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सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रखने पर TMC सांसद सौगत रॉय का विरोध, बोले — यह विभाजन को बल देगा

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सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रखने पर TMC सांसद सौगत रॉय का विरोध, बोले — यह विभाजन को बल देगा

सारांश

कोलकाता में 1933 से चली आ रही सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रखने पर TMC सांसद सौगत रॉय ने विरोध का बिगुल बजाया। उनका कहना है कि यह कदम ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी करता है और सामाजिक विभाजन को गहरा करता है।

मुख्य बातें

कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रखा गया।
TMC सांसद सौगत रॉय ने इसे विवादास्पद बताया, कहा — यह विभाजन को बल देगा।
रॉय के अनुसार, सुहरावर्दी 1933 से इस सड़क के नाम से जुड़े थे और वे कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति थे।
रॉय ने BJP पर लोटस अभियान और ED/CBI के ज़रिये क्षेत्रीय दलों को तोड़ने का आरोप लगाया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात में दलबदल विरोधी कानून लागू करने की माँग रखी गई।
NEET परीक्षा के सफल आयोजन पर रॉय ने संतोष व्यक्त किया।

कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रख दिया गया है, जिस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कदम को विवादास्पद और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया। 22 जून 2026 को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रॉय ने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी करता है।

सुहरावर्दी कौन थे — ऐतिहासिक संदर्भ

सौगत रॉय ने स्पष्ट किया कि सुहरावर्दी एवेन्यू का यह नाम 1933 से चला आ रहा था। उनके अनुसार, जिस सुहरावर्दी के नाम पर यह सड़क थी, वे एक चिकित्सक थे और कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) भी रह चुके थे। रॉय ने यह भी कहा कि आज़ादी के समय हुए दंगों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। गौरतलब है कि एक अन्य सुहरावर्दी — हुसैन शहीद सुहरावर्दीपश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, जिनका नाम अक्सर विभाजन-कालीन घटनाओं से जोड़ा जाता है। रॉय ने इन दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि नाम बदलने से पहले इस ऐतिहासिक तथ्य पर विचार होना चाहिए था।

गोपाल मुखर्जी के नाम पर विवाद

रॉय ने गोपाल मुखर्जी को एक बाहुबली व्यक्तित्व बताया और कहा कि वे कांग्रेस के समर्थक थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अचानक इस नाम को आगे क्यों किया गया। उनके अनुसार, यह कदम सामाजिक सौहार्द के बजाय विभाजन की भावना को मज़बूत करता है और इसलिए TMC इसे उचित नहीं मानती।

क्षेत्रीय दलों में टूट और BJP की रणनीति पर बयान

नामकरण विवाद के अलावा, सौगत रॉय ने क्षेत्रीय दलों में बढ़ती राजनीतिक दरारों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों में टूट की संभावना और अधिक बढ़ सकती है। रॉय ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति रही है कि वह लोटस अभियान तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के डर का इस्तेमाल कर नेताओं को अपनी ओर खींचती है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।

लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात और दलबदल विरोधी कानून

रॉय ने बताया कि उनकी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात हुई, जिसमें बिरला ने धैर्यपूर्वक उनकी बात सुनी। उन्होंने माँग की कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर दलबदल विरोधी कानून लागू होना चाहिए और इस संबंध में व्यक्तिगत याचिका भी दाखिल की गई है। विधायकों के आपसी विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विलय केवल पार्टी-से-पार्टी स्तर पर ही संभव है, न कि विधायक-से-विधायक।

NEET परीक्षा पर TMC सांसद का रुख

रॉय ने NEET परीक्षा के सफलतापूर्वक आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस बार कोई बड़ा विवाद या घोटाला सामने नहीं आया और परीक्षा रद्द नहीं हुई, जो छात्रों के भविष्य के लिहाज़ से राहत की बात है। आने वाले दिनों में सुहरावर्दी एवेन्यू के नामकरण विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे दंगों से जुड़े नहीं थे, ऐतिहासिक सटीकता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है — लेकिन इस पर स्वतंत्र इतिहासकारों की राय भी ज़रूरी है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच पहचान की राजनीति तेज़ है, और नामकरण जैसे प्रतीकात्मक कदम अक्सर चुनावी ध्रुवीकरण के औज़ार बन जाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि गोपाल मुखर्जी को 'बाहुबली' कहना और कांग्रेस-समर्थक बताना — TMC की ओर से — खुद एक राजनीतिक संदेश है, जो शायद नामकरण से ज़्यादा बड़ा विवाद है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम क्यों बदला गया?
कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रखा गया है। नाम बदलने के पीछे सरकारी कारण अभी तक आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किए गए हैं, और यह निर्णय राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है।
सौगत रॉय ने सुहरावर्दी एवेन्यू नामकरण पर क्या कहा?
TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि सुहरावर्दी 1933 से इस सड़क के नाम से जुड़े थे, वे एक चिकित्सक और कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति थे, और दंगों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने गोपाल मुखर्जी के नाम को आगे करने को विभाजनकारी कदम बताया।
TMC सांसद ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि BJP लोटस अभियान और ED/CBI के डर का इस्तेमाल कर क्षेत्रीय दलों के नेताओं को अपनी ओर खींचती है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के विरुद्ध बताया।
दलबदल विरोधी कानून को लेकर TMC की क्या माँग है?
सौगत रॉय ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात में माँग की कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर दलबदल विरोधी कानून लागू किया जाए। उन्होंने इस संबंध में व्यक्तिगत याचिका भी दाखिल की है।
NEET परीक्षा पर सौगत रॉय का क्या रुख है?
सौगत रॉय ने NEET परीक्षा के सफलतापूर्वक आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कोई बड़ा घोटाला नहीं हुआ और परीक्षा रद्द नहीं हुई, जो छात्रों के भविष्य के लिए राहत की बात है।
राष्ट्र प्रेस
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