13 अगस्त 2026
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कोलकाता पोर्ट सीट पर TMC का दबदबा बरकरार, फिरहाद हकीम ने 56,080 वोटों से दर्ज की जीत

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कोलकाता पोर्ट सीट पर TMC का दबदबा बरकरार, फिरहाद हकीम ने 56,080 वोटों से दर्ज की जीत

सारांश

कोलकाता पोर्ट सीट एक बार फिर TMC के गढ़ के रूप में उभरी — फिरहाद हकीम की 56,080 वोटों की जीत न केवल उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता बल्कि 2011 से इस शहरी सीट पर TMC की अटूट पकड़ का प्रमाण है। वाम दलों के सिकुड़ते जनाधार और BJP के दूसरे स्थान पर सिमटने के बीच यह नतीजा पश्चिम बंगाल की राजनीति की बदलती तस्वीर को स्पष्ट करता है।

मुख्य बातें

फिरहाद हकीम (TMC) ने कोलकाता पोर्ट सीट पर 56,080 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
हकीम को 1,01,226 वोट मिले; BJP के राकेश सिंह को 45,146 और CPI(M) के फैयाज अहमद खान को 2,571 वोट मिले।
2011 से यह सीट लगातार TMC के पास है; हकीम 2018 से कोलकाता नगर निगम के मेयर भी हैं।
सीट पर 2 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय करीब 51.80% है।
1952–2006 तक यह सीट गार्डन रीच नाम से जानी जाती थी; परिसीमन के बाद 2011 में नाम बदला।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर 56,080 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 4 मई को घोषित इस परिणाम ने एक बार फिर साबित किया कि पश्चिम बंगाल की इस शहरी सीट पर TMC की पकड़ 2011 से लगातार मजबूत होती जा रही है।

मतगणना के आंकड़े

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फिरहाद हकीम को कुल 1,01,226 वोट मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राकेश सिंह, 45,146 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार फैयाज अहमद खान को केवल 2,571 वोट मिले, जो वाम दलों की इस सीट पर लगातार घटती पकड़ को दर्शाता है।

फिरहाद हकीम: सीट के स्थायी चेहरे

फिरहाद हकीम ने 2011 में पहली बार इस सीट से जीत दर्ज की थी और तब से 20162021 में भी अपने जीत के अंतर को लगातार बढ़ाते रहे हैं। वह राज्य सरकार में मंत्री रहने के साथ-साथ 2018 से कोलकाता नगर निगम के मेयर के पद पर भी आसीन हैं। यह ऐसे समय में आया है जब TMC पूरे पश्चिम बंगाल में अपनी राजनीतिक उपस्थिति को और सुदृढ़ करने में जुटी है।

सीट का राजनीतिक इतिहास

गौरतलब है कि 1952 से 2006 तक यह क्षेत्र गार्डन रीच सीट के नाम से जाना जाता था, जहाँ 14 विधानसभा चुनाव हुए। शुरुआती दशकों में कांग्रेस ने यहाँ आठ बार जीत दर्ज की, जबकि वाम दलों ने छह बार सफलता पाई। परिसीमन (डीलिमिटेशन) के बाद 2011 में इसका नाम बदलकर कोलकाता पोर्ट कर दिया गया और कोलकाता नगर निगम के 13 वार्डों को शामिल कर इसे नया स्वरूप दिया गया।

लोकसभा चुनावों के रुझान भी इसी राजनीतिक प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। 2009 से इस क्षेत्र में TMC लगातार बढ़त बनाए हुए है। 2014 में BJP ने चुनौती पेश की, लेकिन 2019 और 2024 में TMC ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली। BJP यहाँ दूसरे स्थान पर बनी हुई है।

सीट की जनसांख्यिकीय और भौगोलिक पहचान

2024 के आंकड़ों के मुताबिक, इस सीट पर 2 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय करीब 51.80 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा वोट बैंक है। भौगोलिक रूप से यह एक घनी शहरी सीट है, जिसमें गार्डन रीच, मेटियाब्रुज, किडरपोर और खिदिरपुर जैसे इलाके शामिल हैं। हुगली नदी के किनारे बसे इस क्षेत्र की पहचान पोर्ट, शिपयार्ड, डॉक और वेयरहाउस से होती है। कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र के सात हिस्सों में शामिल यह सामान्य श्रेणी की सीट शहरी राजनीति का एक अहम केंद्र मानी जाती है।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

इस जीत के साथ TMC का कोलकाता पोर्ट सीट पर लगातार चौथी बार कब्जा पक्का हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट की जनसांख्यिकीय संरचना और फिरहाद हकीम की स्थानीय प्रशासनिक पकड़ आने वाले समय में भी यहाँ TMC की स्थिति को मजबूत बनाए रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिम बंगाल की शहरी राजनीति में TMC के एकाधिकार का संकेत है। गौर करने वाली बात यह है कि जहाँ CPI(M) जैसी वाम पार्टियाँ जो कभी इस सीट पर दावेदार थीं, अब 2,571 वोटों पर सिमट गई हैं, वहीं BJP दूसरे स्थान पर तो है लेकिन जीत से कोसों दूर। असली सवाल यह है कि क्या 51.80% मुस्लिम मतदाताओं की बहुलता वाली इस सीट पर TMC की जीत केवल जनसांख्यिकीय समीकरण पर टिकी है, या फिरहाद हकीम के प्रशासनिक कार्यकाल ने भी इसमें योगदान दिया है — यह विश्लेषण मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर नदारद रहता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता पोर्ट सीट पर 2026 में कौन जीता?
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फिरहाद हकीम ने कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर 56,080 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 1,01,226 वोट मिले, जबकि BJP के राकेश सिंह 45,146 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे।
फिरहाद हकीम कौन हैं?
फिरहाद हकीम TMC के वरिष्ठ नेता हैं जो 2011 से कोलकाता पोर्ट (पूर्व में गार्डन रीच) सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री रहे हैं और 2018 से कोलकाता नगर निगम के मेयर हैं।
कोलकाता पोर्ट सीट का इतिहास क्या है?
1952 से 2006 तक यह सीट गार्डन रीच के नाम से जानी जाती थी, जहाँ कांग्रेस ने आठ और वाम दलों ने छह बार जीत दर्ज की। परिसीमन के बाद 2011 में इसका नाम कोलकाता पोर्ट रखा गया और कोलकाता नगर निगम के 13 वार्डों को इसमें शामिल किया गया।
कोलकाता पोर्ट सीट पर TMC कब से जीत रही है?
2011 से TMC इस सीट पर लगातार जीत दर्ज कर रही है। फिरहाद हकीम ने 2011, 2016 और 2021 में भी इस सीट से जीत हासिल की थी और हर बार जीत का अंतर बढ़ता रहा।
कोलकाता पोर्ट सीट की जनसांख्यिकीय संरचना कैसी है?
2024 के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर 2 लाख से अधिक मतदाता हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय करीब 51.80% के साथ सबसे बड़ा वोट बैंक है। इसमें गार्डन रीच, मेटियाब्रुज, किडरपोर और खिदिरपुर जैसे घनी आबादी वाले शहरी इलाके शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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