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सुहरावर्दी एवेन्यू नाम बदलने पर टीएमसी का अलर्ट: 'इतिहास मिटाने से पहले सोचें'

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सुहरावर्दी एवेन्यू नाम बदलने पर टीएमसी का अलर्ट: 'इतिहास मिटाने से पहले सोचें'

सारांश

कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने पर TMC के अपने विधायक बँटे नज़र आए। कुणाल घोष और मदन मित्रा ने सरकार के अधिकार को स्वीकार करते हुए भी इतिहास को पूरी तरह मिटाने से बचने की सलाह दी — पार्टी में आंतरिक असहमति का दुर्लभ संकेत।

मुख्य बातें

सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने पर कोलकाता में राजनीतिक बहस तेज।
TMC विधायक कुणाल घोष ने कहा — नाम बदलने का अधिकार है, लेकिन 'इतिहास को नए सिरे से लिखने' पर अलग-अलग नज़रिए हो सकते हैं।
TMC विधायक मदन मित्रा ने नियमों और परंपराओं का ध्यान रखने की अपील की।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले कहा था कि कुछ पुराने नाम हिंसा और खून-खराबे के ऐतिहासिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
TMC के बैंक खाते को कथित तौर पर लॉक किए जाने की खबरों पर मदन मित्रा ने कहा — पार्टी के कार्य सामान्य रूप से जारी हैं।

पश्चिम बंगाल में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने के निर्णय ने कोलकाता में राजनीतिक बहस को नई धार दे दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस टिप्पणी के बाद — जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ पुराने नाम हिंसा, खून-खराबे और देशभक्ति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को दर्शाते हैं — तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेताओं ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। नेताओं का कहना है कि नाम बदलने का अधिकार सरकार के पास है, लेकिन इतिहास को पूरी तरह मिटाने की कोशिश विभिन्न वर्गों में अलग-अलग प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकती है।

कुणाल घोष का बयान: दृष्टिकोण का विषय

TMC विधायक कुणाल घोष ने इस मुद्दे पर कहा, 'यदि किसी नाम के साथ इतिहास में कोई नकारात्मक पहलू जुड़ा रहा है तो उसका समर्थन नहीं किया जा सकता, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसे नाम इतिहास और अतीत का हिस्सा होते हैं। सरकार को नाम बदलने का अधिकार है, लेकिन इतिहास को पूरी तरह नए सिरे से लिखने का प्रयास अलग-अलग लोगों द्वारा अलग नजरिए से देखा जा सकता है।'

घोष ने विशेष रूप से सुहरावर्दी एवेन्यू के प्रकरण पर कहा कि 'किसी भी नाम के पीछे एक ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ होता है, जिसे समझना आवश्यक है। पुराने नाम का अपना ऐतिहासिक महत्व था, जबकि नए नाम का भी सम्मान किया जाना चाहिए।' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसे निर्णय सोच-समझकर और व्यापक दृष्टिकोण के साथ लिए जाने चाहिए।

मदन मित्रा की राय: नियम और परंपरा का ध्यान रखें

TMC विधायक मदन मित्रा ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'नगर निगम के नियमों के अनुसार कई बार ऐसे नाम बदले गए हैं जो किसी क्षेत्र विशेष से जुड़े थे, लेकिन किसी व्यक्ति के नाम पर पहले से मौजूद सड़कों के नाम बदलने को लेकर अलग स्थिति हो सकती है। यदि सरकार ने कोई निर्णय लिया है तो उसका सम्मान किया जाएगा, लेकिन इस तरह के मामलों में नियमों और परंपराओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।'

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सड़कों और स्थानों के नाम बदलने का मुद्दा बार-बार राजनीतिक विवाद का केंद्र बनता रहा है। आलोचकों का कहना है कि नाम परिवर्तन अक्सर ऐतिहासिक विमर्श की बजाय राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित होते हैं।

TMC के बैंक खाते पर भी मित्रा की सफाई

इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के बैंक खाते को कथित तौर पर लॉक किए जाने की खबरों पर भी मदन मित्रा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट किया, 'पार्टी को इस मामले में कोई विशेष चिंता नहीं है। जिन लोगों को भुगतान किया जाना था, उन्हें पहले ही भुगतान किया जा चुका है और पार्टी अपने कार्यों को सामान्य रूप से जारी रखे हुए है।'

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ दूर नहीं हैं और पहचान की राजनीति एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। TMC नेताओं के सतर्क बयान यह संकेत देते हैं कि पार्टी इस मुद्दे पर एकमत नहीं है और आंतरिक स्तर पर भी बहस जारी है। सुहरावर्दी एवेन्यू के नाम परिवर्तन पर अंतिम प्रशासनिक अधिसूचना की प्रतीक्षा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ उनके ही नेता 'व्यापक दृष्टिकोण' की बात कर रहे हैं। सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलना महज़ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि पहचान की राजनीति का हिस्सा है जो पश्चिम बंगाल में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की संवेदनशील ज़मीन पर खड़ा है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि TMC के भीतर यह बयानबाज़ी चुनावी गणित से प्रेरित है, न कि ऐतिहासिक चेतना से। बिना स्पष्ट नीति के नाम परिवर्तन की यह प्रवृत्ति हर दल — BJP और TMC दोनों — के लिए एक राजनीतिक औज़ार बन चुकी है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम क्यों बदला गया?
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि कुछ पुराने नाम हिंसा और खून-खराबे के ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़े हैं, जो इस निर्णय की पृष्ठभूमि बताती है।
TMC विधायक कुणाल घोष ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
कुणाल घोष ने कहा कि नाम बदलने का अधिकार सरकार के पास है, लेकिन इतिहास को पूरी तरह नए सिरे से लिखने का प्रयास अलग-अलग लोगों द्वारा अलग नज़रिए से देखा जा सकता है। उन्होंने ऐसे निर्णयों में सोच-समझकर और व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी।
मदन मित्रा ने नाम परिवर्तन पर क्या रुख अपनाया?
TMC विधायक मदन मित्रा ने कहा कि यदि सरकार ने निर्णय लिया है तो उसका सम्मान किया जाएगा, लेकिन नियमों और परंपराओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने व्यक्ति के नाम पर पहले से मौजूद सड़कों का नाम बदलने को अलग और संवेदनशील मामला बताया।
TMC के बैंक खाते को लॉक किए जाने की खबरें क्या हैं?
खबरों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के बैंक खाते को कथित तौर पर लॉक किया गया है। हालाँकि मदन मित्रा ने स्पष्ट किया कि पार्टी को कोई विशेष चिंता नहीं है और जिन्हें भुगतान होना था वह हो चुका है।
पश्चिम बंगाल में सड़कों के नाम बदलने का विवाद नया नहीं है — पहले भी ऐसा हुआ है?
हाँ, पश्चिम बंगाल में सड़कों और स्थानों के नाम बदलने का मुद्दा पहले भी राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे फैसले अक्सर ऐतिहासिक विमर्श की बजाय राजनीतिक एजेंडे से प्रेरित होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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