चुनावी हार के बाद TMC में बगावत: KMC के दो पार्षदों ने पद छोड़े, मेयर हकीम को सौंपा इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आ रहा है। बुधवार, 27 मई को कोलकाता नगर निगम (KMC) के दो वरिष्ठ तृणमूल पार्षदों ने अपने प्रशासनिक पदों से इस्तीफा दे दिया — हालांकि दोनों ने अपनी पार्षद सदस्यता बरकरार रखी है। यह घटनाक्रम पार्टी नेतृत्व के लिए एक सार्वजनिक चुनौती बनकर उभरा है।
किसने दिया इस्तीफा और क्यों
वार्ड नंबर 108 के पार्षद सुषांत घोष ने KMC बरो नंबर 12 के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया और यह इस्तीफा KMC आयुक्त स्मिता पांडे को सौंपा। वहीं, वार्ड नंबर 98 के पार्षद अरूप चक्रवर्ती ने KMC अकाउंट्स कमेटी की सदस्यता से त्यागपत्र दिया। दोनों नेता बुधवार दोपहर एक साथ KMC मुख्यालय पहुँचे और बाद में मेयर फिरहाद हकीम को भी अपना इस्तीफा सौंपा।
पार्षदों ने क्या कहा
मीडिया से बातचीत में अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि विधानसभा चुनाव का परिणाम निराशाजनक रहा और जनता के फैसले को गंभीरता से लेना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, 'अगर हार स्वीकार नहीं की जाएगी तो पिछली जीत का कोई महत्व नहीं रह जाएगा।' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ता इस समय असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और सवाल उठाया कि लंबे समय तक लाभ उठाने वाले मंत्री अब कहाँ हैं।
सुषांत घोष ने भी इसी तरह की नाराज़गी ज़ाहिर की और यहाँ तक कहा कि यदि जनता चाहेगी तो वह पार्षद पद से भी इस्तीफा देने को तैयार हैं।
सुषांत घोष पर हमले की जाँच पर सवाल
गौरतलब है कि 15 नवंबर को सुषांत घोष के घर के सामने उन पर कथित तौर पर फायरिंग की कोशिश हुई थी। बंदूक से गोली न चलने के कारण वह बाल-बाल बच गए थे। बाद में उनके समर्थकों ने कथित शूटर युवराज सिंह को पकड़ा था। इस मामले में कथित मुख्य साजिशकर्ता अफरोज खान उर्फ गुलजार, टैक्सी चालक अहमद अली और कथित मास्टरमाइंड फूल बाबू को गिरफ्तार किया गया था। इस्तीफे के दौरान घोष ने इस मामले की जाँच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जाँच सही दिशा में नहीं हुई और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से निष्पक्ष जाँच सुनिश्चित करने की अपील की।
देबलीना बिस्वास का पहले का इस्तीफा
यह इस्तीफों की पहली घटना नहीं है। कुछ दिन पहले KMC वार्ड नंबर 74 की पार्षद देबलीना बिस्वास ने भी बरो नंबर 9 की चेयरपर्सन पद से इस्तीफा दिया था। बताया जा रहा है कि भवानीपुर विधानसभा सीट पर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया। यह ऐसे समय में आया है जब TMC नेतृत्व चुनावी समीक्षा में व्यस्त है और आंतरिक जवाबदेही की माँग तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
इस्तीफों की बढ़ती संख्या TMC के लिए संगठनात्मक संकट का संकेत है। पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि असंतोष को जल्द नहीं थामा गया तो आगामी नगर निकाय चुनावों में पार्टी को और नुकसान हो सकता है।