सुजापुर में TMC की बड़ी जीत: सबीना यास्मीन ने 60,287 वोटों से कांग्रेस गढ़ में लगातार दूसरी बार दर्ज की जीत
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उम्मीदवार और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री सबीना यास्मीन ने 4 मई 2026 को घोषित 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजों में मालदा जिले की सुजापुर विधानसभा सीट (सीट नंबर 53) पर शानदार जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, उन्होंने 1,12,795 वोट हासिल करते हुए कांग्रेस के अब्दुल हन्नान को 60,287 वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया — और इस तरह कांग्रेस के दशकों पुराने गढ़ में TMC की पकड़ को और मज़बूत कर दिया।
चुनाव परिणाम का पूरा विवरण
इस बार सुजापुर में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला। TMC की सबीना यास्मीन को 1,12,795 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के अब्दुल हन्नान 52,508 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार अभिजीत रजक 20,066 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मालदा को पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, इसलिए यह मुकाबला TMC और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया था — और नतीजा TMC के पक्ष में रहा।
सुजापुर का राजनीतिक इतिहास
1957 में गठित सुजापुर विधानसभा सीट को लंबे समय तक कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता रहा। दिग्गज कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ए.बी.ए. गनी खान चौधरी (जिन्हें 'बरकत दा' भी कहा जाता था) के परिवार का इस क्षेत्र पर वर्षों तक प्रभाव रहा। 1967 से 1977 तक गनी खान चौधरी लगातार जीतते रहे और बाद में रूबी नूर, मौसम नूर और ईशा खान चौधरी जैसे नेताओं ने इस विरासत को आगे बढ़ाया।
गौरतलब है कि 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने पहली बार इस किले में सेंध लगाई, जब मोहम्मद अब्दुल गनी ने पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाई। यह उस लंबी कांग्रेसी वर्चस्व की श्रृंखला का पहला बड़ा टूटना था।
TMC की रणनीतिक बदलाव और सबीना यास्मीन का दांव
2026 में TMC ने रणनीतिक बदलाव करते हुए 2021 के विजेता मोहम्मद अब्दुल गनी की जगह मोथाबाड़ी की पूर्व विधायक और मंत्री सबीना यास्मीन को चुनावी मैदान में उतारा। यह दांव पूरी तरह सफल साबित हुआ। सुजापुर एक अल्पसंख्यक (मुस्लिम) बहुल क्षेत्र है, जहाँ के मतदाता चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं — और सबीना यास्मीन इस जनसांख्यिकीय समीकरण को साधने में पूरी तरह सफल रहीं।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
सुजापुर विधानसभा क्षेत्र मालदा दक्षिण लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। यह ऐसे समय में आया है जब TMC पूरे पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस के लिए यह हार उसकी घटती संगठनात्मक ताकत का संकेत है, खासकर उन सीटों पर जहाँ अल्पसंख्यक मतदाता निर्णायक हैं।
आगे क्या
सबीना यास्मीन की यह निर्णायक जीत न केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक कद को मज़बूत करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि TMC ने मालदा जिले में कांग्रेस के पारंपरिक गढ़ पर अपनी पकड़ और सुदृढ़ कर ली है। अब सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस क्षेत्र में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने के लिए संगठनात्मक पुनर्निर्माण कर पाएगी।