरोज़गारी की जिम्मेदार मान सरकार

सारांश

संगरूर की 'इंसाफ' रैली में कांग्रेस ने AAP सरकार को नशे, पलायन और बेरोज़गारी के लिए घेरा। बाजवा ने मान सरकार पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया और कांग्रेस को पंजाब की 'एकमात्र उम्मीद' बताया — यह 2027 के चुनाव से पहले विपक्ष की सबसे आक्रामक राजनीतिक चुनौती है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 4 नवंबर 2026 को संगरूर में AAP सरकार पर नशा, पलायन और बेरोज़गारी बढ़ाने का आरोप लगाया।
रैली को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी संबोधित किया; इसे 'इंसाफ' रैली नाम दिया गया।
बाजवा ने कहा कि शिक्षित परिवार बच्चों को विदेश भेज रहे हैं, बाकी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं।
कांग्रेस नेता विजय इंदर सिंगला ने मादक पदार्थ तस्करी और संगठित अपराध पर नकेल न कसने का आरोप लगाया।
बाजवा ने 2029 में राहुल गांधी के राष्ट्रीय नेतृत्व और पारंपरिक व्यापार मार्ग खोलने की बात कही।

कांग्रेस नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 4 नवंबर 2026 को संगरूर में आयोजित पार्टी की 'इंसाफ' रैली के मौके पर आम आदमी पार्टी (AAP) की मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि AAP शासन में पंजाब नशे की लत, बेरोज़गारी और बड़े पैमाने पर पलायन की चपेट में आ गया है। रैली को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी संबोधित किया।

मान सरकार पर क्या हैं आरोप

बाजवा ने कहा कि भगवंत मान ने पंजाब की जनता के भरोसे को धोखा दिया है। उनके शब्दों में, 'लोगों ने उन्हें मौका दिया और देखा कि AAP शासन में कुछ भी सुरक्षित नहीं है — न कोई व्यवसाय, न कोई परिवार, न किसी की जान, न बच्चे और न ही युवा।' उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षित और आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों को विदेश भेज रहे हैं, जबकि जो पलायन का खर्च नहीं उठा सकते, वे नशे की लत में फँसते जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता विजय इंदर सिंगला ने भी AAP सरकार पर मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और बेरोज़गारी पर काबू पाने में विफल रहने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

संगरूर 'इंसाफ' रैली का संदर्भ

गौरतलब है कि संगरूर वही सीट है जहाँ से AAP के सर्वोच्च नेता अरविंद केजरीवाल के करीबी भगवंत मान पहले सांसद रहे और बाद में मुख्यमंत्री बने। ऐसे में इसी ज़िले में कांग्रेस की 'इंसाफ' रैली का आयोजन राजनीतिक दृष्टि से सांकेतिक है। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं और सभी दलों ने अपनी रणनीतियाँ तेज़ कर दी हैं।

बाजवा ने स्पष्ट किया कि राज्य अब राजनीतिक प्रयोगों का जोखिम नहीं उठा सकता और इसे एक सतत विकास रणनीति के ज़रिये पुनर्निर्मित करने की ज़रूरत है।

राहुल गांधी की भूमिका और 2029 का लक्ष्य

बाजवा ने राहुल गांधी के राष्ट्रीय नेतृत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि पंजाब को उनके नेतृत्व की आवश्यकता है और पार्टी उन्हें 2029 में एक राष्ट्रीय नेता के रूप में देखती है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस 2029 में केंद्र में सत्ता में लौटती है, तो पारंपरिक व्यापार मार्गों को फिर से खोलने और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच बहाल करने से पंजाब के औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को नई ऊर्जा मिलेगी।

कांग्रेस का ऐतिहासिक योगदान और वापसी का दावा

बाजवा ने जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकारों के दौर में हुए विकास कार्यों का हवाला दिया — चंडीगढ़ की स्थापना, हरित क्रांति, भाखरा बांध, सिंचाई अवसंरचना और विश्वविद्यालयों को पंजाब में पार्टी की उपलब्धियों के रूप में गिनाया। उन्होंने कहा, 'ये स्रोत अभी बंद हैं; हमें इन्हें खोलना होगा। अगर ये खुलेंगे, तभी पंजाब का विकास हो पाएगा।'

आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस स्वयं 2017 से 2022 के बीच पंजाब में सत्ता में रही और उस दौरान नशे और बेरोज़गारी की समस्याएँ पूरी तरह हल नहीं हुई थीं — यह विरोधाभास आगामी चुनाव प्रचार में बड़ा मुद्दा बन सकता है। पंजाब की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहाँ हर दल अपने वादों और अपने रिकॉर्ड दोनों पर जवाब देने के लिए बाध्य होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक बड़ा विरोधाभास भी उजागर करता है — पार्टी 2017-2022 के बीच स्वयं पंजाब में सत्ता में रही और उस दौरान नशे और बेरोज़गारी की समस्याएँ सुलझी नहीं थीं। बाजवा का 'ऐतिहासिक योगदान' वाला तर्क मतदाताओं को प्रेरित करने के बजाय प्रति-आरोपों को आमंत्रित कर सकता है। संगरूर जैसी AAP की प्रतीकात्मक सीट पर रैली का आयोजन रणनीतिक है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या कांग्रेस 2027 के चुनाव से पहले ठोस वैकल्पिक नीतियाँ पेश कर पाती है — या यह महज़ AAP-विरोधी भावना भुनाने की कोशिश बनकर रह जाती है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संगरूर 'इंसाफ' रैली क्या है और इसका उद्देश्य क्या था?
4 नवंबर 2026 को संगरूर में आयोजित कांग्रेस की 'इंसाफ' रैली का उद्देश्य पंजाब में AAP सरकार के खिलाफ जन-भावना को एकजुट करना था। रैली को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संबोधित किया और इसे पंजाब के अधिकारों व न्याय से जुड़े मुद्दों को उठाने का मंच बताया गया।
प्रताप सिंह बाजवा ने मान सरकार पर क्या आरोप लगाए?
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में AAP सरकार ने पंजाब में नशे की लत, बेरोज़गारी और बड़े पैमाने पर पलायन को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षित परिवार अपने बच्चों को विदेश भेज रहे हैं जबकि बाकी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं।
कांग्रेस ने पंजाब के विकास के लिए क्या वादे किए हैं?
कांग्रेस ने दावा किया है कि यदि 2029 में केंद्र में सत्ता में आती है, तो पारंपरिक व्यापार मार्गों को फिर से खोलने और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुँच बहाल करने से पंजाब के औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों को पुनर्जीवित किया जाएगा। पार्टी ने चंडीगढ़, हरित क्रांति और भाखरा बांध जैसे ऐतिहासिक योगदानों का हवाला देते हुए खुद को सतत विकास की 'एकमात्र सक्षम पार्टी' बताया।
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव कब है और इसका राजनीतिक महत्व क्या है?
पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होने की संभावना है। संगरूर जैसी AAP की प्रतीकात्मक सीट पर कांग्रेस की यह रैली चुनावी तैयारियों की शुरुआत मानी जा रही है। AAP, कांग्रेस और BJP के बीच त्रिकोणीय मुकाबले में नशा और पलायन जैसे मुद्दे निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
विजय इंदर सिंगला ने AAP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता विजय इंदर सिंगला ने AAP सरकार पर मादक पदार्थों की तस्करी, संगठित अपराध और बेरोज़गारी को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती जा रही है और सरकार इन मोर्चों पर कोई ठोस कार्रवाई करने में अक्षम साबित हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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