सिलीगुड़ी सीट पर भाजपा की ऐतिहासिक जीत: शंकर घोष ने टीएमसी को 73,000 से ज़्यादा वोटों से हराया

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सिलीगुड़ी सीट पर भाजपा की ऐतिहासिक जीत: शंकर घोष ने टीएमसी को 73,000 से ज़्यादा वोटों से हराया

सारांश

सिलीगुड़ी में भाजपा के शंकर घोष ने 73,000 से अधिक वोटों के अंतर से TMC को धूल चटाई — यह अंतर इस सीट के इतिहास में उल्लेखनीय है। 2011 के बाद से हर चुनाव में अलग पार्टी जीतने वाली इस सीट पर भाजपा की यह लगातार दूसरी जीत पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

भाजपा के शंकर घोष ने सिलीगुड़ी सीट पर 1,20,760 वोट हासिल कर जीत दर्ज की।
TMC के गौतम देब को 47,568 वोट मिले; जीत का अंतर 73,000 से अधिक मतों का रहा।
CPI(M) के सरदिन्दु चक्रवर्ती (जॉय) तीसरे स्थान पर रहे।
2021 के बाद भाजपा की यह सिलीगुड़ी से लगातार दूसरी जीत है; CPI(M) ने यहाँ सर्वाधिक 8 बार जीत दर्ज की है।
सिलीगुड़ी में 2024 में करीब 2.39 लाख पंजीकृत मतदाता थे; सीट पूरी तरह शहरी है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा की प्रतिस्पर्धी सीट सिलीगुड़ी पर 4 मई 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार शंकर घोष ने 73,000 से अधिक मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की, जिससे तृणमूल कांग्रेस (TMC) को करारी शिकस्त मिली। घोष को कुल 1,20,760 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी TMC के गौतम देब केवल 47,568 वोट ही हासिल कर सके।

मुख्य चुनाव परिणाम

इस सीट पर तीन प्रमुख दलों के बीच मुकाबला रहा। भाजपा के शंकर घोष 1,20,760 वोट लेकर पहले स्थान पर रहे। TMC के गौतम देब 47,568 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) — के उम्मीदवार सरदिन्दु चक्रवर्ती (जॉय) तीसरे स्थान पर रहे। जीत का अंतर इस सीट के इतिहास में उल्लेखनीय माना जा रहा है।

सिलीगुड़ी सीट का राजनीतिक इतिहास

सिलीगुड़ी की राजनीति हमेशा से बदलते समीकरणों के लिए जानी जाती रही है। CPI(M) ने यहाँ सर्वाधिक आठ बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने चार बार यह सीट जीती है। 2011 में TMC के उम्मीदवार ने बाज़ी मारी, तो 2016 में वामपंथी नेता अशोक भट्टाचार्य ने वापसी की। 2021 में भाजपा ने पहली बार यहाँ से जीत हासिल की थी। इस तरह 2011 के बाद से हर चुनाव में अलग-अलग पार्टी की जीत ने इसे राज्य की सबसे प्रतिस्पर्धी सीटों में से एक बना दिया है।

सिलीगुड़ी की भौगोलिक और आर्थिक अहमियत

दार्जिलिंग जिले में स्थित सिलीगुड़ी, कोलकाता और आसनसोल के बाद पश्चिम बंगाल का तीसरा सबसे बड़ा शहरी केंद्र है। जलपाईगुड़ी के साथ मिलकर यह 'ट्विन सिटी' का स्वरूप लेता है और दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा है। पूर्वी हिमालय की तलहटी और महानंदा नदी के किनारे बसा यह शहर 'नॉर्थ-ईस्ट का गेटवे' कहलाता है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के निकट होने के कारण इसका भौगोलिक और अंतरराष्ट्रीय महत्व विशेष रूप से बड़ा है।

आर्थिक दृष्टि से सिलीगुड़ी चाय, लकड़ी, पर्यटन और परिवहन — इन चार प्रमुख क्षेत्रों पर टिका है। यह उत्तर-पूर्व और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक बड़ा व्यापारिक व वितरण केंद्र है। कनेक्टिविटी के लिहाज़ से भी यह दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और पूर्वोत्तर भारत के अन्य हिस्सों से जुड़ा प्रमुख हब है।

