पश्चिम बंगाल निकाय चुनाव में एक महीने की देरी संभव, KMC के 100 वार्डों में परिसीमन अधूरा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (KMC) और हावड़ा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (HMC) सहित सात शहरी निकायों के चुनाव लगभग एक महीने की देरी से होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, परिसीमन से जुड़ी वार्ड-वार मतदाता पुनर्व्यवस्था प्रक्रिया अभी भी कई वार्डों में अधूरी है, जिससे मूल समयसीमा पर चुनाव कराना संभव नहीं रह गया है।
मूल कार्यक्रम और देरी की वजह
प्रारंभिक शेड्यूल के अनुसार इन सात नागरिक निकायों में मतदान नवंबर के अंतिम सप्ताह में होना था और परिणाम दिसंबर के पहले सप्ताह तक आने थे। हालाँकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि KMC क्षेत्र के लगभग 100 वार्डों में वार्ड-वार मतदाता पुनर्वितरण की प्रक्रिया अभी भी लंबित है और इसे पूरा होने में और समय लगेगा।
राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस स्थिति में दिसंबर के तीसरे या चौथे सप्ताह से पहले चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
चुनाव आयोग का रुख
राज्य चुनाव आयोग के एक सूत्र ने कहा, 'दिसंबर के तीसरे सप्ताह तक प्रक्रिया पूरी करने की पूरी कोशिश की जाएगी ताकि वर्ष समाप्त होने से पहले मतगणना और परिणाम घोषणा हो सके। हालाँकि, अगर मतदान दिसंबर के अंतिम सप्ताह में होता है, तो परिणाम जनवरी के पहले सप्ताह से पहले घोषित कर दिए जाएँगे।'
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचा है और विभिन्न दलों के बीच मतदाता सूची की वैधता को लेकर विवाद चल रहा है।
सर्वदलीय बैठक में उठे सवाल
मंगलवार को पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकांश विपक्षी दलों ने आयोग से अपील की कि चुनाव स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया से पहले की मतदाता सूची के आधार पर कराए जाएँ।
सूत्रों के अनुसार, अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के लेफ्ट फ्रंट और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के प्रतिनिधियों ने चिंता व्यक्त की कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए।
मतदाता सूची विवाद
तीनों राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान कई योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और उनमें से अनेक मामले अभी अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष लंबित हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी परिस्थिति में यदि SIR के बाद की मतदाता सूची के आधार पर मतदान कराया गया, तो यह उन पात्र मतदाताओं के साथ अन्याय होगा जिनके नाम अभी भी विवाद में हैं।
गौरतलब है कि मतदाता सूची से नाम हटाने का यह मुद्दा राज्य में पहली बार नहीं उठा है — विधानसभा चुनावों के दौरान भी इस प्रकार के आरोप सामने आते रहे हैं।
आगे की राह
फिलहाल राज्य चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर नई तारीखों की घोषणा नहीं की है। सूत्रों के अनुसार परिसीमन कार्य पूरा होते ही चुनाव कार्यक्रम जारी किया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की नज़र बनी हुई है, और आने वाले हफ्तों में मतदाता सूची विवाद और तेज होने की आशंका है।