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ई-कोर्ट्स मिशन से न्याय की रफ्तार तीन गुना: 2014 के बाद 1.25 करोड़ केस ऑनलाइन, 753 करोड़ पन्ने डिजिटल

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ई-कोर्ट्स मिशन से न्याय की रफ्तार तीन गुना: 2014 के बाद 1.25 करोड़ केस ऑनलाइन, 753 करोड़ पन्ने डिजिटल

सारांश

ई-कोर्ट्स मिशन ने भारत की न्यायपालिका को कागज़ से डिजिटल युग में पहुँचाया — 753 करोड़ पन्ने स्कैन, 1.25 करोड़ केस ऑनलाइन और 4.18 करोड़ वर्चुअल सुनवाई। 2014 के बाद फाइलिंग और निपटान दोनों तीन गुना बढ़े। तीसरे चरण में AI और OCR से न्याय और तेज़ होने की उम्मीद है।

मुख्य बातें

ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना के तहत 2014 के बाद मामलों की फाइलिंग और निपटान में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
अदालती रिकॉर्ड के 753 करोड़ से अधिक पन्नों को डिजिटाइज़ किया जा चुका है।
ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए 1.25 करोड़ से अधिक केस ऑनलाइन दाखिल; ई-पेमेंट से ₹1,404 करोड़ कोर्ट फीस और ₹75 करोड़ जुर्माना प्रोसेस।
7,553 स्थानों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग; देश भर में 4.18 करोड़ रिमोट सुनवाई आयोजित।
31 वर्चुअल कोर्ट को 11.33 करोड़ ट्रैफिक चालान मिले, कुल राशि ₹1,135.79 करोड़ ।
2024 में शुरू 'न्याय श्रुति' से आरोपी, गवाह और पुलिस अधिकारी वर्चुअली पेश होकर गवाही दे सकते हैं।

भारत की ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना ने देश की पारंपरिक कागज-आधारित न्यायिक व्यवस्था को एक डिजिटल, पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य न्याय-वितरण प्रणाली में रूपांतरित कर दिया है। सरकारी फैक्टशीट के आँकड़ों के अनुसार, 2014 के बाद से मामलों की फाइलिंग और निपटान दोनों में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है और अदालतें अब हर वर्ष दर्ज होने वाले मामलों से अधिक मामलों का निपटारा कर रही हैं। यह उपलब्धि एक अरब से अधिक नागरिकों की सेवा करने वाली न्यायपालिका के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम: तीन चरणों में बदलाव

पहले चरण (2011–2015) में 14,000 से अधिक अदालतों को कंप्यूटराइज़ किया गया और प्रौद्योगिकी-आधारित न्यायिक सेवाओं के लिए ज़रूरी नेटवर्क अवसंरचना तैयार की गई। यह पूरे मिशन की नींव थी।

दूसरे चरण (2015–2023) में नागरिक-केंद्रित सेवाओं का विस्तार हुआ — नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, ई-फाइलिंग और ई-सेवा केंद्र शुरू किए गए। इस चरण में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अवसंरचना को पाँच गुना से अधिक बढ़ाया गया, जिससे अदालती कार्यवाही तक वर्चुअल पहुँच में उल्लेखनीय सुधार आया।

परियोजना अब तीसरे चरण (2023–2027) में है। इसका लक्ष्य रिकॉर्ड का बड़े पैमाने पर डिजिटाइज़ेशन, वर्चुअल सुनवाई का अधिकतम उपयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एनालिटिक्स तथा ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाकर पेपरलेस एवं स्मार्ट अदालतें बनाना है।

डिजिटाइज़ेशन और ई-फाइलिंग के आँकड़े

सरकार द्वारा शुक्रवार, 7 अगस्त को जारी फैक्टशीट के अनुसार, अदालती रिकॉर्ड के 753 करोड़ से अधिक पन्नों को डिजिटल रूप दिया जा चुका है। यह डिजिटाइज़ेशन न केवल मूल्यवान दस्तावेज़ों को भौतिक क्षति से सुरक्षित करता है, बल्कि उनकी खोज और शोध को भी कहीं अधिक तेज़ और कुशल बनाता है।

ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 1.25 करोड़ से अधिक केस ऑनलाइन दाखिल किए जा चुके हैं — और यह सुविधा जिला अदालतों, उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय तीनों स्तरों पर उपलब्ध है। यह प्रणाली अंग्रेज़ी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं को भी सपोर्ट करती है, जिससे न्याय व्यवस्था अधिक समावेशी बनी है। ई-पेमेंट सिस्टम के ज़रिए कोर्ट फीस के रूप में ₹1,404 करोड़ और जुर्माने के रूप में ₹75 करोड़ के लेन-देन प्रोसेस किए जा चुके हैं।

