सिलीगुड़ी सीट पर भाजपा की ऐतिहासिक जीत: शंकर घोष ने टीएमसी को 73,000 से ज़्यादा वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा की प्रतिस्पर्धी सीट सिलीगुड़ी पर 4 मई 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार शंकर घोष ने 73,000 से अधिक मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिससे तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी शिकस्त मिली। घोष को कुल 1,20,760 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी TMC के गौतम देब केवल 47,568 वोट ही हासिल कर सके।
मुख्य चुनाव परिणाम
इस सीट पर तीन प्रमुख दलों के बीच मुकाबला रहा। भाजपा के शंकर घोष 1,20,760 वोट लेकर पहले स्थान पर रहे। TMC के गौतम देब 47,568 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) — के उम्मीदवार सरदिन्दु चक्रवर्ती (जॉय) तीसरे स्थान पर रहे। जीत का अंतर इस सीट के इतिहास में उल्लेखनीय माना जा रहा है।
सिलीगुड़ी सीट का राजनीतिक इतिहास
सिलीगुड़ी की राजनीति हमेशा से बदलते समीकरणों के लिए जानी जाती रही है। CPI(M) ने यहाँ सर्वाधिक आठ बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने चार बार यह सीट जीती है। 2011 में TMC के उम्मीदवार ने बाज़ी मारी, तो 2016 में वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने वापसी की। 2021 में भाजपा ने पहली बार यहाँ से जीत हासिल की थी। इस तरह 2011 के बाद से हर चुनाव में अलग-अलग पार्टी की जीत ने इसे राज्य की सबसे प्रतिस्पर्धी सीटों में से एक बना दिया है।
सिलीगुड़ी की भौगोलिक और आर्थिक अहमियत
दार्जिलिंग जिले में स्थित सिलीगुड़ी, कोलकाता और आसनसोल के बाद पश्चिम बंगाल का तीसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र है। जलपाईगुड़ी के साथ मिलकर यह 'ट्विन सिटी' का स्वरूप लेता है और दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है। पूर्वी हिमालय की तलहटी और महानंदा नदी के किनारे बसा यह शहर 'नॉर्थ-ईस्ट का गेटवे' कहलाता है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के निकट होने के कारण इसका भौगोलिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व विशेष रूप से बड़ा है।
आर्थिक दृष्टि से सिलीगुड़ी चाय, लकड़ी, पर्यटन और परिवहन — इन चार प्रमुख क्षेत्रों पर टिका है। यह उत्तर-पूर्व और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक बड़ा व्यापारिक व वितरण केंद्र है। कनेक्टिविटी के लिहाज़ से भी यह दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों से जुड़ा प्रमुख हब है।
मतदाता संरचना और जागरूकता
यह विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह शहरी है और इसमें सिलीगुड़ी नगर निगम के 33 वार्ड शामिल हैं। 2024 में यहाँ करीब 2.39 लाख मतदाता पंजीकृत थे। इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 8.84%, अनुसूचित जनजाति 1.26% और मुस्लिम मतदाता करीब 6.20% हैं। ऐतिहासिक रूप से यहाँ का मतदान प्रतिशत अच्छा रहा है, जो इस क्षेत्र की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।
भौगोलिक संवेदनशीलता
सिलीगुड़ी हाई-रिस्क सिस्मिक जोन 4 में आता है, जिससे यहाँ भूकंप का खतरा बना रहता है। 2011 के भूकंप समेत कई झटकों ने इस संवेदनशीलता को उजागर किया है। इसके अलावा महानंदा और तीस्ता नदियों के कारण मानसून के दौरान बाढ़ का जोखिम भी बना रहता है। यह जीत ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा अपनी राजनीतिक पकड़ मज़बूत करने की कोशिश में है, और सिलीगुड़ी का यह परिणाम उस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।