कस्बा विधानसभा 2026: टीएमसी के जावेद अहमद खान की लगातार चौथी जीत, 20,974 वोटों से BJP को हराया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की कस्बा विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के जावेद अहमद खान ने 2026 विधानसभा चुनाव में लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार संदीप बनर्जी को 20,974 वोटों के अंतर से पराजित किया। 4 अप्रैल को घोषित परिणाम में खान को 1,17,893 मत मिले, जबकि बनर्जी को 96,919 वोट ही मिल सके।
मुख्य मतगणना परिणाम
मतगणना के आँकड़ों के अनुसार, तीसरे स्थान पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — CPI(M) — के दीपू दास रहे, जबकि चौथे स्थान पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के मोहम्मद हासिम जीशान अहमद रहे। मुख्य मुकाबला TMC, BJP और वाम मोर्चे के बीच माना गया था, लेकिन अंतिम नतीजे TMC के पक्ष में एकतरफा रहे। इस सीट पर लगभग 70 से 71 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जिसे कोलकाता की शहरी सीटों के लिहाज से उल्लेखनीय माना जा रहा है।
कस्बा सीट का राजनीतिक महत्व
कस्बा विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले की प्रमुख शहरी सीटों में गिनी जाती है और कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। इस संसदीय सीट पर फिलहाल TMC का कब्जा है और माला रॉय यहाँ से सांसद हैं। कोलकाता महानगर क्षेत्र में होने के कारण यह सीट राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील मानी जाती है।
सीट का इतिहास और TMC का दबदबा
गौरतलब है कि कस्बा विधानसभा सीट का वर्तमान स्वरूप 2006 की परिसीमन प्रक्रिया के बाद तय हुआ और 2011 में यहाँ पहली बार विधानसभा चुनाव कराया गया। तब से अब तक जावेद अहमद खान ने 2011, 2016, 2021 और अब 2026 में लगातार चार बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। यह ऐसे समय में आया है जब BJP पश्चिम बंगाल में TMC के गढ़ों में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कस्बा में उसका प्रयास एक बार फिर नाकाम रहा।
विपक्ष की स्थिति
BJP ने संदीप बनर्जी को प्रत्याशी बनाकर इस सीट पर कड़ी चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन 20,974 वोटों का अंतर दर्शाता है कि TMC की पकड़ इस सीट पर अभी भी मजबूत बनी हुई है। CPI(M) और कांग्रेस भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सफल रहे, हालाँकि वे मुख्य प्रतिस्पर्धा में नहीं थे। आलोचकों का कहना है कि विपक्षी दलों के बिखरे वोट भी TMC की जीत को आसान बनाते हैं।
आगे की राजनीतिक तस्वीर
कस्बा सीट पर TMC की यह लगातार चौथी जीत पार्टी के लिए कोलकाता के शहरी क्षेत्रों में अपने जनाधार की मजबूती का संकेत है। BJP और वाम मोर्चा दोनों के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का अवसर है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष इस सीट पर अपनी रणनीति में क्या बदलाव लाता है।