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फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद KMC बोर्ड पर संकट, पश्चिम बंगाल सरकार ने 3 दिन में माँगा जवाब

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फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद KMC बोर्ड पर संकट, पश्चिम बंगाल सरकार ने 3 दिन में माँगा जवाब

सारांश

मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद कोलकाता नगर निगम पर राजनीतिक और कानूनी संकट गहराया। पश्चिम बंगाल सरकार ने KMC को 3 दिन में जवाब माँगा है कि TMC-संचालित बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए। धारा 117(1) बनाम धारा 28 और 38 की कानूनी लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल के नगर विकास विभाग ने 6 जून 2026 को KMC को नोटिस जारी कर 3 दिनों में जवाब माँगा।
नोटिस मेयर फिरहाद हकीम के शुक्रवार को आधिकारिक इस्तीफे के एक दिन बाद आया।
राज्य सरकार का तर्क: KMC अधिनियम 1980 की धारा 117(1) के तहत बोर्ड भंग करने का अधिकार है।
KMC चेयरपर्सन माला रॉय ने धारा 28 और 38 का हवाला देते हुए बोर्ड की निरंतरता का बचाव किया।
वर्तमान में अतिन घोष KMC के डिप्टी मेयर हैं, जो कार्यवाहक भूमिका निभा सकते हैं।
KMC का जवाब मिलने के बाद ही राज्य सरकार अगला कदम तय करेगी।

पश्चिम बंगाल के नगर विकास एवं नगर मामलों के विभाग ने शनिवार, 6 जून 2026 को कोलकाता नगर निगम (KMC) को औपचारिक नोटिस जारी किया, जिसमें तीन दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि मेयर फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद मौजूदा तृणमूल कांग्रेस (TMC) संचालित बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए। यह नोटिस हकीम के शुक्रवार को आधिकारिक रूप से पद छोड़ने के ठीक एक दिन बाद जारी किया गया है।

नोटिस किसे और क्यों भेजा गया

राज्य के नगर विकास विभाग ने यह नोटिस KMC चेयरपर्सन माला रॉय, नगर आयुक्त, निगम सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजा है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि वर्तमान में कोलकाता नगर निगम नागरिकों को अपेक्षित स्तर की सेवाएँ उपलब्ध कराने में विफल रहा है, और यही बोर्ड भंग करने पर विचार का एक प्रमुख आधार है।

अधिकारियों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 117(1) के तहत राज्य सरकार को निगम बोर्ड भंग करने का अधिकार प्राप्त है। विभाग का तर्क है कि मेयर के इस्तीफे के बाद मौजूदा बोर्ड का कार्यकाल स्वतः समाप्त माना जाना चाहिए।

KMC चेयरपर्सन का पलटवार

हालाँकि, माला रॉय ने राज्य सरकार की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि धारा 38 के तहत डिप्टी मेयर, मेयर की अनुपस्थिति या अप्रत्याशित परिस्थितियों में उनके दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं, इसलिए मौजूदा बोर्ड अपना कार्यकाल पूरा करने में सक्षम है।

रॉय ने यह भी कहा कि धारा 28 के प्रावधानों के अनुसार, जब तक मौजूदा पार्षदों के बीच विश्वास मत के ज़रिए नया मेयर नहीं चुना जाता, तब तक डिप्टी मेयर मेयर के अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं। वर्तमान में अतिन घोष KMC के डिप्टी मेयर के पद पर हैं।

कानूनी विवाद की जड़

यह टकराव मूलतः दो कानूनी व्याख्याओं के बीच है — राज्य सरकार धारा 117(1) को आधार बनाकर बोर्ड भंग करने की शक्ति का दावा कर रही है, जबकि KMC प्रशासन धारा 28 और 38 का हवाला देते हुए बोर्ड की निरंतरता की वकालत कर रहा है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब पश्चिम बंगाल में TMC और राज्य सरकार के बीच प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर पहले से तनाव की स्थिति है।

नगर विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि धारा 117(1) के अंतर्गत कार्रवाई से पूर्व निगम प्रशासन को अपना पक्ष रखने का अवसर देना कानूनी रूप से अनिवार्य है — इसीलिए यह नोटिस जारी किया गया।

आम जनता पर असर

यदि बोर्ड भंग होता है, तो कोलकाता जैसे महानगर में नागरिक सेवाओं — जल आपूर्ति, सड़क रखरखाव, कचरा प्रबंधन — के संचालन पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासनिक शून्यता की स्थिति में राज्य सरकार द्वारा प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आगे क्या होगा

KMC की ओर से तीन दिन के भीतर लिखित जवाब मिलने के बाद ही राज्य सरकार अगला कदम उठाएगी। अधिकारियों के अनुसार, जवाब के आधार पर बोर्ड भंग करने अथवा बोर्ड को निरंतर बनाए रखने का निर्णय लिया जाएगा। इस मामले पर कानूनी विशेषज्ञों की भी नज़र है, क्योंकि यह नज़ीर भविष्य के नगर निगम विवादों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि इससे एक निर्वाचित बोर्ड को कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाया जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि 'नागरिक सेवाओं में विफलता' का आधार अस्पष्ट है और इसका दुरुपयोग राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में हो सकता है। असली सवाल यह है कि क्या यह कानूनी कार्रवाई है या शक्ति-प्रदर्शन — और इसका जवाब KMC के तीन दिवसीय जवाब से नहीं, बल्कि अदालत से मिलने की संभावना अधिक है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिरहाद हकीम के इस्तीफे के बाद KMC बोर्ड पर क्या संकट आया है?
मेयर फिरहाद हकीम के शुक्रवार को इस्तीफा देने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने KMC को नोटिस जारी कर 3 दिनों में यह बताने को कहा है कि TMC-संचालित बोर्ड को भंग क्यों न किया जाए। राज्य सरकार और KMC प्रशासन के बीच कानूनी व्याख्याओं पर मतभेद सामने आए हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार KMC बोर्ड भंग करने के लिए कौन-सा कानूनी आधार दे रही है?
राज्य सरकार कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 की धारा 117(1) का हवाला दे रही है, जो राज्य को निगम बोर्ड भंग करने का अधिकार देती है। सरकार का तर्क है कि मेयर के इस्तीफे के बाद बोर्ड का कार्यकाल स्वतः समाप्त माना जाना चाहिए।
KMC चेयरपर्सन माला रॉय ने बोर्ड भंग करने की दलील क्यों खारिज की?
माला रॉय का कहना है कि KMC अधिनियम की धारा 28 और 38 के तहत डिप्टी मेयर, मेयर की अनुपस्थिति में उनके अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं। उनके अनुसार जब तक पार्षदों के विश्वास मत से नया मेयर नहीं चुना जाता, बोर्ड अपना कार्यकाल पूरा कर सकता है।
KMC के वर्तमान डिप्टी मेयर कौन हैं और उनकी भूमिका क्या होगी?
वर्तमान में अतिन घोष KMC के डिप्टी मेयर हैं। KMC अधिनियम की धारा 38 के अनुसार वे मेयर की अनुपस्थिति में उनके दायित्वों का निर्वहन कर सकते हैं, जब तक नया मेयर निर्वाचित नहीं हो जाता।
KMC बोर्ड भंग होने पर कोलकाता के नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
बोर्ड भंग होने की स्थिति में जल आपूर्ति, सड़क रखरखाव और कचरा प्रबंधन जैसी नागरिक सेवाओं पर तत्काल असर पड़ सकता है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा प्रशासक नियुक्त किए जाने की संभावना है, जो अगले चुनाव तक निगम चलाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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