जोड़ासांको सीट पर भाजपा के विजय ओझा की जीत, TMC के विजय उपाध्याय को 5,797 वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल की जोड़ासांको विधानसभा सीट पर 4 मई 2026 को घोषित चुनाव परिणाम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार विजय ओझा ने 5,797 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। ओझा को कुल 52,868 मत मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी विजय उपाध्याय 47,071 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे।
जोड़ासांको सीट का परिचय
जोड़ासांको विधानसभा क्षेत्र कोलकाता उत्तर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है और कोलकाता के मध्य भाग में स्थित है। यह 1951 में अस्तित्व में आया और तब से राज्य में हुए सभी 17 विधानसभा चुनावों में भाग ले चुका है। यह सीट कोलकाता नगर निगम के 11 वार्डों से मिलकर बनी है और पूरी तरह शहरी स्वरूप वाली है, जहाँ कोई ग्रामीण मतदाता नहीं हैं।
सीट का राजनीतिक इतिहास
इस सीट पर दशकों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का वर्चस्व रहा और पार्टी ने यहाँ 11 बार जीत दर्ज की। 1952 में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक और 1977 में जनता पार्टी ने एक-एक बार सफलता पाई। 1998 में ममता बनर्जी के कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के गठन के बाद यहाँ के राजनीतिक समीकरण बदल गए। 2001 के बाद से TMC ने इस सीट पर लगातार पाँच बार जीत हासिल की थी।
पिछले विधानसभा चुनावों की स्थिति
2021 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 50 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिसमें TMC के विवेक गुप्ता ने BJP की मीना देवी पुरोहित को 13 प्रतिशत वोटों के अंतर से हराया था। 2016 में 54 प्रतिशत मतदान के साथ TMC की स्मिता बख्शी ने BJP के राहुल (बिस्वजीत) सिन्हा को 6 प्रतिशत वोटों के अंतर से पराजित किया था। गौरतलब है कि इस सीट पर कई बार मुकाबला बेहद करीबी रहा है।
लोकसभा चुनावों में मतदान का रुझान
लोकसभा चुनावों में इस विधानसभा क्षेत्र की स्थिति थोड़ी भिन्न रही है। 2014 में TMC और BJP के बीच अंतर 16,482 वोट का था, जो 2019 में घटकर 3,882 रह गया, और बाद में पुनः बढ़कर 7,401 वोट तक पहुँच गया। यह ऐसे समय में आया है जब 2009 में कोलकाता उत्तर लोकसभा सीट के गठन के बाद से TMC ने सभी संसदीय चुनावों में जीत दर्ज की है।
इस जीत का महत्व
BJP की इस जीत को कोलकाता के शहरी मतदाताओं के बदलते रुझान के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐसी सीट पर आई जहाँ TMC ने 2001 से लगातार पाँच विधानसभा चुनाव जीते थे। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या BJP इस शहरी जनाधार को आगे के चुनावों में भी बरकरार रख पाती है।