सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदला, टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने नगर निगम के नियमों पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता नगर निगम द्वारा सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड किए जाने के निर्णय पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक मदन मित्रा ने 21 जून 2026 को नगर निगम के नामकरण नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के नाम पर पहले से रखी गई सड़क का नाम बदलने की कोई स्पष्ट प्रक्रिया नगर निगम में मौजूद नहीं है।
मदन मित्रा ने क्या कहा
TMC विधायक मदन मित्रा ने नगर निगम के पूर्व उदाहरण का हवाला देते हुए कहा, 'हम सिर्फ इतना कह रहे हैं कि नगर निगम के नियमों के अनुसार, जैसे चौरंगी रोड का नाम बदलकर जवाहरलाल नेहरू रोड कर दिया गया, क्योंकि 'चौरंगी' किसी व्यक्ति का नाम नहीं था, बल्कि एक इलाके का नाम था। जहां तक हमें जानकारी है, नगर निगम में पहले से किसी व्यक्ति के नाम पर रखे गए रास्तों के नाम बदलने का कोई स्पष्ट नियम नहीं है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने कोई निर्णय लिया है तो वह स्वीकार्य है, लेकिन नियमों में स्पष्टता आवश्यक है।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता नगर निगम के इस निर्णय की सराहना की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि यह कदम 'ऐतिहासिक गलती को सुधारने' की दिशा में उठाया गया है। उन्होंने लिखा, 'मैं कोलकाता नगर निगम द्वारा लिए गए इस ऐतिहासिक निर्णय की सराहना करता हूं, जो पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर लिया गया। इससे ऐतिहासिक गलती को सुधारने में मदद मिलेगी। सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम अब गोपाल मुखर्जी रोड होगा।'
अधिकारी ने आगे कहा, 'दशकों तक शहर की एक प्रमुख सड़क ऐसे व्यक्ति के नाम पर रही जिसने राज्य शक्ति का गलत इस्तेमाल किया और राजनीतिक लाभ के लिए निर्दोष लोगों की हत्या कराई। अब उस सड़क का नाम गोपाल मुखर्जी के नाम पर रखकर ऐतिहासिक न्याय स्थापित किया गया है।' उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल को अब अपने 'सच्चे नायकों' को याद करना और सम्मान देना चाहिए।
निर्णय का संदर्भ
यह निर्णय पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर लिया गया, जो इसे प्रतीकात्मक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है। गौरतलब है कि सड़कों के नामकरण और नाम परिवर्तन का मुद्दा भारत में बार-बार राजनीतिक बहस का केंद्र बनता रहा है — चाहे वह उत्तर प्रदेश में हो, दिल्ली में या अब कोलकाता में। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ TMC और विपक्षी दलों के बीच ऐतिहासिक स्मृति और सार्वजनिक स्थानों के नामकरण को लेकर तनाव पहले से बना हुआ है।
आगे क्या होगा
मदन मित्रा के बयान के बाद यह देखना होगा कि TMC आधिकारिक रूप से इस निर्णय के विरोध में कोई कदम उठाती है या नहीं। नगर निगम के नियमों की व्याख्या और उनकी स्पष्टता पर बहस जारी रहने की संभावना है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले दिनों में कोलकाता की राजनीति में एक अहम मुद्दा बना रह सकता है।