पंजाब ड्रग संकट: बाजवा बोले — मान और भाजपा आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त, युवाओं को चाहिए कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 14 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी (AAP) की राज्य सरकार और केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) — दोनों पर एक साथ निशाना साधा। उनका आरोप है कि दोनों सरकारें पंजाब के गंभीर नशा संकट को सुलझाने के बजाय उसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बना रही हैं।
आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति पर बाजवा का हमला
बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें मान ने सीमा पार तस्करी, BSF और मुंद्रा पोर्ट को ड्रग समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया था। बाजवा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'भगवंत मान सीमा पार से तस्करी, बीएसएफ और मुंद्रा पोर्ट की बातें करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।'
साथ ही उन्होंने BJP को भी नहीं बख्शा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ, बंदरगाह और राष्ट्रीय ड्रग-तस्करी नेटवर्क उन क्षेत्रों में आते हैं जहाँ केंद्र सरकार की प्राथमिक जवाबदेही है। उन्होंने कहा, 'पंजाब के युवाओं को कार्रवाई चाहिए, न कि मान-मोदी का आरोप-प्रत्यारोप का खेल।'
ज़मीनी हकीकत पर तीखे सवाल
बाजवा ने मुख्यमंत्री मान के हज़ारों गिरफ्तारियों और एफआईआर के दावों को चुनौती देते हुए कई तीखे सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि सरकार की नशा-विरोधी मुहिम वाकई सफल रही है, तो सिंथेटिक ड्रग 'चिट्टा' अभी भी इतनी आसानी से क्यों उपलब्ध है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कितने बड़े ड्रग तस्करों को सज़ा हुई, ड्रग्स से जुड़ी कितनी संपत्ति जब्त की गई, और माफिया को समर्थन देने वाले राजनीतिक व वित्तीय नेटवर्क को कितनी बार तोड़ा गया।
यह ऐसे समय में आया है जब BJP 18 सितंबर 2026 से पंजाब में राज्यव्यापी 'नशा मुक्त पंजाब यात्राएँ' शुरू करने की तैयारी में है — एक कदम जिसे बाजवा ने भी राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा बताया।
संगरूर घटना और गुलजार सिंह का मामला
बाजवा ने संगरूर में गुलजार सिंह की मौत का ज़िक्र किया, जिन्होंने कथित तौर पर ड्रग्स की आसान उपलब्धता का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया था और बाद में जहर खाने से उनकी मृत्यु हो गई। बाजवा ने इस घटना को AAP और BJP दोनों के लिए शर्म का विषय बताया।
उन्होंने माँग की कि गुलजार सिंह की मौत से जुड़े हालात और उत्पीड़न के आरोपों की गहन एवं निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'सीएम मान को अपने चहेते मंत्री हरपाल सिंह चीमा को बचाना बंद करना चाहिए, जिनका नाम गुलजार सिंह ने अपनी मौत से पहले लिया था।'
मोहनजीत सिंह पर पुलिस कार्रवाई की निंदा
बाजवा ने मोहनजीत सिंह के मामले की भी कड़ी निंदा की, जिन पर कथित तौर पर ड्रग्स के खिलाफ आवाज़ उठाने के बाद पुलिस ने हमला किया। उन्होंने कहा, 'अगर ड्रग्स के बारे में बात करने वाले किसी नागरिक को पुलिस हिरासत में पीटा जाता है तो यह सरकार पंजाब के लोगों को क्या संदेश दे रही है?'
गौरतलब है कि बाजवा ने दोनों मामलों को एक ही धागे में पिरोते हुए कहा: 'मान और भाजपा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने और एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं। यह ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई नहीं है। यह राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई है।'
आगे क्या होगा
BJP की 18 सितंबर से शुरू होने वाली यात्राओं और AAP सरकार के जवाबी रुख के साथ, आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में नशा-संकट का मुद्दा और गरमाने की संभावना है। कांग्रेस की माँग है कि गुलजार सिंह मामले की निष्पक्ष जाँच हो और नशा-विरोधी मुहिम में राजनीतिक प्रदर्शन की जगह ठोस कानूनी कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाए।