एन. जगदीशन का खुलासा: चयन के दबाव ने छीना क्रिकेट का प्यार, रॉबिन उथप्पा ने बदली जिंदगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज एन. जगदीशन ने स्वीकार किया है कि उनके करियर में एक ऐसा दौर आया जब चयन का दबाव और रन के आंकड़ों की चिंता ने उनसे क्रिकेट का वह आनंद छीन लिया था, जो बचपन से उनकी प्रेरणा रहा था। भारत-ए बनाम ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच अनाधिकारिक टेस्ट श्रृंखला शुरू होने से पहले दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में जगदीशन ने यह बात खुलकर साझा की। पूर्व भारतीय बल्लेबाज रॉबिन उथप्पा के मार्गदर्शन ने उन्हें न सिर्फ तकनीकी रूप से, बल्कि मानसिक रूप से भी पूरी तरह बदल दिया।
दबाव की वह काली छाया
जगदीशन ने बताया कि वह हर घरेलू सीजन की शुरुआत से पहले अपने दिमाग में एक गणित बना लेते थे — पहले और दूसरे मैच में कितने रन बनाने हैं, ताकि सीजन के अंत तक आंकड़े इतने ठोस हों कि चयनकर्ता उन्हें नजरअंदाज न कर सकें। उन्होंने कहा, 'जब आप असल में ऐसी कोई योजना बनाते हैं, तो अक्सर चीजें योजना के मुताबिक नहीं होतीं और अचानक जब काम हिसाब से नहीं होता, तो आप पर बहुत दबाव आ जाता है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'एक बार जब दबाव हावी हो जाता है, तो आप अपना स्वाभाविक खेल नहीं खेल पाते और खेल का लुत्फ भी नहीं उठा पाते। खेल के लिए जो प्यार था, वह कहीं खो गया था।' गौरतलब है कि यह मानसिक संघर्ष उस समय हो रहा था जब जगदीशन के पास आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट भी नहीं था और भारतीय टीम में जगह बनाने का सपना सामने था।
उथप्पा का मार्गदर्शन — एक वरदान
टी20 विश्व कप 2007 जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य और चेन्नई सुपर किंग्स में साथी रहे रॉबिन उथप्पा जगदीशन के जीवन में मेंटर के रूप में आए। उथप्पा ने पहले जगदीशन के स्टांस और वजन के ट्रांसफर को लेकर कुछ सुझाव दिए थे। जगदीशन ने बताया, 'हम बस जिंदगी के बारे में बात कर रहे थे और अचानक मैंने उनसे कहा कि मैं सच में चाहता हूं कि कोई मुझे मेंटर करे।' उथप्पा की तत्काल सहमति और अगले करीब एक हफ्ते तक नियमित बातचीत ने जगदीशन की सोच और दृष्टिकोण को बुनियादी रूप से बदल दिया।
जगदीशन के अनुसार, 'अपना प्रोसेस बनाना, चीजें तैयार करना, रोजाना जिंदगी को किस नजरिए से देखना है — इन चीजों पर मेरी मजबूत नींव बनी।' उन्होंने कहा कि बीते 3 वर्षों में उथप्पा का उनकी जिंदगी में आना एक वरदान साबित हुआ है और आज वह उन्हें 'मेंटर' नहीं, बल्कि परिवार का सदस्य मानते हैं।
विजय हजारे ट्रॉफी का ऐतिहासिक प्रदर्शन
इस बदलाव का असर मैदान पर भी दिखा। विजय हजारे ट्रॉफी 2022/23 में जगदीशन ने 8 मुकाबलों में पाँच शतकों के साथ 830 रन बनाए। पाँचवाँ शतक लगाने के बाद उथप्पा ने खुद फोन कर पूछा कि उन्होंने अपनी बैटिंग में क्या बदलाव किया है। जगदीशन ने उन्हें उन्हीं की दी हुई सलाह के बारे में बताया, जिसे उन्होंने अपनाया था। इसके बाद रणजी ट्रॉफी 2023/24 में 816 रन और 2024/25 में 674 रन बनाकर जगदीशन ने इंडिया 'ए' और टारगेटेड प्लेयर्स पूल में जगह बनाई।
भारतीय टीम से अचानक बुलावा
साल 2025 में जगदीशन कोयंबटूर में अपने घर पर लंच कर रहे थे, तभी एक बीसीसीआई अधिकारी ने पासपोर्ट की जानकारी के लिए फोन किया। मैनचेस्टर में दाहिने पैर में फ्रैक्चर के कारण ऋषभ पंत की जगह उन्हें लंदन के ओवल में होने वाले पाँचवें टेस्ट के लिए बुलाया जा सकता था। जगदीशन ने याद किया, 'इससे पहले कि मुझे कुछ पता चलता, मैं भारतीय टीम का हिस्सा बन चुका था।'
हालाँकि प्लेइंग इलेवन में ध्रुव जुरेल को शामिल किया गया, लेकिन मोहम्मद सिराज, आकाश दीप और प्रसिद्ध कृष्णा की अगुवाई में भारतीय तेज गेंदबाजों ने अंतिम दिन शानदार वापसी कर एक यादगार जीत हासिल की। जगदीशन ने कहा, 'यह अविश्वसनीय था — शुरू से अंत तक रोमांचक रहे मैच का हिस्सा बनना एक ऐसा पल है जिसे मैं लंबे समय तक याद रखूंगा।'
आगे की राह और जर्सी का सपना
जगदीशन के घर पर फ्रेम में भारतीय टेस्ट जर्सी लगी हुई है, जो उनके और उनके पिता के लिए गर्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा, 'जो जर्सी मुझे पहली बार मिली थी, वह मेरे दिल के बहुत करीब रहेगी। मेरी इच्छा होती है कि जब भी टीम कोई सीरीज खेले, तो मैं उस सेटअप का हिस्सा रहूं।' भारत-ए बनाम ऑस्ट्रेलिया-ए की इस श्रृंखला में जगदीशन के लिए यह साबित करने का एक और मौका है कि वह राष्ट्रीय टीम के लिए तैयार हैं।