6 नवंबर 2026
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कलकत्ता उच्च न्यायालय आज KMC वार्ड परिसीमन पर सुनाएगा फैसला, चुनाव कार्यक्रम पर टिकी नज़र

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कलकत्ता उच्च न्यायालय आज KMC वार्ड परिसीमन पर सुनाएगा फैसला, चुनाव कार्यक्रम पर टिकी नज़र

सारांश

कोलकाता नगर निगम के वार्ड परिसीमन पर कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ आज फैसला सुनाएगी। वार्डों की संख्या 144 से 209 करने के इस फैसले को CPI(M) ने चुनौती दी है। अदालत के निर्णय से तय होगा कि दिसंबर में KMC चुनाव होंगे या नहीं।

मुख्य बातें

कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ 6 नवंबर 2026 को KMC वार्ड परिसीमन मामले में फैसला सुनाएगी।
KMC में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 किए जाने के निर्णय को CPI(M) नेता दीपू दास ने चुनौती दी है।
खंडपीठ ने WBSEC को तब तक KMC चुनाव कार्यक्रम घोषित करने से रोका है जब तक फैसला नहीं आता।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रॉय की पीठ ने की।
KMC चुनाव दिसंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना; नतीजे जनवरी 2027 के पहले सप्ताह में अपेक्षित।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ 6 नवंबर 2026 को कोलकाता नगर निगम (KMC) के वार्ड परिसीमन को चुनौती देने वाले मामले में अपना निर्णय सुनाएगी। इस फैसले पर पश्चिम बंगाल के नगर निकाय चुनावों का भविष्य टिका है, क्योंकि अदालत ने तब तक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा पर रोक लगा रखी है।

मामले की पृष्ठभूमि

कोलकाता नगर निगम में हाल ही में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 कर दी गई थी। इस परिसीमन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के नेता और पूर्व पार्षद दीपू दास ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

याचिका में आरोप लगाया गया कि वार्डों के नए सीमांकन में जनसंख्या वितरण और भौगोलिक स्थिति जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी की गई। साथ ही, 'मौके पर जाकर जांच' और सार्वजनिक सुनवाई की माँग को भी कथित तौर पर दरकिनार कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि यह परिसीमन किसी विशेष राजनीतिक दल को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया।

न्यायिक प्रक्रिया का घटनाक्रम

इस मामले की शुरुआती सुनवाई न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ के समक्ष हुई, जिन्होंने कोई विशेष अंतरिम आदेश पारित किए बिना सभी पक्षों को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

इस आदेश से असंतुष्ट याचिकाकर्ता ने न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रॉय की खंडपीठ का रुख किया। याचिकाकर्ता का तर्क था कि अगर फैसले से पहले ही पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग (WBSEC) चुनाव कार्यक्रम घोषित कर देता है, तो पूरी याचिका निरर्थक हो जाएगी।

खंडपीठ का अंतरिम निर्देश

4 नवंबर 2026 को खंडपीठ के समक्ष सुनवाई पूरी हुई और पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत ने WBSEC को आदेश दिया कि जब तक निर्णय नहीं सुना दिया जाता, तब तक KMC चुनावों का कार्यक्रम घोषित न किया जाए। यह अंतरिम निर्देश इस मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।

चुनाव पर क्या होगा असर

पश्चिम बंगाल के सात शहरी निकायों में KMC और हावड़ा नगर निगम (HMC) भी शामिल हैं, जहाँ दिसंबर के अंतिम सप्ताह में मतदान होने की संभावना जताई जा रही है। नतीजे जनवरी 2027 के पहले सप्ताह में घोषित किए जाने की उम्मीद है।

गौरतलब है कि आज के फैसले से यह तय होगा कि नए KMC बोर्ड के गठन के लिए इस वर्ष के अंत तक मतदान हो सकेगा या नहीं। यह फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नगर निगम चुनावों को अक्सर राज्य की सत्ताधारी पार्टी की जमीनी पकड़ की परीक्षा के रूप में देखा जाता है।

आगे क्या होगा

यदि खंडपीठ परिसीमन को वैध ठहराती है, तो WBSEC तत्काल चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है और दिसंबर में मतदान का रास्ता साफ हो जाएगा। वहीं, यदि परिसीमन को अवैध माना जाता है, तो नए सिरे से सीमांकन की प्रक्रिया शुरू होगी और चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक रूप से यह सत्ताधारी दल के लिए बेहद अनुकूल परिस्थितियाँ बना सकता है — यही CPI(M) की मुख्य आपत्ति है। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक सुनवाई और मौके पर जाँच जैसी प्रक्रियाएँ दरकिनार करना लोकतांत्रिक पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। उच्च न्यायालय यदि परिसीमन को खारिज करता है, तो यह पश्चिम बंगाल सरकार के लिए बड़ा झटका होगा और चुनाव की समयसीमा पूरी तरह बदल जाएगी। इस मामले में अदालत का रुख यह भी संकेत देगा कि नगर निकाय परिसीमन प्रक्रियाओं में न्यायिक निगरानी की सीमा कहाँ तक है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KMC वार्ड परिसीमन मामला क्या है?
कोलकाता नगर निगम में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने के निर्णय को CPI(M) नेता दीपू दास ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। उनकी याचिका में आरोप है कि परिसीमन में जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति की अनदेखी की गई और सार्वजनिक सुनवाई नहीं हुई।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने WBSEC को क्यों रोका है?
खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग (WBSEC) को आदेश दिया है कि वह अदालत का फैसला आने तक KMC चुनावों का कार्यक्रम घोषित न करे। यह रोक इसलिए लगाई गई ताकि फैसले से पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर याचिका निरर्थक न हो जाए।
KMC चुनाव कब होने की संभावना है?
अदालत के फैसले के बाद रास्ता साफ होने पर दिसंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में मतदान होने की संभावना है। नतीजे जनवरी 2027 के पहले सप्ताह में घोषित किए जा सकते हैं।
इस मामले में कौन-से न्यायाधीश शामिल हैं?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सब्यसाची भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति अर्जुन रॉय की खंडपीठ ने की। इससे पहले एकल-न्यायाधीश पीठ के रूप में न्यायमूर्ति हिरण्मय भट्टाचार्य ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई की थी।
फैसले के क्या संभावित परिणाम हो सकते हैं?
यदि अदालत परिसीमन को वैध मानती है, तो WBSEC तुरंत चुनाव कार्यक्रम जारी कर सकता है और दिसंबर में मतदान होगा। यदि परिसीमन रद्द होता है, तो नए सिरे से सीमांकन होगा और KMC चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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