26 अक्टूबर 2026
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ममता बनर्जी ने जिलावार रिपोर्ट माँगी, सात शहरी निकाय चुनावों की तैयारी तेज़

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ममता बनर्जी ने जिलावार रिपोर्ट माँगी, सात शहरी निकाय चुनावों की तैयारी तेज़

सारांश

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का आंतरिक विभाजन अब सड़क से चुनाव आयोग तक पहुँच गया है। ममता बनर्जी ने सात शहरी निकाय चुनावों से पहले जिलावार वफ़ादारों की सूची और शपथ-पत्र माँगे हैं — पार्टी के नाम और चिह्न पर दावे की कानूनी लड़ाई का हिस्सा, जो नवंबर में मतदान से पहले निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

ममता बनर्जी ने 26 अक्टूबर 2026 को पार्टी नेताओं को जिलावार वफ़ादार कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करने का निर्देश दिया।
सूची भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को सौंपी जाएगी ताकि 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फूल और घास' चिह्न पर अधिकार साबित किया जा सके।
ममता गुट 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम व 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न से लड़ेगा; ऋतब्रत गुट 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' व 'लिफाफा' चिह्न से।
KMC और HMC सहित सात निकायों में नवंबर के अंत में मतदान और दिसंबर के पहले हफ्ते में नतीजे संभावित।
ममता गुट के आरोप — राज्य पुलिस कार्यकर्ताओं पर ऋतब्रत गुट के पक्ष में शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर के लिए दबाव डाल रही है।
कांग्रेस की राज्य इकाई ने ममता गुट के साथ गठबंधन से इनकार किया; ऋतब्रत गुट भी अकेले चुनाव लड़ेगा।

पश्चिम बंगाल में सात शहरी निकाय चुनावों की तैयारी के मद्देनज़र तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता ममता बनर्जी ने 26 अक्टूबर 2026 को अपनी पार्टी के नेताओं को निर्देश दिया है कि वे उन स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की जिलावार विस्तृत सूची तैयार करें जो उनके और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के प्रति निष्ठावान हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब TMC आंतरिक विभाजन से जूझ रही है और दोनों गुटों के बीच पार्टी के नाम तथा चुनाव चिह्न पर कानूनी लड़ाई जारी है।

जिलावार सूची क्यों ज़रूरी है

ममता बनर्जी गुट के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि जिला-स्तरीय सूचियाँ मिलने के बाद ममता बनर्जी राज्य नेतृत्व के साथ बैठक करेंगी, जिसमें चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया जाएगा और चुनावी रणनीति तय की जाएगी। नेता ने कहा, 'एक बार जिला-वार सूचियाँ मिल जाने के बाद ममता बनर्जी अपनी पार्टी के राज्य नेतृत्व के साथ एक बैठक करेंगी और शहरी निकाय चुनावों के लिए नामों को अंतिम रूप देंगी।'

इसके अतिरिक्त यह सूची भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को भी सौंपी जाएगी, ताकि 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फूल और घास' वाले चुनाव चिह्न पर ममता गुट के वैध अधिकार को प्रमाणित किया जा सके।

शपथ-पत्र प्रक्रिया और पुलिस दबाव के आरोप

ममता गुट के नेता ने यह भी बताया कि जिला-स्तरीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से शपथ-पत्र लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पुलिस के माध्यम से जिला-स्तरीय कार्यकर्ताओं पर दबाव डाल रही है कि वे ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट के प्रति अपनी वफ़ादारी की पुष्टि करने वाले शपथ-पत्रों पर हस्ताक्षर करें। राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

दोनों गुटों के चुनाव चिह्न और नाम

गौरतलब है कि हाल में नंदीग्राम (पूर्वी मेदिनीपुर जिला) और रेजीनगर (मुर्शिदाबाद जिला) विधानसभा उपचुनावों की तरह ही आगामी सात शहरी निकाय चुनावों में ममता बनर्जी का गुट नए नाम 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' और नए चुनाव चिह्न 'फुटबॉल खिलाड़ी' के साथ मैदान में उतरेगा। वहीं, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम से और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ेगा।

मतदान और नतीजों की संभावित तिथियाँ

कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) सहित सात शहरी निकायों के लिए मतदान नवंबर के आखिरी हफ्ते में होने की संभावना है, जबकि नतीजे दिसंबर के पहले हफ्ते में घोषित किए जा सकते हैं।

गठबंधन की संभावना समाप्त

यह ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी का गुट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के साथ गठबंधन करके निकाय चुनाव लड़ना चाहता था, लेकिन कांग्रेस की राज्य इकाई ने पहले ही इससे इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने भी स्पष्ट किया है कि वे किसी गठबंधन के बिना अकेले चुनाव लड़ेंगे। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह नई पार्टी-विभाजन की स्थिति आने वाले महीनों में राज्य के नगर निकाय प्रशासन पर गहरा असर डाल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरे सत्ता-संघर्ष की परिणति है जो अभिषेक बनर्जी के उभार के साथ पिछले कई वर्षों से सुलग रही थी। जिलावार शपथ-पत्र और चुनाव चिह्न की कानूनी लड़ाई यह बताती है कि दोनों गुट अब एक-दूसरे को वैधता से वंचित करने की रणनीति पर चल रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि पुलिस-दबाव के आरोप — अगर सत्यापित हों — राज्य मशीनरी के दुरुपयोग का गंभीर सवाल उठाते हैं, जो इस चुनाव की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालेगा। नवंबर मतदान असल में इस बात की परीक्षा होगी कि ज़मीनी कार्यकर्ता किसे असली तृणमूल मानते हैं।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ममता बनर्जी ने जिलावार रिपोर्ट क्यों माँगी है?
ममता बनर्जी ने सात शहरी निकाय चुनावों से पहले अपने गुट के वफ़ादार नेताओं और कार्यकर्ताओं की पहचान के लिए यह सूची माँगी है। इसे भारतीय चुनाव आयोग को सौंपकर 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फूल और घास' चुनाव चिह्न पर उनके गुट का अधिकार साबित किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल के सात शहरी निकाय चुनावों में कब मतदान होगा?
कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) सहित सात शहरी निकायों में नवंबर के आखिरी हफ्ते में मतदान होने की संभावना है। नतीजे दिसंबर के पहले हफ्ते में घोषित किए जा सकते हैं।
तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट किस नाम और चिह्न से चुनाव लड़ेंगे?
ममता बनर्जी का गुट 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न के साथ मैदान में उतरेगा। ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम से और 'लिफाफा' चिह्न के साथ चुनाव लड़ेगा।
क्या ममता बनर्जी गुट किसी दल के साथ गठबंधन करेगा?
ममता बनर्जी का गुट कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहता था, लेकिन कांग्रेस की राज्य इकाई ने इससे इनकार कर दिया है। ऋतब्रत बनर्जी का गुट भी अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुका है, इसलिए तीनों प्रमुख दावेदार अलग-अलग मैदान में होंगे।
शपथ-पत्र प्रक्रिया में पुलिस दबाव के आरोप क्या हैं?
ममता गुट के नेताओं ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार पुलिस के ज़रिए जिला-स्तरीय कार्यकर्ताओं पर दबाव डाल रही है कि वे ऋतब्रत बनर्जी के गुट के प्रति वफ़ादारी की पुष्टि करने वाले शपथ-पत्रों पर हस्ताक्षर करें। ये आरोप कथित तौर पर लगाए गए हैं और राज्य सरकार की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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