कोलकाता सड़क नामकरण समिति: कार्तिक महाराज बोले — फैसला सामूहिक, विशेषज्ञों से होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
पद्म श्री से सम्मानित कार्तिक महाराज ने 21 सितंबर 2026 को कोलकाता नगर निगम में 'सड़क नामकरण समिति' के चेयरमैन के रूप में औपचारिक रूप से पदभार संभाला और स्पष्ट किया कि सड़कों के नाम बदलने का कोई भी फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि इतिहासकारों, धर्मगुरुओं और शिक्षाविदों के सामूहिक विचार-विमर्श का परिणाम होगा। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित यह समिति कोलकाता की सड़कों के नामों को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से पुनर्मूल्यांकन करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
पदभार ग्रहण और नया कार्यालय
कोलकाता नगर निगम में मेयर-इन-काउंसिल के पूर्व सदस्य देबब्रत मजूमदार के कक्ष को नवीकृत कर कार्तिक महाराज के लिए कार्यालय का रूप दिया गया है। उन्होंने सोमवार, 21 सितंबर को इस नए कार्यालय का दौरा कर औपचारिक रूप से जिम्मेदारी संभाली। पदभार ग्रहण के बाद उन्होंने राज्य सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और धर्म से जुड़े विषयों पर चर्चा का यह अवसर स्वागत योग्य है।
समिति की कार्यप्रणाली और संरचना
कार्तिक महाराज ने स्पष्ट किया कि समिति में किसी राजनीतिक व्यक्ति को नहीं रखा गया है। उनके अनुसार, समिति में धर्म, भारतीय इतिहास और संस्कृति के विशेषज्ञ शामिल हैं। उन्होंने कहा, 'सड़क का नाम बदलने या नामकरण जैसे विषयों पर फैसला किसी एक व्यक्ति के स्तर पर नहीं होगा, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सड़क नामकरण के विषय पर राजनीतिक विमर्श तेज है।
राजनीतिक पक्षपात के सवाल पर स्पष्टीकरण
जब उनसे पूछा गया कि कोलकाता की कुछ सड़कों के नाम पूर्ववर्ती राजनीतिक दलों और उनके नेताओं से जुड़े हैं, तो उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य किसी दल-विशेष के पक्ष या विपक्ष में काम करना नहीं है। उनके अनुसार, सड़क के नाम का आकलन उसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक विचारधारा की कसौटी पर। गौरतलब है कि यह टिप्पणी उस समय आई है जब विपक्षी दल राज्य सरकार पर सड़क नामकरण में सांस्कृतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाते रहे हैं।
'विश्व बांग्ला सरणी' नाम बदलने का प्रस्ताव
कार्तिक महाराज ने बताया कि तीन-चार लोगों ने उनके सामने यह सुझाव रखा है कि 'विश्व बांग्ला सरणी' का नाम बदलकर किसी ऐसे महापुरुष के नाम पर रखा जाए, जिन्हें वे 'विश्व गुरु' के रूप में देखते हैं। हालाँकि, उन्होंने इस प्रस्ताव को तत्काल स्वीकार या अस्वीकार करने से परहेज किया और कहा कि इस पर समिति के स्तर पर विचार-विमर्श के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। यह नाम अब तक सत्तारूढ़ दल की पहचान से जोड़कर देखा जाता रहा है, इसलिए इस प्रस्ताव के राजनीतिक निहितार्थ भी हैं।
भारतीय संस्कृति और धर्म का संदर्भ
अपनी नई भूमिका के व्यापक परिप्रेक्ष्य को रेखांकित करते हुए कार्तिक महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख किया और कहा कि गीता के प्रथम अध्याय के प्रथम श्लोक का प्रथम शब्द 'धर्म' है, जो भारतीय संस्कृति की मूल आधारशिला है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस रुख का भी समर्थन किया, जिसमें वे 'भारत' नाम और भारतीय सांस्कृतिक पहचान पर जोर देते रहे हैं। आगे चलकर समिति की सिफारिशें कोलकाता नगर निगम को भेजी जाएंगी, जहाँ अंतिम निर्णय संस्थागत प्रक्रिया से होगा।