20 जुलाई 2026
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फिरहाद हकीम का कोलकाता मेयर पद से इस्तीफ़ा, ममता बनर्जी ने दी मंज़ूरी; TMC में बगावत गहराई

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फिरहाद हकीम का कोलकाता मेयर पद से इस्तीफ़ा, ममता बनर्जी ने दी मंज़ूरी; TMC में बगावत गहराई

सारांश

कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम का इस्तीफ़ा सिर्फ़ एक पद-त्याग नहीं, बल्कि TMC के भीतर गहराती दरार का सबसे बड़ा संकेत है। 80 में से 58 विधायकों का निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी के पीछे खड़ा होना और हकीम का नबन्ना बैठक में दिखना — ममता बनर्जी की दो दशक पुरानी पकड़ पर सबसे तीखा सवाल खड़ा करता है।

मुख्य बातें

कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने 3 जून को पद से इस्तीफ़े की इच्छा जताई।
सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी ने अनुरोध को कथित तौर पर मंज़ूरी दे दी; आधिकारिक घोषणा बाक़ी।
TMC के 80 में से 58 विधायकों ने निष्कासित ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा दल का नया नेता समर्थन किया।
हकीम का मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नबन्ना समीक्षा बैठक में शामिल होना अटकलों का बड़ा कारण बना।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह TMC के सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक है।

कोलकाता के मेयर और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने 3 जून को अपने पद से इस्तीफ़ा देने की इच्छा जताते हुए पार्टी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से औपचारिक अनुमति मांगी है। सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने उनके अनुरोध को कथित तौर पर मंज़ूरी भी दे दी है, हालाँकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

मुख्य घटनाक्रम

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी TMC अपने राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकटों में से एक से जूझ रही है। पार्टी के भीतर बड़ी संख्या में विधायक खुलकर निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के समर्थन में सामने आ चुके हैं और मौजूदा नेतृत्व-व्यवस्था को सीधी चुनौती दे रहे हैं।

विधायकों की बगावत

ताज़ा जानकारी के अनुसार, 80 में से 58 विधायकों के एक समूह ने बुधवार को औपचारिक रूप से ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा दल का नया नेता मानने का फ़ैसला किया है। यह संख्या-बल अपने आप में पार्टी के भीतर असंतोष की गहराई का संकेत देता है, और नेतृत्व के लिए सीधी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

नबन्ना बैठक से उठे सवाल

फिरहाद हकीम, जिन्हें लंबे समय से ममता बनर्जी के सबसे क़रीबी सहयोगियों में गिना जाता रहा है, हाल के दिनों में राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहे हैं। इसकी बड़ी वजह उनका मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा नबन्ना में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होना बताया जा रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में कई अटकलों को हवा दी।

क्यों मायने रखता है

हकीम का संभावित इस्तीफ़ा सिर्फ़ एक नगर-निकाय का बदलाव नहीं, बल्कि TMC के अंदरूनी समीकरणों में संभावित दरार का प्रतीक है। मेयर पद कोलकाता की नगर-व्यवस्था में रणनीतिक रूप से अहम है, और यहाँ कोई भी बदलाव शहरी मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ पर सीधा असर डाल सकता है।

आगे क्या

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह संकट और गहराता है, तो पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फ़िलहाल सभी की निगाहें ममता बनर्जी और TMC नेतृत्व के अगले क़दम पर टिकी हैं — विशेषकर इस बात पर कि क्या पार्टी बागी विधायकों के साथ संवाद का रास्ता अपनाती है या अनुशासनात्मक कार्रवाई की ओर बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दोनों ही विकल्प 2026 के विधानसभा गणित को नया आकार दे सकते हैं।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिरहाद हकीम ने कोलकाता मेयर पद से इस्तीफ़ा क्यों दिया?
सूत्रों के अनुसार, फिरहाद हकीम ने 3 जून को कोलकाता मेयर पद से इस्तीफ़े की इच्छा जताते हुए ममता बनर्जी से अनुमति मांगी है। इस्तीफ़े के पीछे की आधिकारिक वजह अब तक स्पष्ट नहीं की गई है, हालाँकि यह क़दम TMC के भीतर चल रहे आंतरिक संकट और हाल की राजनीतिक अटकलों के बीच आया है।
क्या ममता बनर्जी ने इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लिया है?
सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने हकीम के अनुरोध को कथित तौर पर मंज़ूरी दे दी है। हालाँकि, इस संबंध में अब तक TMC या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
TMC के 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन क्यों किया?
80 में से 58 विधायकों ने बुधवार को निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा दल का नया नेता मानने का फ़ैसला किया है। यह क़दम मौजूदा नेतृत्व-व्यवस्था के प्रति असंतोष को दर्शाता है और पार्टी के भीतर खुली बगावत का संकेत है।
नबन्ना बैठक से फिरहाद हकीम का क्या संबंध है?
फिरहाद हकीम के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा नबन्ना में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल होने ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को जन्म दिया। ममता बनर्जी के क़रीबी माने जाने वाले हकीम की इस बैठक में मौजूदगी को उनके मौजूदा रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसका क्या असर होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि TMC का यह आंतरिक संकट और गहराता है, तो पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़े बदलाव संभव हैं। मेयर पद से लेकर विधानसभा दल के नेतृत्व तक की उथल-पुथल राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाता-आधार पर असर डाल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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