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पश्चिम बंगाल नगर निकाय चुनाव 2026: WBSEC की अहम बैठक, EVM कमी से KMC-HMC चुनाव में देरी की आशंका

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पश्चिम बंगाल नगर निकाय चुनाव 2026: WBSEC की अहम बैठक, EVM कमी से KMC-HMC चुनाव में देरी की आशंका

सारांश

पश्चिम बंगाल में साल के अंत तक नगर निकाय चुनाव कराने की तैयारी है, लेकिन ईवीएम की कमी सबसे बड़ी बाधा बन गई है। KMC के वार्ड 144 से 211 और HMC के 50 से 68 होने की संभावना है। WBSEC ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में तत्काल सुनवाई की अपील की है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग (WBSEC) ने 2 सितंबर 2026 को नगर निकाय चुनाव तैयारियों पर अहम बैठक बुलाई।
कोलकाता नगर निगम (KMC) में वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 211 और हावड़ा नगर निगम (HMC) में 50 से 68 होने की संभावना।
ईवीएम की कमी सबसे बड़ी चुनौती; विधानसभा चुनाव याचिकाओं के चलते मशीनें कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश से सुरक्षित रखी गई हैं।
WBSEC ने कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई की अपील की।
अगले सप्ताह उच्च न्यायालय में सुनवाई होने की संभावना; इसके नतीजे पर चुनाव की घोषणा निर्भर।

पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग (WBSEC) ने 2 सितंबर 2026 को एक अहम बैठक बुलाई, जिसमें राज्य के शहरी निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा की गई। साल के अंत तक कोलकाता नगर निगम (KMC) और हावड़ा नगर निगम (HMC) समेत अन्य शहरी निकायों में चुनाव कराने का लक्ष्य है, लेकिन ईवीएम की गंभीर कमी इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है। आयोग ने इस मुद्दे पर कलकत्ता उच्च न्यायालय में तत्काल सुनवाई की अपील भी दायर की है।

बैठक का एजेंडा और भागीदार

बैठक में उन सभी जिलों के जिलाधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए, जहाँ नगर निगम और नगर पालिका चुनाव होने हैं। बैठक में मौजूदा प्रशासनिक स्थिति, ईवीएम की उपलब्धता और चुनावी तैयारियों से जुड़े अन्य ज़रूरी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब दोनों प्रमुख नगर निगम — KMC और HMC — परिसीमन की प्रक्रिया के बीच में हैं, जिससे चुनावी तैयारियाँ और जटिल हो गई हैं।

परिसीमन से बदलेगा चुनावी नक्शा

कोलकाता नगर निगम (KMC), जो राज्य का सबसे पुराना नगर निगम है, के ड्राफ्ट परिसीमन प्रस्ताव में वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने का सुझाव दिया गया था। हालाँकि, अंतिम संख्या 211 तक पहुँचने की संभावना बताई जा रही है।

वहीं, हावड़ा नगर निगम (HMC) में ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार वार्डों की संख्या 50 से बढ़ाकर 68 करने की योजना है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वार्डों की यह पुनर्संरचना मतदाताओं की बनावट, चुनावी रणनीति और प्रशासनिक प्रबंधन — तीनों को गहरे स्तर पर प्रभावित करेगी।

EVM की कमी — सबसे बड़ी चुनौती

WBSEC सूत्रों के अनुसार, आयोग के सामने सबसे बड़ी चिंता ईवीएम की अनुपलब्धता है। दरअसल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ी कई चुनावी याचिकाएँ कलकत्ता उच्च न्यायालय में अभी भी लंबित हैं। इन मामलों में न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को विभिन्न केंद्रों की ईवीएम मशीनें, वीवीपैट और अन्य चुनावी सामग्री सुरक्षित रखने का आदेश दिया है।

एक WBSEC सूत्र के हवाले से बताया गया है: 'इसके चलते ईवीएम की कमी से नगर निकाय चुनावों की घोषणा में देरी हो सकती है। इसी को देखते हुए हमने कलकत्ता उच्च न्यायालय में तत्काल सुनवाई के लिए अपील की है।'

उच्च न्यायालय में अपील, अगले सप्ताह सुनवाई संभव

रिपोर्टों के अनुसार, कलकत्ता उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया है। इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों ही साल के अंत तक चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहे हैं। न्यायालय का निर्णय यह तय करेगा कि ईवीएम किस हद तक नगर निकाय चुनावों के लिए उपलब्ध हो सकती हैं।

आगे की राह

परिसीमन की अंतिम अधिसूचना, ईवीएम की उपलब्धता और न्यायालय के आदेश — ये तीन कारक मिलकर तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल के शहरी निकाय चुनाव समय पर हो पाएंगे या नहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि KMC जैसे बड़े निगम में नए वार्ड लेआउट के आधार पर चुनाव कराना प्रशासनिक दृष्टि से एक बड़ी परीक्षा होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

ज़मीन पर उतनी ही उलझी हुई है। ईवीएम की कमी कोई तकनीकी बाधा नहीं, बल्कि यह उस न्यायिक अनिश्चितता का प्रतिबिंब है जो 2021 के विधानसभा चुनाव विवादों से अभी तक सुलझी नहीं है। KMC में वार्डों की संख्या 144 से 211 तक पहुँचाना एक साहसिक प्रशासनिक निर्णय है, लेकिन इतने बड़े पुनर्गठन के साथ चुनाव कराना — वह भी नई ईवीएम के बिना — एक ऐसी चुनौती है जिसे आयोग अकेले नहीं सुलझा सकता। असली सवाल यह है कि क्या न्यायालय और चुनाव आयोग दोनों मिलकर इस गतिरोध को समय रहते तोड़ पाएंगे।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल नगर निकाय चुनाव 2026 कब होंगे?
पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग का लक्ष्य साल के अंत तक शहरी निकाय चुनाव कराना है। हालाँकि, ईवीएम की कमी और कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित मामलों के कारण सटीक तारीख की घोषणा अभी नहीं हुई है।
WBSEC ने 2 सितंबर की बैठक क्यों बुलाई?
WBSEC ने यह बैठक नगर निकाय चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के लिए बुलाई, जिसमें ईवीएम की उपलब्धता, परिसीमन की स्थिति और प्रशासनिक प्रबंधन पर चर्चा हुई। संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को बैठक में बुलाया गया था।
KMC और HMC में परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या कितनी होगी?
कोलकाता नगर निगम (KMC) में वार्डों की संख्या 144 से बढ़कर 211 तक पहुँचने की संभावना है, जबकि हावड़ा नगर निगम (HMC) में यह संख्या 50 से बढ़कर 68 हो सकती है। दोनों निगमों में आगामी चुनाव नए वार्ड लेआउट के आधार पर होंगे।
ईवीएम की कमी से नगर निकाय चुनावों पर क्या असर पड़ेगा?
विधानसभा चुनाव से जुड़ी याचिकाओं के कारण कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर ईवीएम मशीनें सुरक्षित रखी गई हैं, जिससे नगर निकाय चुनावों के लिए उनकी उपलब्धता सीमित हो गई है। WBSEC के अनुसार इससे चुनाव घोषणा में देरी हो सकती है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय में WBSEC की अपील पर कब सुनवाई होगी?
रिपोर्टों के अनुसार, कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारूप बनर्जी की खंडपीठ के समक्ष दायर तत्काल सुनवाई की अपील पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। इस सुनवाई का नतीजा चुनाव की समयसीमा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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