बॉम्बे हाई कोर्ट ने तीन CGST आरोपियों को CBI कस्टडी में भेजा, ₹40 लाख रिश्वत कांड में बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 सितंबर 2026 को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए CGST भ्रष्टाचार मामले में तीनों आरोपियों को दो दिन की CBI हिरासत में भेजने का आदेश दिया। यह आदेश ठाणे की स्पेशल CBI कोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए आया, जिसमें गिरफ्तारियों को गैर-कानूनी ठहराकर आरोपियों को जमानत दे दी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
CBI की मुंबई एंटी-करप्शन ब्रांच ने 26 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत यह मामला दर्ज किया। शिकायत के अनुसार, रायगढ़ के खांडेश्वर में तैनात CGST सुपरिटेंडेंट राकेश कुमार सिन्हा ने शिकायतकर्ता की फर्म से जुड़ी कार्यवाही के सिलसिले में कथित तौर पर पहले ₹1.50 करोड़ की रिश्वत माँगी, जिसे बाद में घटाकर ₹40 लाख कर दिया गया।
जाल और गिरफ्तारी
CBI ने 27 अगस्त 2026 को एक ट्रैप ऑपरेशन चलाया, जिसमें निजी व्यक्ति एवं कस्टम्स हाउस एजेंट नरिंदर राजपूत को ₹40 लाख की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। आरोप है कि वह यह राशि CGST सुपरिटेंडेंट राकेश कुमार सिन्हा और CGST एडिशनल कमिश्नर विनय कुमार कंथेटी (IRS 2009 बैच) की ओर से प्राप्त कर रहा था। इसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर ठाणे की स्पेशल CBI कोर्ट में पेश किया गया।
स्पेशल कोर्ट का विवादित आदेश
CBI ने पाँच दिन की पुलिस हिरासत की माँग की थी। परंतु स्पेशल CBI कोर्ट ने 28 अगस्त 2026 के अपने आदेश में हिरासत की माँग खारिज कर दी, गिरफ्तारियों को अवैध करार दिया और तीनों आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया। यह आदेश CBI के लिए बड़ा झटका था।
हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
CBI ने क्रिमिनल रिविजन एप्लीकेशन नंबर 460/2026 दाखिल कर स्पेशल कोर्ट के आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा के बाद पाया कि गिरफ्तारी के आधार आरोपियों को बता दिए गए थे और संबंधित परिवार के सदस्यों व वकीलों को विधिवत सूचित कर दिया गया था। इस आधार पर हाई कोर्ट ने स्पेशल कोर्ट के आदेश को रद्द कर CBI की याचिका मंजूर की।
आगे की स्थिति
हाई कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद राकेश कुमार सिन्हा और नरिंदर राजपूत को CBI की हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई है। CGST एडिशनल कमिश्नर विनय कुमार कंथेटी अभी तक फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश जारी है। जाँच एजेंसी मामले के बड़े नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।