22 अगस्त 2026
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पंजाब में बदलाव के लिए कांग्रेस एकजुट: बाजवा बोले — भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र नहीं

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पंजाब में बदलाव के लिए कांग्रेस एकजुट: बाजवा बोले — भाजपा में आंतरिक लोकतंत्र नहीं

सारांश

पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में कांग्रेस के भीतर आंतरिक खींचतान के बीच नेता प्रतिपक्ष बाजवा ने एकजुटता का आह्वान किया। उनका संदेश स्पष्ट है — व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर संगठित हों, क्योंकि BJP में गए नेताओं को भी वहाँ राजनीतिक अवसर नहीं मिला।

मुख्य बातें

प्रताप सिंह बाजवा ने 7 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में कहा कि एकजुट कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी कर सकती है।
बाजवा ने आरोप लगाया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था बेहद खराब है और राज्य सरकार नशे पर नियंत्रण में विफल रही है।
चरणजीत सिंह चन्नी के दिल्ली दौरे को बाजवा ने अनावश्यक विवाद बताया; कहा — दिल्ली भी देश का हिस्सा है।
पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के कांग्रेस नेताओं को आमंत्रण पर बाजवा ने गालिब के शेर से पलटवार किया।
कैप्टन अमरिंदर सिंह , सुनील जाखड़ और रवनीत सिंह बिट्टू को BJP में सक्रिय भूमिका न मिलने का दावा किया।
बाजवा ने कहा — कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र है, BJP में शीर्ष नेतृत्व की अनुमति के बिना कोई निर्णय संभव नहीं।

पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने 7 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में कहा कि यदि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सभी नेताओं और समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़े, तो वह पंजाब में निर्णायक बदलाव लाने में सक्षम है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र जीवंत है, जबकि BJP में शीर्ष नेतृत्व की अनुमति के बिना कोई स्वतंत्र निर्णय संभव नहीं।

पंजाब की मौजूदा स्थिति पर चिंता

बाजवा ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार पंजाब में लोगों की जान-माल सुरक्षित नहीं है, व्यापार प्रभावित हो रहा है और बड़ी संख्या में युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नशीले पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में पूरी तरह विफल रही है। बाजवा का कहना था कि इन परिस्थितियों में कांग्रेस के सभी नेताओं को व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए।

चन्नी के दिल्ली दौरे पर बाजवा का स्पष्टीकरण

कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल के चंडीगढ़ पहुँचने के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के दिल्ली जाने पर उठे सवालों को बाजवा ने अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा, 'दिल्ली भी देश का ही हिस्सा है। संभव है कि चन्नी प्रभारी से मिलकर गए हों या वापस आकर मुलाकात कर लें।' उन्होंने स्पष्ट किया कि बघेल कई दिनों तक पंजाब में रहेंगे, इसलिए किसी नेता के आने-जाने को राजनीतिक अर्थ देना उचित नहीं।

बहिष्कार की खबरों पर प्रतिक्रिया

चन्नी गुट के कुछ नेताओं द्वारा पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग के कार्यक्रमों के कथित बहिष्कार पर बाजवा ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियाँ लगातार बदलती रहती हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि नेता एक समय कोई बयान देते हैं और बाद में परिस्थितियों के अनुसार अलग निर्णय लेते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस का कार्यकर्ता अंततः पार्टी में ही रहेगा और हाईकमान सभी पक्षों की बात सुनता है।

BJP पर पलटवार — 'दिल के बहलाने को गालिब ये खयाल अच्छा है'

पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं का BJP में स्वागत करने की बात कही थी, बाजवा ने मशहूर शेर का हवाला देते हुए कहा, 'दिल के बहलाने के लिए गालिब ये खयाल अच्छा है।' उन्होंने दावा किया कि BJP में शामिल हुए वरिष्ठ नेताओं — कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू — को भी अपेक्षित राजनीतिक महत्व और सक्रिय भूमिका नहीं मिल रही।

आगे की राह: संगठनात्मक एकता पर जोर

बाजवा ने पार्टी नेताओं से अपील की कि यदि किसी को संगठनात्मक फैसलों पर आपत्ति है, तो वह पार्टी हाईकमान के सामने अपनी बात रखे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस के पास पंजाब में सत्ता में वापसी का सबसे अच्छा अवसर है क्योंकि राज्य की जनता बदलाव चाहती है और पार्टी के पास अनुभवी नेतृत्व मौजूद है। यदि कांग्रेस संगठित होकर आगे बढ़े, तो पंजाब में सकारात्मक बदलाव संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि चन्नी गुट और वड़िंग खेमे के बीच की खाई क्या महज़ बयानबाजी से पटेगी? पंजाब कांग्रेस का इतिहास बताता है कि हर चुनाव से पहले एकता के नारे लगते हैं और हर हार के बाद गुटबाजी सतह पर आ जाती है। BJP पर 'लोकतंत्र नहीं' का आरोप लगाते हुए बाजवा यह नहीं बताते कि खुद कांग्रेस में हाईकमान-केंद्रित निर्णय प्रक्रिया किस हद तक अलग है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले असली परीक्षा संगठनात्मक एकता की नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय वैकल्पिक एजेंडे की है जो AAP सरकार की विफलताओं को ठोस तरीके से चुनौती दे सके।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब में कांग्रेस की एकजुटता पर क्या कहा?
बाजवा ने 7 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में कहा कि यदि कांग्रेस सभी नेताओं और समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़े, तो वह पंजाब में प्रभावी बदलाव ला सकती है। उन्होंने व्यक्तिगत मतभेद भुलाकर पार्टी में एकता बनाए रखने की अपील की।
बाजवा ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
बाजवा ने दावा किया कि BJP में शीर्ष नेतृत्व की अनुमति के बिना कोई स्वतंत्र निर्णय संभव नहीं, जबकि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ और रवनीत सिंह बिट्टू जैसे वरिष्ठ नेताओं को BJP में अपेक्षित राजनीतिक महत्व नहीं मिला।
चरणजीत सिंह चन्नी के दिल्ली दौरे पर बाजवा ने क्या कहा?
बाजवा ने इस मुद्दे को अनावश्यक राजनीतिक रंग देने से मना किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली भी देश का हिस्सा है और संभव है कि चन्नी पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल से मिलकर गए हों या वापस आकर मुलाकात कर लें।
पंजाब में कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या पर बाजवा का क्या कहना है?
बाजवा ने आरोप लगाया कि पंजाब में कानून-व्यवस्था बेहद खराब हो चुकी है, लोगों की जान-माल सुरक्षित नहीं है और राज्य सरकार नशीले पदार्थों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में पूरी तरह विफल रही है। उनके अनुसार बड़ी संख्या में युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं।
राजा वड़िंग के कार्यक्रमों के कथित बहिष्कार पर बाजवा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
बाजवा ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियाँ लगातार बदलती रहती हैं और यदि किसी नेता को संगठनात्मक फैसलों पर आपत्ति है, तो उसे पार्टी हाईकमान के सामने अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस का कार्यकर्ता अंततः पार्टी में ही रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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