बालीगंज सीट पर टीएमसी की छठी जीत: शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने 61,632 वोटों से भाजपा को हराया
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कोलकाता की प्रतिष्ठित बालीगंज विधानसभा सीट पर 61,632 वोटों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की। 4 मई 2026 को घोषित परिणाम में TMC ने इस सीट पर लगातार छठी बार विजय हासिल की, जो पार्टी के पश्चिम बंगाल में मजबूत राजनीतिक वर्चस्व को दर्शाती है।
मतगणना के प्रमुख आँकड़े
शोभनदेब चट्टोपाध्याय को कुल 1,08,422 वोट प्राप्त हुए। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार शतरूपा को 46,790 वोट मिले। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीएम — की आफरीन बेगम 7,149 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के रोहन मित्रा काफी पीछे रहे। इस सीट पर मतदान प्रतिशत 88.16% दर्ज किया गया, जो राज्य में उच्च मतदान भागीदारी का संकेत है।
प्रमुख उम्मीदवारों का परिचय
82 वर्षीय शोभनदेब चट्टोपाध्याय TMC के वरिष्ठतम नेताओं में शुमार हैं। ग्रेजुएट प्रोफेशनल योग्यता धारक इस नेता के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है और उनकी कुल संपत्ति ₹3.9 करोड़ है।
BJP की शतरूपा (55 वर्ष) डॉक्टरेट डिग्री धारक हैं। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं है। उनकी संपत्ति ₹82.2 लाख है जबकि ₹32.1 लाख की देनदारी है। INC के रोहन मित्रा (41 वर्ष) स्नातक हैं, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है और उनकी संपत्ति ₹7.4 करोड़ तथा देनदारी ₹1.4 करोड़ है। सीपीएम की आफरीन बेगम (29 वर्ष) परास्नातक हैं, कोई आपराधिक मामला नहीं और संपत्ति मात्र ₹1.8 लाख है।
बालीगंज सीट का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व
कोलकाता का बालीगंज पश्चिम बंगाल के सबसे समृद्ध और प्रभावशाली इलाकों में से एक है। यह जनरल कैटेगरी की सीट कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र का अहम हिस्सा है। ईस्ट इंडिया कंपनी के जमाने से यह इलाका अपनी सांस्कृतिक विरासत, बड़े बंगलों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए जाना जाता है। इस सीट में कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के वार्ड नंबर 60, 61, 64, 65, 68, 69 और 85 शामिल हैं। सीट 1951 में अस्तित्व में आई और 1952 में पहला चुनाव हुआ — तब से अब तक यहाँ 17 विधानसभा चुनाव और दो उपचुनाव आयोजित हो चुके हैं।
सीट का राजनीतिक इतिहास
1952 से 2006 तक बालीगंज पर वाम मोर्चे का दबदबा रहा। सीपीआई(एम) ने यहाँ नौ बार जीत दर्ज की, जिसमें 1977 से 2001 के बीच लगातार जीत की हैट्रिक शामिल है। कांग्रेस ने तीन बार और अन्य दलों ने कभी-कभी सफलता पाई।
गौरतलब है कि 2006 से TMC ने इस सीट को अपना अभेद्य किला बना लिया है। 2011 में सुब्रत मुखर्जी ने सीपीआई(एम) के फौद हलीम को 41,185 वोटों से हराया। 2016 में कांग्रेस को 15,225 वोटों से और 2021 में BJP के लोकनाथ चटर्जी को 75,359 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया गया। 2022 के उपचुनाव में — सुब्रत मुखर्जी के निधन के बाद — बाबुल सुप्रियो ने सीपीएम की सायरा शाह हलीम को 20,228 वोटों से हराकर TMC की विजय-परंपरा जारी रखी।
लोकसभा चुनावों में TMC का प्रदर्शन
बालीगंज लोकसभा क्षेत्र में भी TMC का वर्चस्व बरकरार रहा है। 2014 में TMC ने BJP पर 14,352 वोटों की बढ़त बनाई, जो 2019 में बढ़कर 54,452 वोट और 2024 में 56,113 वोट हो गई। BJP पिछले कुछ चुनावों में मुख्य विपक्षी के रूप में उभरी है, लेकिन TMC के गढ़ को भेदने में अब तक असफल रही है। लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन भी अपनी पुरानी ताकत हासिल करने के लिए संघर्षरत है। आने वाले वर्षों में विपक्षी दलों के लिए इस सीट पर TMC को चुनौती देना एक बड़ा राजनीतिक लक्ष्य बना रहेगा।