21 सितंबर 2026
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सीबीआई ने ₹40 लाख रिश्वत मामले में फरार CGST एडिशनल कमिश्नर को ऋषिकेश से दबोचा

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सीबीआई ने ₹40 लाख रिश्वत मामले में फरार CGST एडिशनल कमिश्नर को ऋषिकेश से दबोचा

सारांश

₹40 लाख की कथित रिश्वत में फँसे सीजीएसटी एडिशनल कमिश्नर विनय कुमार कंथेटी बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश ठुकराकर फरार हो गए थे — पर सीबीआई ने उन्हें ऋषिकेश में ढूंढ निकाला। एक सीनियर टैक्स अधिकारी की यह उड़ान और गिरफ्तारी जवाबदेही की असल परीक्षा है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 21 सितंबर 2026 को ऋषिकेश से सीजीएसटी एडिशनल कमिश्नर विनय कुमार कंथेटी को गिरफ्तार किया।
कंथेटी 16 सितंबर से फरार थे; बॉम्बे हाई कोर्ट के सरेंडर आदेश की अनदेखी की थी।
मूल मामला महाराष्ट्र के रायगढ़ की एक फर्म से ₹1.50 करोड़ की माँग से शुरू हुआ, जो बाद में ₹40 लाख पर तय हुई।
27 अगस्त 2026 को सीबीआई के जाल में प्राइवेट व्यक्ति नरिंदर राजपूत रिश्वत लेते पकड़ा गया।
सह-आरोपी राकेश कुमार सिन्हा (सुपरिटेंडेंट) और नरिंदर राजपूत पहले से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं।
मामला प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 7 के तहत दर्ज है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 21 सितंबर 2026 को उत्तराखंड के ऋषिकेश से महाराष्ट्र काडर के सीजीएसटी एडिशनल कमिश्नर विनय कुमार कंथेटी को गिरफ्तार किया, जो ₹40 लाख की कथित रिश्वत मामले में 16 सितंबर से फरार चल रहे थे। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द कर सरेंडर का आदेश दिया था, जिसका पालन करने के बजाय वे भूमिगत हो गए थे।

मामले का पूरा घटनाक्रम

सीबीआई की मुंबई स्थित एंटी-करप्शन ब्रांच ने 26 अगस्त 2026 को प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 7 के तहत यह मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सीजीएसटी रायगढ़ (खंडेश्वर) के एक सुपरिटेंडेंट ने महाराष्ट्र के रायगढ़ की एक फर्म से जुड़ी कार्यवाही के सिलसिले में पहले ₹1.50 करोड़ की रिश्वत माँगी, जिसे बाद में घटाकर ₹40 लाख कर दिया गया।

सीबीआई ने 27 अगस्त 2026 को जाल बिछाया, जिसमें एक प्राइवेट व्यक्ति व कस्टम्स हाउस एजेंट नरिंदर राजपूत को सीजीएसटी रायगढ़ के सुपरिटेंडेंट और एडिशनल कमिश्नर की ओर से कथित तौर पर ₹40 लाख लेते हुए पकड़ा गया। एजेंसी ने तीनों आरोपियों — कंथेटी, सुपरिटेंडेंट राकेश कुमार सिन्हा और राजपूत — को गिरफ्तार कर ठाणे की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेश किया।

निचली अदालत और हाई कोर्ट के बीच कानूनी खींचतान

स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 28 अगस्त 2026 के आदेश में सीबीआई की पाँच दिन की पुलिस कस्टडी की माँग खारिज कर दी, गिरफ्तारियों को गैरकानूनी करार दिया और तीनों को जमानत पर रिहा कर दिया। सीबीआई ने इस आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने एजेंसी की अपील स्वीकार करते हुए स्पेशल कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और तीनों आरोपियों को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा। अदालत ने रिकॉर्ड जाँचने के बाद पाया कि गिरफ्तारी के कारण आरोपी को लिखित रूप में सूचित किए गए थे और परिवार के सदस्यों व वकीलों को भी विधिवत जानकारी दी गई थी।

कंथेटी का फरार होना और गिरफ्तारी

हाई कोर्ट के आदेश के बाद सुपरिटेंडेंट सिन्हा और नरिंदर राजपूत को दो दिन की सीबीआई हिरासत में लिया गया और बाद में कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वे दोनों अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।

हालाँकि, एडिशनल कमिश्नर कंथेटी 16 सितंबर को हाई कोर्ट का आदेश मानने के बजाय फरार हो गए। सीबीआई की टीम ने उन्हें अंततः उत्तराखंड के ऋषिकेश में ट्रेस किया और 21 सितंबर 2026 को हिरासत में ले लिया।

भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों पर असर

यह मामला इस लिहाज से महत्त्वपूर्ण है कि एक वरिष्ठ कर अधिकारी द्वारा अदालती आदेश की अनदेखी और फरार होने की घटना व्यवस्था में जवाबदेही के प्रश्न उठाती है। गौरतलब है कि सीजीएसटी जैसे केंद्रीय कर विभागों में भ्रष्टाचार के मामलों में सीबीआई की कार्रवाई हाल के वर्षों में तेज हुई है।

आगे कंथेटी को स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेश किए जाने की संभावना है, जहाँ हिरासत और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत जवाबदेही की खामियों का प्रतीक है। यह मामला इसलिए भी उल्लेखनीय है कि निचली स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने गिरफ्तारियों को ही गैरकानूनी करार दे दिया था — जिसे हाई कोर्ट ने पलटा। अदालतों के बीच इस टकराव ने आरोपी को भागने का अवसर दिया, जो प्रक्रियागत देरी के खतरों को उजागर करता है। सीबीआई का त्वरित ऑपरेशन सराहनीय है, पर असली सवाल यह है कि ऐसे मामलों में अदालती स्तर पर समन्वय की कमी को कैसे दूर किया जाए।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने विनय कुमार कंथेटी को किस मामले में गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने कंथेटी को ₹40 लाख की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सीजीएसटी रायगढ़ के अधिकारियों ने महाराष्ट्र की एक फर्म से जुड़ी कार्यवाही में पहले ₹1.50 करोड़ और बाद में ₹40 लाख की रिश्वत माँगी थी।
कंथेटी कितने समय से फरार थे और उन्हें कहाँ से पकड़ा गया?
कंथेटी 16 सितंबर 2026 से फरार थे और सीबीआई ने 21 सितंबर 2026 को उन्हें उत्तराखंड के ऋषिकेश से गिरफ्तार किया। बॉम्बे हाई कोर्ट के सरेंडर आदेश का पालन न करके वे भूमिगत हो गए थे।
इस मामले में अन्य आरोपी कौन हैं और उनकी स्थिति क्या है?
इस मामले में दो अन्य आरोपी हैं — सीजीएसटी रायगढ़ के सुपरिटेंडेंट राकेश कुमार सिन्हा और प्राइवेट व्यक्ति नरिंदर राजपूत। दोनों वर्तमान में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं।
स्पेशल सीबीआई कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट के बीच क्या विवाद हुआ?
ठाणे की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने 28 अगस्त 2026 को गिरफ्तारियों को गैरकानूनी मानते हुए आरोपियों को जमानत दे दी थी। सीबीआई की अपील पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया और तीनों को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा।
यह मामला किस कानून के तहत दर्ज है और कब दर्ज हुआ?
यह मामला प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 7 के तहत 26 अगस्त 2026 को सीबीआई की मुंबई एंटी-करप्शन ब्रांच ने दर्ज किया था। अगले दिन 27 अगस्त को जाल बिछाकर रिश्वत लेते पकड़ा गया।
राष्ट्र प्रेस
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