पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर प्रियंका चतुर्वेदी की चेतावनी, एकजुटता की अपील
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने 4 जुलाई को नई दिल्ली में कहा कि पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी कलह और बगावत पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक खतरा बन सकती है, क्योंकि पंजाब विधानसभा चुनाव अब दूर नहीं हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी की वरिष्ठ नेतृत्व और प्रदेश कांग्रेस टीम मिलकर आपसी शिकायतें दूर करेंगी।
कांग्रेस की अंदरूनी कलह पर चिंता
चतुर्वेदी ने कहा कि पंजाब कांग्रेस में चल रहा विरोध एक बार फिर यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर के मतभेद अंततः उसे राजनीतिक नुकसान पहुँचा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, मनीष तिवारी जैसे अनुभवी सांसद, जो यूथ कांग्रेस में भी सक्रिय रहे हैं, को पार्टी की समिति में जगह न मिलना, असंतोष का एक प्रमुख कारण है।
उन्होंने कहा, 'मैं उम्मीद करती हूँ कि पार्टी की वरिष्ठ नेतृत्व और पंजाब कांग्रेस की टीम मिलजुलकर इस पर काम करेंगे और एक-दूसरे की शिकायतें दूर करेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ विपक्षी एकजुटता की सख्त ज़रूरत है।
लोकतंत्र और मतदाताओं की आस्था पर सवाल
चतुर्वेदी ने व्यापक राजनीतिक संकट की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि आज मतदाता चुनावों से निराश हो रहे हैं, क्योंकि पैसे, राजनीतिक प्रभाव और सरकारी ताकत के दम पर सांसदों-विधायकों को तोड़कर और पार्टियों को विभाजित करके उनके वोट की अहमियत खत्म कर दी जाती है।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में शिवसेना के बंटवारे से जुड़े लंबित मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं आया है। उनके अनुसार यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को कमज़ोर करती है।
चुनाव आयोग पर निशाना
चतुर्वेदी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के ज़रिए मतदाताओं के अधिकारों पर कथित रोक को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मत चोरी और वोट में हेराफेरी की जा रही है, और चुनाव आयोग (ECI) जनता के विश्वास पर खरा नहीं उतर रहा।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर प्रतिक्रिया
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले पर चतुर्वेदी ने कहा, 'जो हुआ है, वह भक्तों की आस्था के साथ धोखा है। इस गंभीर साजिश में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।' उन्होंने इसे राजनीतिक नहीं, बल्कि सनातन धर्म में आस्था रखने वाले सभी लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला बताया और कहा कि इस आस्था की रक्षा की जानी चाहिए।
आगे क्या
पंजाब कांग्रेस में एकजुटता की यह माँग ऐसे समय में आई है जब पार्टी राज्य में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने की कोशिश में है। आलोचकों का कहना है कि बिना आंतरिक सुलह के चुनावी मैदान में उतरना पार्टी के लिए और नुकसानदेह हो सकता है। वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।