सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रखने पर TMC सांसद सौगत रॉय का विरोध, बोले — यह विभाजन को बल देगा
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रख दिया गया है, जिस पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कदम को विवादास्पद और सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया। 22 जून 2026 को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रॉय ने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी करता है।
सुहरावर्दी कौन थे — ऐतिहासिक संदर्भ
सौगत रॉय ने स्पष्ट किया कि सुहरावर्दी एवेन्यू का यह नाम 1933 से चला आ रहा था। उनके अनुसार, जिस सुहरावर्दी के नाम पर यह सड़क थी, वे एक चिकित्सक थे और कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति (वाइस चांसलर) भी रह चुके थे। रॉय ने यह भी कहा कि आज़ादी के समय हुए दंगों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। गौरतलब है कि एक अन्य सुहरावर्दी — हुसैन शहीद सुहरावर्दी — पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, जिनका नाम अक्सर विभाजन-कालीन घटनाओं से जोड़ा जाता है। रॉय ने इन दोनों के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि नाम बदलने से पहले इस ऐतिहासिक तथ्य पर विचार होना चाहिए था।
गोपाल मुखर्जी के नाम पर विवाद
रॉय ने गोपाल मुखर्जी को एक बाहुबली व्यक्तित्व बताया और कहा कि वे कांग्रेस के समर्थक थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अचानक इस नाम को आगे क्यों किया गया। उनके अनुसार, यह कदम सामाजिक सौहार्द के बजाय विभाजन की भावना को मज़बूत करता है और इसलिए TMC इसे उचित नहीं मानती।
क्षेत्रीय दलों में टूट और BJP की रणनीति पर बयान
नामकरण विवाद के अलावा, सौगत रॉय ने क्षेत्रीय दलों में बढ़ती राजनीतिक दरारों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में विभिन्न क्षेत्रीय दलों में टूट की संभावना और अधिक बढ़ सकती है। रॉय ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की रणनीति रही है कि वह लोटस अभियान तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के डर का इस्तेमाल कर नेताओं को अपनी ओर खींचती है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।
लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात और दलबदल विरोधी कानून
रॉय ने बताया कि उनकी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात हुई, जिसमें बिरला ने धैर्यपूर्वक उनकी बात सुनी। उन्होंने माँग की कि पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर दलबदल विरोधी कानून लागू होना चाहिए और इस संबंध में व्यक्तिगत याचिका भी दाखिल की गई है। विधायकों के आपसी विलय की चर्चाओं को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विलय केवल पार्टी-से-पार्टी स्तर पर ही संभव है, न कि विधायक-से-विधायक।
NEET परीक्षा पर TMC सांसद का रुख
रॉय ने NEET परीक्षा के सफलतापूर्वक आयोजन पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस बार कोई बड़ा विवाद या घोटाला सामने नहीं आया और परीक्षा रद्द नहीं हुई, जो छात्रों के भविष्य के लिहाज़ से राहत की बात है। आने वाले दिनों में सुहरावर्दी एवेन्यू के नामकरण विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।