मतदाता संरचना और जागरूकता

यह विधानसभा क्षेत्र पूरी तरह शहरी है और इसमें सिलीगुड़ी नगर निगम के 33 वार्ड शामिल हैं। 2024 में यहाँ करीब 2.39 लाख मतदाता पंजीकृत थे। इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 8.84%, अनुसूचित जनजाति 1.26% और मुस्लिम मतदाता करीब 6.20% हैं। ऐतिहासिक रूप से यहाँ का मतदान प्रतिशत अच्छा रहा है, जो इस क्षेत्र की राजनीतिक जागरूकता को दर्शाता है।

भौगोलिक संवेदनशीलता

सिलीगुड़ी हाई-रिस्क सिस्मिक जोन 4 में आता है, जिससे यहाँ भूकंप का खतरा बना रहता है। 2011 के भूकंप समेत कई झटकों ने इस संवेदनशीलता को उजागर किया है। इसके अलावा महानंदा और तीस्ता नदियों के कारण मानसून के दौरान बाढ़ का जोखिम भी बना रहता है। यह जीत ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में भाजपा अपनी राजनीतिक पकड़ मज़बूत करने की कोशिश में है, और सिलीगुड़ी का यह परिणाम उस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक वोटों का यह अंतर महज़ एक स्थानीय जीत नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के शहरी मतदाताओं में TMC के प्रति बढ़ती उदासीनता का संकेत है। गौरतलब है कि गौतम देब सिलीगुड़ी के पूर्व महापौर और TMC के वरिष्ठ चेहरे रहे हैं — उनकी इतनी बड़ी हार पार्टी के संगठनात्मक कमज़ोरी को उजागर करती है। 2011 के बाद से हर चुनाव में पार्टी बदलने वाली इस सीट पर भाजपा की लगातार दूसरी जीत बताती है कि यह 'स्विंग सीट' अब भाजपा के पक्ष में स्थिर होती दिख रही है। असली सवाल यह है कि क्या TMC उत्तर बंगाल के शहरी केंद्रों में अपनी खोई ज़मीन वापस पा सकती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिलीगुड़ी विधानसभा सीट पर 2026 में किसने जीत दर्ज की?
भाजपा के शंकर घोष ने सिलीगुड़ी सीट पर 1,20,760 वोट पाकर जीत दर्ज की। उन्होंने TMC के गौतम देब को 73,000 से अधिक मतों के अंतर से हराया।
सिलीगुड़ी सीट पर जीत का अंतर कितना रहा?
भाजपा के शंकर घोष और TMC के गौतम देब के बीच जीत का अंतर 73,000 से अधिक वोटों का रहा। घोष को 1,20,760 और देब को 47,568 वोट मिले।
सिलीगुड़ी सीट का राजनीतिक इतिहास क्या रहा है?
सिलीगुड़ी में CPI(M) ने सर्वाधिक आठ बार जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस ने चार बार। 2011 में TMC, 2016 में CPI(M) और 2021 में पहली बार भाजपा ने यह सीट जीती थी। 2011 के बाद से हर चुनाव में अलग पार्टी की जीत ने इसे अत्यंत प्रतिस्पर्धी सीट बनाया है।
सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र में कितने मतदाता हैं?
2024 के आँकड़ों के अनुसार सिलीगुड़ी विधानसभा क्षेत्र में करीब 2.39 लाख पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें अनुसूचित जाति के मतदाता लगभग 8.84%, अनुसूचित जनजाति 1.26% और मुस्लिम मतदाता करीब 6.20% हैं।
सिलीगुड़ी को 'नॉर्थ-ईस्ट का गेटवे' क्यों कहा जाता है?
सिलीगुड़ी नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के निकट स्थित है और पूर्वोत्तर भारत के लिए प्रमुख व्यापारिक व परिवहन हब है। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों से इसकी कनेक्टिविटी इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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