वर्चुअल सुनवाई और लाइव-स्ट्रीमिंग

अदालतों, जेलों और अस्पतालों समेत 7,553 स्थानों पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। देश भर की अदालतों में इस माध्यम से 4.18 करोड़ से अधिक रिमोट सुनवाई हो चुकी हैं। गौरतलब है कि 11 उच्च न्यायालयों में अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग भी शुरू हो चुकी है, जो न्यायिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ट्रैफिक चालान के ऑनलाइन निपटारे के लिए 31 वर्चुअल कोर्ट स्थापित किए गए हैं, जिन्हें अब तक 11.33 करोड़ चालान प्राप्त हुए हैं और इनकी कुल राशि ₹1,135.79 करोड़ है।

'न्याय श्रुति' और अंतर-संचालनीय आपराधिक न्याय प्रणाली

'इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम' के अंतर्गत 2024 में शुरू की गई 'न्याय श्रुति' सुविधा एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके ज़रिए आरोपी, गवाह, पुलिस अधिकारी, सरकारी वकील, वैज्ञानिक विशेषज्ञ और कैदी — सभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वर्चुअली पेश होकर गवाही दे सकते हैं। इससे समय और संसाधनों की बचत के साथ-साथ मामलों के निपटारे में तेज़ी आई है।

आम जनता पर असर और आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में लंबित मामलों की संख्या न्यायिक सुधारों की सबसे बड़ी चुनौती रही है। हज़ारों ई-सेवा केंद्र डिजिटल खाई को पाटने में सहायक हो रहे हैं, ताकि जो नागरिक तकनीक से परिचित नहीं हैं, वे भी इन सेवाओं का लाभ उठा सकें। तीसरे चरण (2023–2027) के पूर्ण क्रियान्वयन के साथ, AI-संचालित केस प्रबंधन और OCR-आधारित रिकॉर्ड खोज प्रणाली से न्याय-वितरण और अधिक तेज़ होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी लंबित मामलों की संख्या में ठोस कमी है — जो अभी भी करोड़ों में बनी हुई है। डिजिटाइज़ेशन और वर्चुअल सुनवाई की संख्या बढ़ना ज़रूरी है, पर यह तभी सार्थक होगा जब न्यायाधीशों की रिक्तियाँ भरी जाएँ और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित हो। तीसरे चरण में AI और OCR का समावेश उत्साहजनक है, लेकिन इन तकनीकों की सटीकता और क्षेत्रीय भाषाओं में उनकी प्रभावशीलता की स्वतंत्र समीक्षा अभी बाकी है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना क्या है?
ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना भारत सरकार की एक बहु-चरणीय पहल है, जिसका उद्देश्य देश की न्यायपालिका को डिजिटल, पेपरलेस और तकनीक-संचालित बनाना है। इसके तहत अदालतों का कंप्यूटराइज़ेशन, ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई और रिकॉर्ड का डिजिटाइज़ेशन शामिल है।
2014 के बाद से ई-कोर्ट्स परियोजना का क्या असर हुआ है?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, 2014 के बाद से मामलों की फाइलिंग और निपटान दोनों में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई है। अदालतें अब हर वर्ष दर्ज होने वाले मामलों से अधिक मामलों का निपटारा कर रही हैं।
ई-फाइलिंग सिस्टम से आम नागरिकों को क्या फायदा हुआ है?
ई-फाइलिंग से नागरिक और वकील अब शिकायतें, लिखित बयान और अन्य दस्तावेज़ कहीं से भी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं। 30 जून 2026 तक 1.25 करोड़ से अधिक केस इस प्लेटफॉर्म के ज़रिए दाखिल हो चुके हैं और यह प्रणाली क्षेत्रीय भाषाओं को भी सपोर्ट करती है।
'न्याय श्रुति' सुविधा क्या है और इसे कब शुरू किया गया?
'न्याय श्रुति' 2024 में 'इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम' के तहत शुरू की गई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग-आधारित सुविधा है। इसके ज़रिए आरोपी, गवाह, पुलिस अधिकारी, सरकारी वकील और कैदी वर्चुअली पेश होकर गवाही दे सकते हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।
ई-कोर्ट्स परियोजना का तीसरा चरण क्या लाएगा?
तीसरे चरण (2023–2027) में AI, एनालिटिक्स और OCR तकनीकों को अपनाकर अदालतों को पूरी तरह पेपरलेस और स्मार्ट बनाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही रिकॉर्ड का बड़े पैमाने पर डिजिटाइज़ेशन और न्याय से जुड़ी संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना भी इस चरण का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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