पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने सात शहरी निकाय चुनावों में TMC, वाम मोर्चा से सीट बंटवारे से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस ने 24 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य के सात शहरी निकायों के आगामी चुनावों में वह तृणमूल कांग्रेस (TMC), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे अथवा किसी भी अन्य दल के साथ सीट साझेदारी नहीं करेगी। कोलकाता और हावड़ा नगर निगम सहित इन निकायों के चुनाव नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित हैं और परिणाम दिसंबर के पहले सप्ताह में घोषित होने की संभावना है।
कांग्रेस ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव
पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) के सूत्रों के अनुसार, TMC की ओर से सीट बंटवारे को लेकर अनौपचारिक संकेत दिए गए थे, जिन्हें राज्य कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने खारिज कर दिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा कि नगर निकाय चुनावों में सीट साझा समझौता अर्थहीन होगा, क्योंकि पिछले अनुभव बताते हैं कि सत्तारूढ़ दल और राज्य प्रशासन के संयुक्त प्रभाव के कारण स्थानीय निकाय चुनाव अक्सर एक औपचारिकता बनकर रह जाते हैं।
सरकार ने आगे कहा, 'इस बार भी स्थिति अलग नहीं होगी और पूरी संभावना है कि इन सात नगर निकायों के अधिकांश वार्डों में भाजपा उम्मीदवार अपने प्रभाव का लाभ उठाकर जीत हासिल करेंगे। ऐसे में भाजपा यह दावा कर सकेगी कि संयुक्त विपक्ष के खिलाफ उसे जनता का स्वतःस्फूर्त समर्थन मिला है। इसलिए शहरी निकाय चुनाव सीट साझेदारी के प्रयोग के लिए उचित अवसर नहीं हैं।'
वाम मोर्चे का भी स्वतंत्र चुनाव का निर्णय
माकपा (CPI-M) नेतृत्व ने भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठबंधन (इंडिया) का हिस्सा होने के बावजूद स्थानीय निकाय चुनावों में वाम मोर्चा किसी अन्य दल के साथ सीट बंटवारा किए बिना स्वतंत्र रूप से उतरेगा। माकपा की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा, 'तृणमूल कांग्रेस के किसी भी गुट के साथ सीट साझेदारी का सवाल ही नहीं उठता। साथ ही, इस समय कांग्रेस के साथ भी किसी प्रकार की समझदारी वांछनीय नहीं है, क्योंकि हमारा मानना है कि आगामी शहरी निकाय चुनाव हमारी संगठनात्मक ताकत का आकलन करने का सबसे अच्छा अवसर हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया' गठबंधन के घटक दल एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राज्य स्तर पर उसी एकता को अमल में लाना कठिन साबित हो रहा है।
डेमोक्रेटिक TMC और NCPI की स्थिति
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के गुट 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' ने भी घोषणा की है कि वह आगामी शहरी निकाय चुनाव किसी भी दल के साथ समझौता किए बिना लड़ेगा। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस छोड़कर नेशनल सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 लोकसभा सदस्यों का समूह — जो स्वयं को भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बताता है — नगर निकाय चुनावों के लिए भाजपा के साथ सीट साझेदारी का इच्छुक है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में नगर निकाय चुनावों का इतिहास बताता है कि सत्तारूढ़ दल का प्रशासनिक वर्चस्व विपक्षी एकता की रणनीतियों को अक्सर बेअसर कर देता है।
चुनाव कार्यक्रम और संभावित तस्वीर
कोलकाता और हावड़ा नगर निगम सहित सात शहरी निकायों के चुनाव नवंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में होने का प्रस्ताव है, जबकि परिणाम दिसंबर 2026 के पहले सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। विपक्षी दलों के बिखरे हुए मोर्चे के बीच भाजपा और सत्तारूढ़ TMC के बीच सीधे मुकाबले की संभावना बढ़ती दिख रही है। इन चुनावों के नतीजे राज्य में विपक्ष की संगठनात्मक ताकत का एक महत्वपूर्ण पैमाना साबित होंगे।