टॉलीगंज सीट पर ऐतिहासिक उलटफेर: भाजपा की पापिया अधिकारी ने अरूप बिस्वास को 6,000 वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उम्मीदवार पापिया अधिकारी ने 4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल की टॉलीगंज विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास को 6,000 से अधिक वोटों के अंतर से पराजित कर दिया। साउथ कोलकाता की इस हाई-प्रोफाइल सीट पर यह नतीजा राजनीतिक हलकों में बड़े उलटफेर के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह सीट 2001 से लगातार TMC के कब्जे में थी।
मुख्य चुनावी घटनाक्रम
अरूप बिस्वास 2006 से लगातार टॉलीगंज का प्रतिनिधित्व करते आ रहे थे और प्रत्येक चुनाव में उन्होंने अपनी जीत का अंतर बनाए रखा था। इस बार चुनावी समीकरण बदल गए और भाजपा ने TMC के इस मजबूत गढ़ में सेंध लगाने में सफलता पाई। आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर करीब 2.63 लाख मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें अनुसूचित जाति के मतदाता 10-12 प्रतिशत के आसपास हैं।
टॉलीगंज का राजनीतिक इतिहास
टॉलीगंज सीट का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। शुरुआती दशकों में वामपंथी दलों का यहाँ वर्चस्व था और उन्होंने इस सीट पर आठ बार जीत दर्ज की। 2001 के बाद TMC ने इसे अपने मजबूत किले में तब्दील कर लिया। 2009 के लोकसभा चुनाव में वामपंथी दल आगे रहे, जबकि 2014 के बाद से TMC ने लगातार बढ़त बनाए रखी। भाजपा ने धीरे-धीरे खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित किया और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी यही रुझान देखा गया था।
क्षेत्र की पहचान और जनसांख्यिकी
टॉलीगंज, जिसे 'मिनी-मुंबई' के नाम से भी जाना जाता है, केवल एक विधानसभा क्षेत्र नहीं बल्कि बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री — टॉलीवुड — का केंद्र माना जाता है। यह सीट साउथ 24 परगना जिले में स्थित है और जादवपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहाँ इंद्रपुरी और टेक्नीशियन स्टूडियो जैसे प्रमुख फिल्म स्टूडियो, महानायक उत्तम कुमार मेट्रो स्टेशन, टॉलीगंज क्लब और ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स स्थित हैं। यह क्षेत्र पूरी तरह शहरी है और कोलकाता नगर निगम के नौ वार्डों को कवर करता है। 2024 के आँकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में यहाँ मतदान प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है, जो शहरी मतदाताओं की उदासीनता को दर्शाती है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी
इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से टॉलीगंज एक महत्वपूर्ण हब है। मेट्रो, ट्राम और रेलवे कनेक्टिविटी इसे कोलकाता के अन्य हिस्सों से जोड़ती है। सड़क मार्ग से यह लेक गार्डन्स, बेहाला, जादवपुर और अन्य इलाकों से भली-भाँति जुड़ा हुआ है।
आगे क्या
भाजपा की इस जीत से पश्चिम बंगाल में TMC के वर्चस्व को एक बड़ी चुनौती मिली है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब TMC और भाजपा के बीच राज्य में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा इस जीत को किस तरह अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने में इस्तेमाल करती है और TMC इस हार से क्या सबक लेती है।