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पंजाब कांग्रेस बैठक के बाद बाजवा का ऐलान: 'पद मिले या न मिले, राहुल गांधी के साथ खड़े रहेंगे'

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पंजाब कांग्रेस बैठक के बाद बाजवा का ऐलान: 'पद मिले या न मिले, राहुल गांधी के साथ खड़े रहेंगे'

सारांश

नई दिल्ली में राहुल गांधी के साथ पंजाब कांग्रेस की अहम बैठक के बाद प्रताप सिंह बाजवा ने साफ़ कहा — पद मिले या न मिले, वे पार्टी के 'समर्पित सिपाही' हैं। 2024 में 14 में से 8 सीटें जीतने का हवाला देकर उन्होंने एकजुटता की अपील की और अंतिम फ़ैसला राहुल गांधी पर छोड़ा।

मुख्य बातें

प्रताप सिंह बाजवा ने 21 जून को नई दिल्ली में राहुल गांधी से पंजाब कांग्रेस की आंतरिक रणनीति पर बैठक की।
बाजवा ने बैठक को 'उपयोगी और सकारात्मक' बताया और कहा कि पद की परवाह किए बिना वे कांग्रेस के साथ खड़े रहेंगे।
बैठक में पाँच वरिष्ठ पंजाब कांग्रेस नेता शामिल हुए; पंजाब की राजनीतिक स्थिति और संगठन पर चर्चा हुई।
बाजवा ने 2024 लोकसभा चुनाव में पंजाब की 14 में से 8 सीटें जीतने का उल्लेख कर एकजुटता की ज़रूरत पर बल दिया।
अंतिम संगठनात्मक निर्णय राहुल गांधी पर छोड़ा गया; बाजवा ने भरोसा जताया कि फ़ैसला पंजाब और पार्टी दोनों के हित में होगा।

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 21 जून को नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद स्पष्ट किया कि वे पद की परवाह किए बिना पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखेंगे। पंजाब कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और भविष्य की रणनीति पर केंद्रित इस बैठक को बाजवा ने 'उपयोगी और सकारात्मक' करार दिया।

बैठक में क्या हुआ

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस के पाँच वरिष्ठ नेताओं के साथ यह बैठक की। इसमें पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन को मज़बूत करने के उपाय और आगामी चुनावी रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बाजवा ने बताया कि उन्होंने बैठक में अपना पक्ष रखा और नेतृत्व को बताया कि पंजाब की जनता एक बार फिर कांग्रेस पर भरोसा करने को तैयार है। उनके अनुसार, पार्टी को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए।

बाजवा का स्पष्ट संदेश

बाजवा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'हम कांग्रेस पार्टी के समर्पित सिपाही हैं। हमें कोई पद मिले या न मिले, हम राहुल गांधी और कांग्रेस के साथ खड़े रहेंगे। पंजाब में कांग्रेस की स्थिति को मज़बूत करने के लिए सभी नेताओं को एकजुट होकर काम करना होगा।'

उन्होंने यह भी कहा कि संगठनात्मक निर्णय पहले भी राहुल गांधी और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा लिए जाते रहे हैं और आगे भी नेतृत्व की यही भूमिका रहेगी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वे और उनके साथी पद के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के सिद्धांतों और पंजाब के हित के लिए काम कर रहे हैं।

चुनावी प्रदर्शन का हवाला

बाजवा ने 2024 के लोकसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस ने पंजाब की 14 संसदीय सीटों में से 8 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें चंडीगढ़ भी शामिल रहा। उनके अनुसार, यदि पार्टी इसी एकजुटता के साथ आगे बढ़े तो भविष्य में और बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व और संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर अटकलें तेज़ हैं। आंतरिक मतभेदों के बीच इस तरह की एकता की सार्वजनिक अभिव्यक्ति पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आगे की राह

बाजवा ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी राय रख दी है और अंतिम निर्णय राहुल गांधी पर छोड़ा गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि जो भी फ़ैसला लिया जाएगा, वह पंजाब और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) दोनों के व्यापक हित में होगा। पार्टी के भीतर अगले संगठनात्मक कदम पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी पृष्ठभूमि पंजाब कांग्रेस में चल रही उस खींचतान है जो संगठनात्मक पुनर्गठन की अटकलों के बीच सतह पर आ गई है। 'पद की परवाह नहीं' जैसे बयान अक्सर तब आते हैं जब पद को लेकर असंतोष वास्तव में मौजूद हो। 2024 में 8 सीटों की जीत को एकता की उपलब्धि बताना रणनीतिक है, लेकिन यह नहीं बताता कि पार्टी 2022 विधानसभा में सत्ता क्यों गँवाई। असली सवाल यह है कि क्या यह एकता चुनाव से पहले टिकेगी या महज़ एक बैठक तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रताप सिंह बाजवा और राहुल गांधी की बैठक किस बारे में थी?
यह बैठक 21 जून को नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस की आंतरिक राजनीति, संगठन की मज़बूती और आगामी चुनावी रणनीति पर केंद्रित थी। इसमें पंजाब के पाँच वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल हुए।
बाजवा ने पद को लेकर क्या कहा?
बाजवा ने स्पष्ट कहा कि वे और उनके साथी पद के लिए नहीं बल्कि पार्टी के सिद्धांतों और पंजाब के हित के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पद मिले या न मिले, वे राहुल गांधी और कांग्रेस के साथ खड़े रहेंगे।
2024 लोकसभा चुनाव में पंजाब कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा?
2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पंजाब की 14 संसदीय सीटों में से 8 सीटों पर जीत दर्ज की, जिसमें चंडीगढ़ भी शामिल था। बाजवा ने इसे पार्टी की एकजुटता का परिणाम बताया।
पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक फ़ैसले कौन लेता है?
बाजवा के अनुसार, नेतृत्व से जुड़े सभी निर्णय राहुल गांधी और पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा लिए जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आगे भी संगठनात्मक फ़ैसलों में यही भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
इस बैठक के बाद पंजाब कांग्रेस में क्या होगा?
बाजवा ने कहा कि उन्होंने अपनी राय नेतृत्व के सामने रख दी है और अंतिम निर्णय राहुल गांधी पर छोड़ा गया है। पार्टी के भीतर अगले संगठनात्मक कदम पर अभी सभी की नज़रें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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